
rajasthan election duty excuses in bhilwara
भीलवाड़ा।
विधानसभा चुनाव में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगते ही नाम कटवाने वालों की होड़ लग गई। कलक्ट्रेट में जिला निर्वाचन अधिकारी के पास रोज कई प्रार्थना पत्र आ रहे हैं, जिनमें तरह-तरह के कारण बता ड्यूटी से मुक्त करने की गुहार लगाई जा रही है। कलक्ट्रेट में 52 प्रार्थना पत्र आ चुके हैं। इसमें अलग-अलग तर्क दिए हैं ताकि ड्यूटी से मुक्ति मिले।
गुलाबपुरा क्षेत्र के एक शिक्षक का तर्क है- माता-पिता बुजुर्ग है। एेसे में एक दिन भी उनसे दूर नहीं रह सकता। उनकी सेवा करनी पड़ती है। चुनाव में अभी कर्मचारियों की मतदान व मतगणना कार्मिकों के रूप में लग रही है। इनका प्रशिक्षण शुरू हो गया है। एेसे में ड्यूटी कटवाने के लिए बीमारी का फंडा भी अपनाना शुरू किया है। ज्यादातर कर्मचारी निजी अस्पताल व डॉक्टरों से लंबी बीमारी और इलाज का विवरण लिखा पर्चा लेकर आ रहे हैं।
बीमारी के आधार पर अफसरों से चुनाव ड्यूटी से मुक्त करने की गुहार लगा रहे हैं। मतदानकार्मिकों में बढ़ती 'बीमारीÓ देखते प्रभारी जिला निर्वाचन अधिकारी ने मेडिकल बोर्ड गठित करने को कहा है। इसके तहत ड्यूटी कटवाने के लिए बीमारी का बहाना लाने वाले मतदान कार्मिकों को मेडिकल बोर्ड के सामने प्रस्तुत होना पड़ेगा। बोर्ड के चिकित्सक की रिपोर्ट पर ही अधिकारी ड्यूटी काटने के बारे में निर्णय लेंगे।
नाम कटवाने वालों में शिक्षक ज्यादा
जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगी है उनमें नाम कटवाने वाले शिक्षक ज्यादा है। वे प्रार्थना पत्र देने के साथ ही नेताओं व अन्य से सिफारिश भी करा रहे हैं। इस बार जिला निर्वाचन अधिकारी भी सख्ती बरत रही है क्योंकि मतदान में अधिक कर्मचारियों की जरुरत पड़ेगी।
शादी-समारोह से आएगी परेशानी
नवंबर व दिसंबर में खूब सावे हैं। कई कर्मचारी अपने परिवार में शादी-समारोह, मायरा आदि ले जाने का तर्क दे रहे हैं। एेसे प्रार्थना पत्रों पर जिला प्रशासन विचार करेगा लेकिन उन्हें संतुष्ट करना पड़ेगा। इसमें रिटर्निंग अधिकारी भी आगे से अनुमति लेकर ही नाम हटाएंगे।
चुनाव में ड्यूटी लगी है तो करनी ही पड़ेगी। कई लोग बीमारी का या अन्य बहाना लेकर आ रहे हैं तो उनकी जांच कराएंगे। मेडिकल बोर्ड भी गठित किया है। इस बार सख्ती बरती जाएगी।
शुचि त्यागी, जिला निर्वाचन अधिकारी
Published on:
02 Nov 2018 04:32 pm
