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छह दशक में महज तीन महिला विधायक, 1952 से अब तक कांग्रेस-भाजपा से महज पांच बार दिया गया टिकट

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In just six decades, three women legislators in bhilwara

In just six decades, three women legislators in bhilwara

नरेंद्र वर्मा . भीलवाड़ा।

नारी सशक्तीकरण को लेकर राजनीति में जाजम बिछने और उस पर सम्बल देने के पुख्ता दावे होने लगे हैं। इन दावों को हवा देने के लिए विभिन्न संगठनों में समानांतर महिला संगठन भी खड़े हुए हैं। यह बात दीगर है कि राजनीति में सशक्तीकरण की हकीकत धरातल पर खोखली साबित हो रही। चुनावी आंकड़े बताते हैं कि जिले में 1952 से हो रहे विधानसभा चुनाव में अब तक 124 प्रत्याशी विजयी हुए। भीलवाड़ा जिले के सातों विधानसभा क्षेत्र से पिछले छह दशक में सिर्फ पांच बार महिलाओं को चुनाव लडऩे का मौका मिला। इनमें तीन बार महिलाएं विधायक चुनी गईं। चुनाव की घोषणा के साथ ही भाजपा, कांग्रेस के साथ ही अन्य दलों से जुड़ी महिलाओं की टिकट मिलने की उम्मीद हरी होने लगी है। लेकिन 33 फीसदी आरक्षण का दाव होने के बावजूद जिले में महिलाओं को इस बार भी प्राथमिकता मिलने पर संशय है। हालांकि भाजपा व कांग्रेस की महिला दावेदारों की सूची लम्बी है, लेकिन उनकी आस भंवरजाल में उलझी हुई है।


पांच साल में बढ़े डेढ़ लाख वोटर
हाल ही निर्वाचन विभाग ने मतदाता सूचियों की पुनरीक्षण में विशेष जांच करवाई। इसके तहत जिले में 17 लाख 07 हजार 283 मतदाता विधायक चुनेंगे। वर्ष 2013 के मुकाबले एक लाख 35 हजार 53 महिला मतदाता बढ़ी हैं। वर्ष 2013 में सात लाख 06 हजार 128 महिला मतदाता थी जो 2018 में बढ़कर आठ लाख 41 हजार 662 हो गई।


भीलवाड़ा व मांडलगढ़ में ही मिला मौका
भीलवाड़ा व मांडलगढ़ अब से कुल तीन महिलाओं को विधानसभा में प्रतिनिधि मिल सका। भीलवाड़ा से जिले में पहली महिला विधायक के रूप 1957 में कमला बाई कांग्रेस से जीती। इसके बाद 1962 में कांग्रेस की ही निर्मला देवी ने जीत दर्ज कर विधानसभा में कदम रखा। इसके बाद 60 साल तक फिर जिले से किसी महिला के लिए विधानसभा की राह नहीं खुली। भाजपा की कीर्ति कुमारी ने यह राह वर्ष 2013 में मांडलगढ़ से चुनाव जीतकर खोली। दुर्भाग्यवश कीर्ति कुमारी का असामयिक निधन होने से पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं हो सका।

पैनलों में नाम ही नहीं जाता
राजनीतिक दलों में महिला दावेदारों ने टिकट के लिए फिर आवाज बुलंद की है। दर्जनों महिलाओं ने अजमाइश शुरू की है। प्रदेश स्तरीय महिला नेताओं ने टिकट को लेकर आलाकमानों को लिखा भी है। दावेदारों की पीड़ा है कि कांग्रेस एवं भाजपा अंतिम पैनलों में महिला दावेदारों के नाम भेजते ही नहीं। यदि भेजते हैं तो उन पर जोर कम रहता है। एेसे में जयपुर व दिल्ली में उनके नामों पर मंथन हीं नहीं हो पाता है।

सत्ता एवं संगठन में भाजपा ने महिलाओं को सदैव प्राथमिकता दी है। गत चुनाव में पार्टी ने मांडलगढ़ से र्कीति कुमारी को तीसरी बार प्रत्याशी बनाया और वे चुनाव भी जीती। इस चुनाव में महिलाओं की भागीदारी बढ़े एेसी उम्मीद है।
आरती कोगटा, जिलाध्यक्ष, भाजपा महिला मोर्चा


कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं को सदैव सम्मान मिला है। योग्य कार्यकर्ताओं को पूर्व में भी पार्टी ने मौका दिया है और जीती भी थीं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने जो चुनावी फार्मूला तय किया है, उससे जिले में दो विधानसभा में पार्टी प्रत्याशी महिलाएं हो सकती हैं।
रेखा हिरण, जिलाध्यक्ष, महिला कांग्रेस