
come to drink sour gum then come live to understand in bhilwara
भीलवाड़ा।
संत सत्यानंद महाराज ने कहा कि गम का घूंट पीना जिसको आ गया उसको इस जहां में जीना भी आ गया। इस जगत में जो व्यक्ति दुख को सहन कर लेता है उसे ही सुखी रहने का अधिकार मिलता है। शास्त्रों में भी लिखा है कि समुद्र मंथन देवताओं और दानवों ने अमृत प्राप्त करने के लिए किया, लेकिन अमृत से पहले जहर निकला। जीवन में भी यही होता है जो हम चाहते है वो बाद में मिलता है और जो हम नहीं चाहते है वो पहले मिल जाता है। इसलिए बाद में मिलने वाले को पाने के लिए पहले वाले को स्वीकारना चाहिए। जहां अमृत है वहां जहर, जहां फूल वहां कांटे, जहां सुख वहां दु:ख, जहां सम्मान है वहां अपमान भी है। इनको जो स्वीकार कर लेता है वही जीवन रूपी अमृत का अधिकारी होता है।
संत सत्यानंद मंगलवार को शास्त्री नगर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर छात्रावास में चल रही भागवत कथा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने जगत की रक्षा के लिए विष का पान किया। विष का भगवान शिव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा क्योंकि उनके सिर पर ज्ञान की गंगा बहती है। कथा के दौरान संत ने चादर हो गई बहुत पुरानी अब तो सोच समझ अभिमानी भजन गाया तो श्रद्धालु झूमने व महिलाएं नृत्य करने लगी।
Published on:
23 Oct 2018 07:46 pm
