
Black wheat sown in 2 hectares in Sankhada and Ladpura in the district in bhilwara
भीलवाड़ा।
जिले में पहली बार काले गेहूं की खेती की जा रही है। यह नवाचार जलधारा विकास संस्थान की ओर से किया गया है। काले गेहूं की बुवाई जिले के सांखडा व लाडपुरा में मध्यप्रदेश से बीज मंगा कर कराई गई है। एक-एक हैक्टेयर में खेती अच्छी हुई तो यह भीलवाड़ा जिले के किसानों के लिए एक वरदान होगा। नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नॉलजी इंस्टीट्यूट ने इसे नाबी एमजी नाम दिया। काले गेहूं में फाइबर कंटेट होने के कारण इसे कैंसर और टाइबिटीज रोगियों के लिए गुणकारी माना गया है। जिले के सांखड़ा व लाडपुरा के किसान ने काले गेहूं की पहली फसल की बुवाई की है।
संस्थान सचिव बालकृष्ण शर्मा ने बताया कि गेहूं सामान्य गेहूं की तरह बिजाई की गई और 140 दिनों में गेहूं की फसल मिलेगी। सामान्य गेहूं में बिजाई के लिए एक बीघा में 45 किलो बीज लगता है जबकि नाबी एमजी 30 किलो ही लगता है। इस फसल के पकाव में भी सामान्य तौर पर 130 से 140 दिन लगते है जबकि पानी की जरूरत भी सामान्य फसल जितनी ही है।
सामान्य गेहूं से चार गुना महंगा है
नामी एमजी गेहूं कैंसर, डायबिटीज, मोटापा और तनाव की बीमारी में गुणकारी नाबी एमजी यानी काले गेहूं की कीमत भी सामान्य गेहूं से चार चुना ज्यादा है। सामान्य तौर पर गेहूं के बीज 18 रुपए किलो तक मिल जाता है जबकि काले गेहूं के बीज 80 रुपए किलो तक मिलते हैं। बाजार में आमजन के लिए इस गेहूं का आटा करीब 125-130 रुपए किलो मिलता है। पंजाब, एमपी सहित देश के महानगरों में नाबी एमजी गेहूं की डिमांड बढऩे लगी है।
इसलिए इस गेहूं का रंग होता है काला
सात बरसों के रिसर्च के बाद पंजाब के मोहाली स्थित नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नॉलजी इंस्टीट्यूट या नाबी ने विकसित किया है। इस गेहूं की खास बात यह है कि इसका रंग काला है। काले गेहूं में कैंसर, डायबिटीज, तनावए दिल की बीमारी और मोटापे जैसी बीमारियों की रोकथाम करने की क्षमता है। जानकारी के अनुसार फलों, सब्जियों और अनाज के रंग उनमें मौजूद प्लांट पिगमेंट या रंजक कणों की मात्रा पर निर्भर होते हैं। काले गेहूं में एंथोसाएनिन नाम के पिगमेंट होते हैं। एंथोसाएनिन की अधिकता से फलों, सब्जियों, अनाजों का रंग नीला, बैंगनी या काला हो जाता है। एंथोसाएनिन नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट भी है। इसी वजह से यह सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। आम गेहूं में एंथोसाएनिन महज 5 पीपीएम होता है, लेकिन काले गेहूं में यह 100 से 200 पीपीएम के आसपास होता है। एंथोसाएनिन के अलावा काले गेहूं में जिंक और आयरन की मात्रा में भी अंतर होता है। काले गेहूं में आम गेहूं की तुलना में 60 फीसदी आयरन ज्यादा होता है। हालांकि प्रोटीन, स्टार्च और दूसरे पोषक तत्व समान मात्रा में होते हैं। सामान्य गेहूं की तुलना में काले गेहूं की न्यूटीशियन वैल्यू अधिक है। इसके अलावा इसमें फाइबर कंटेट भी है जो शुगर और कैंसर रोगियों के लिए फायदेमंद होता है।
Published on:
07 Dec 2020 10:50 pm
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