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कायम की थी हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल

जालियांवाला बाग के हत्याकांड के 100 साल पूरा होने पर ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम ने विचार गोष्ठी में एक्टू के नेता श्याम लाल साहू ने आधार वक्तव्य रखा।

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भिलाई

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Abdul Salam

Apr 14, 2019

BHILAI

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भिलाई. सेक्टर-6 मलयाली ग्रंथालय में जालियांवाला बाग के हत्याकांड के 100 साल पूरा होने पर ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम ने विचार गोष्ठी रखा। इस मौके पर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। एक्टू के नेता व एआईपीएफ छत्तीसगढ़ के वर्किंग कमेटी सदस्य श्याम लाल साहू ने आधार वक्तव्य रखा। लक्ष्मी कृष्णन ने कहा कि आज से 100 साल पहले पंजाब प्रांत में डॉक्टर सत्यपाल और डॉक्टर सैफुद्दीन किचलू के नेतृत्व में रामनवमी के दिन हुई रैली ने हिंदू-मुस्लिम एकता की जो मिसाल कायम की थी, उससे खौफ खाई ब्रिटिश सरकार ने दोनों नेताओं को गिरफ्तार कर अनजान जगह में नजरबंद कर दिया था। आज भी राजनीतिक दल हिंदू-मुस्लिम के नाम पर बांटो और राज करो की नीति अपनाकर अंग्रेजी हुकूमत के पदचिन्हों पर चल रही है।

ब्रिटिश सत्ता को 1857 की पुनरावृत्ति का डर सताने लगा

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता युवा आलोचक प्रोफेसर डॉक्टर सियाराम शर्मा ने कहा कि दरअसल उस दौरान देश में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तेजी से उभर रहे जनाक्रोश और हिंदू-मुस्लिम एकता से ब्रिटिश सत्ता को 1857 की पुनरावृत्ति का डर सताने लगा था। तब भारत में उभरते राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने और हिंदू-मुस्लिम एकता को खत्म कर बांटो और राज करो की नीति के तहत ब्रिटिश जज सर सिडनी आर्थर की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिशों के आधार पर मार्च, 1919 में काला कानून रॉलेट एक्ट लागू किए।

बर्बर हत्याकांड

शर्मा ने कहा कि जिसके खिलाफ पंजाब और बंगाल की जनता खुलकर सड़कों पर आ गई थी। इसी दरमियान बैसाखी के दिन अमृतसर के जालियांवाला बाग में इस एक्ट के विरोध में हजारों की संख्या में लोग एकत्र होकर शांतिपूर्ण सभा कर रहे थे। ब्रिटिश सेना के ब्रिगेडियर जनरल आरईएच डायर के निर्देश पर बिना कोई सूचना दिए लगातार फायरिंग कर इस बर्बर हत्याकांड को अंजाम दिया।

आज भी अपना रहे उस तरीके को
उन्होंने कहा कि आज भी फूट डालो राज करो की नीतियों को अपनाया जा रहा है। जिसमें फासीवादी शक्तियां मजबूत हो रही हैं। डॉक्टर अम्बेडकर के विचार पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में माक्र्सवाद को समझने के लिए अंबेडकर को अधिक से अधिक पढऩे की ज़रूरत है, क्योंकि उन्होंने ही माक्र्सवाद को भारतीय परिप्रेक्ष्य में लागू करने के लिए गंभीर चिंतन किया था। वे मानते थे कि कम्युनिज़्म या साम्यवाद, सर्वहारा यानी मेहनतकश वर्ग की मुक्ति का सबसे बेहतर सिद्धांत है। कार्यक्रम का संचालन माले के नेता बृजेंद्र तिवारी ने किया। अंत में 100 कैंडल जलाकर जालियांवाला बाग़ के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।