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सरकारी विद्यालयों के बच्चों को बुराइयों को समझने की मिलेगी सीख

शिक्षा निदेशक ने राज्य के सभी संयुक्त निदेशकों को लिखे पत्र

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Children of government schools will be taught to understand the evils

Children of government schools will be taught to understand the evils

सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ समाज की बुराइयों को समझने और रोकने की सीख भी दी जाएगी। राजस्थान सरकार ने फैसला किया है कि बच्चों को अब भ्रूण लिंग जांच जैसे ग़लत और गैर कानूनी कामों के बारे में बताया जाएगा, ताकि वे बचपन से ही बेटा-बेटी को बराबरी से देखने की सोच बना सकें। बच्चों भ्रूण लिंग परीक्षण और पीसीपीएंडीटी एक्ट आदि के बारे में भी बताया जाएगा।

क्या होता है? भ्रूण लिंग परीक्षण

भ्रूण लिंग परीक्षण का मतलब है गर्भ में बच्चे का लिंग (लड़का या लड़की) जानना। भारत में यह ग़ैरकानूनी है, क्योंकि कुछ लोग सिर्फ बेटे की चाह में बेटियों को जन्म से पहले ही नहीं आने देते। यह बहुत ही गलत और अमानवीय काम है।

पीसीपीएनडीटी कानून क्या है?

इस ग़लत काम को रोकने के लिए सरकार ने एक सख्त कानून बनाया है। इसका नाम पीसीपीएनडीटी अधिनियम (प्री कन्सेप्शन एंड प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक एक्ट)। इसके तहत भ्रूण लिंग जांच करने वाले डॉक्टरों और इस अपराध में शामिल लोगों को कड़ी सज़ा दी जा सकती है।

स्कूलों में देंगे जानकारी

राजस्थान के शिक्षा निदेशक आशीष मोदी ने राज्य के सभी संयुक्त निदेशकों को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि स्कूलों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों, भाषण, पोस्टर मेकिंग, निबंध लेखन, चित्रकला जैसी गतिविधियों में अब भ्रूण लिंग परीक्षण रोकथाम को भी शामिल किया जाए। इससे बच्चे बचपन से ही समाज की अच्छाई-बुराई को पहचानना सीख सकेंगे।

चिकित्सा विभाग से लेंगे सहयोग

शिक्षा विभाग यह काम चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर करेगा। स्कूलों में जानकारी देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पीसीपीएनडीटी सेल के अधिकारी बच्चों को आसान भाषा में समझाएंगे कि क्यों यह कानून बना, और बेटा-बेटी में भेद क्यों नहीं करना चाहिए।