
पुत्र के निधन पर पिता ने कराया नेत्रदान (फोटो- पत्रिका)
भीलवाड़ा: पंचवटी निवासी स्वर्गीय राहुल जलोटा के निधन के उपरांत उनके पिता वीरेंद्र जलोटा ने साहसिक निर्णय लेते हुए पुत्र की आंखें दान करने का निर्णय लिया। यह नेत्रदान सर्व सिंधी समाज महासभा जिलाध्यक्ष राजकुमार खुशलानी, नगर अध्यक्ष परमानंद तनवानी और संगठन मंत्री ललित लखवानी के आग्रह पर संपन्न हुआ।
प्रवक्ता किशोर लखवानी ने बताया कि नेत्रदान की प्रक्रिया वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सुरेश भदादा के निर्देशन में चेतन प्रकाश भट्ट द्वारा की गई। यह समाज की ओर से किया गया 69वां नेत्रदान है।
नेत्रदान का अर्थ है किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आंखों को संरक्षित कर उन लोगों को देना, जिनकी आंखों की रोशनी चली गई है। आंखों का कॉर्निया प्रत्यारोपण कर अंधत्व से पीड़ित व्यक्ति को दोबारा देखने की क्षमता मिल सकती है। एक नेत्रदान से दो व्यक्तियों को नई दृष्टि मिलती है। यही कारण है कि इसे सबसे बड़ा मानवीय दान माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नेत्रदान मृत्यु के छह घंटे के भीतर किया जाना आवश्यक है। इसके लिए व्यक्ति को जीवनकाल में संकल्प पत्र भरकर रजिस्टर्ड कराया जा सकता है, वहीं परिजनों की सहमति से भी नेत्रदान संभव है। नेत्रदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और इससे मृतक के शरीर को कोई क्षति नहीं होती।
भीलवाड़ा जिले में हुए इस नेत्रदान ने एक बार फिर समाज को यह संदेश दिया है कि दुख की घड़ी में भी यदि परिवार मानवता के लिए सोचता है तो कई जीवनों में रोशनी लौट सकती है।
Updated on:
31 Aug 2025, 2:32 PM IST
Published on:
31 Aug 2025, 2:32 PM IST
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