
Ninth day of Das Lakshan festival: Uttam Akinchhan religion was worshipped
दस लक्षण पर्व के नवें दिन शुक्रवार को दिगंबर जैन समाज की ओर से उत्तम आकिंचन धर्म की आराधना की गई। इस अवसर पर आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में सुबह धार्मिक अनुष्ठान व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इस मौके पर पंडित राहुल जैन शास्त्री ने कहा कि आकिंचन त्याग के बाद निर्लेपन का नाम है। व्यक्ति भौतिक वस्तुओं का त्याग तो कर देता है, लेकिन यदि अहंकार रूपी कषाय शेष रह जाए तो वह पूर्ण नहीं माना जाता। पंडित जैन ने कहा कि व्यक्ति को अतीत की स्मृतियों और भविष्य की अपेक्षाओं से मुक्त रहकर, भोग-उपभोग की उपेक्षा करते हुए आत्मकल्याण की ओर अग्रसर होना चाहिए।
तीन पीढ़ियों ने किया अभिषेक
मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि दस लक्षण पर्व के तहत धर्म आराधना में शामिल होने के लिए जर्मनी निवासी अंकित बाकलीवाल भी विशेष रूप से भीलवाड़ा आए। उन्होंने अपने पिता अनिल बाकलीवाल व पुत्र आरव बाकलीवाल के साथ मिलकर स्वर्ण मुकुट धारण कर प्रथम अभिषेक व 108 रिद्धि मंत्रों से अभिषेक तथा शांतिधारा की। विमल कमल रारा ने शांतिनाथ भगवान की तथा अशोक चौधरी, महावीर काला, महेन्द्र छाबड़ा, सनत अजमेरा, बालचन्द शाह, ओमचन्द बाकलीवाल, रुपेन्द्र गोधा और राकेश ठोलिया ने अन्य प्रतिमाओं पर शांतिधारा की। आदिनाथ जिन मण्डल की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। धार्मिक भजनों और नाटिकाओं ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया। ट्रस्ट अध्यक्ष गोधा ने बताया कि शनिवार को अनन्त चतुर्दशी के कलश दोपहर 2 बजे मंदिर प्रांगण में होगा।
Published on:
05 Sept 2025 09:37 pm
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