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कच्ची बस्तियों में गुजार रहे जिंदगी, कौन बसाएगा इनका घर

नगर परिषद व नगर विकास न्यास की उलझनों में कच्ची बस्ती में रहने वाले लोग भी फंस गए है

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नगर परिषद व नगर विकास न्यास की उलझनों में कच्ची बस्ती में रहने वाले लोग भी फंस गए है

भीलवाड़ा।

नगर परिषद व नगर विकास न्यास की उलझनों में कच्ची बस्ती में रहने वाले लोग भी फंस गए है। शहर में 13 जगह दस हजार लोग कच्ची बस्तियों में रहते हैं। इनमें से आधे लोगों के पट्टे बने हुए हैं। बाकी लोग एेसे ही रह रहे हैं। कुछ जगह नगर विकास न्यास की तो कुछ नगर परिषद की है। अब ये लोग दोनों संस्थाओं के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कहीं पर भी सुनवाई नहीं हो रही है।

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कच्ची बस्ती विकास मंच के जिलाध्यक्ष गोवर्धन सिंह कटार ने बताया कि भीलवाड़ा शहर की विभिन्न कच्ची बस्तियों में समस्याओं का अंबार भरा पड़ा है मुख्यमंत्री जन कल्याण शिविर में शहर की किसी भी कच्ची बस्ती के लोगों को एक भी पट्टा जारी नहीं हुआ। यह शिविर पूरी तरह से फैल गया। गरीब लोग पट्टे के लिए तरसते रहे, मगर सरकार ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। कच्ची बस्तियों में ना ली है ना सड़क है ना कोई मूलभूत सुविधाएं है।

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आवास योजना का नहीं मिल रहा लाभ
प्रधानमंत्री जन आवास योजना का लाभ भी पात्र व्यक्तियों को नहीं मिल रहा है। इसका लाभ अपात्र लोग उठा रहे हैं। कच्ची बस्ती में रहने वाले लोगों को अगर प्रधानमंत्री जन आवास योजना का लाभ मिलता तो वह अपने कच्चे मकान को पक्का बना सकता था, मगर को लाभ भी इन लोगों को नहीं मिल रहा है। कच्ची बस्तियों के अंदर गंदगी का अंबार पड़ा हुआ है।


शौचालय बनाने के लिए नहीं मिले पूरे पैसे
लोगों ने बताया कि शौचालय की प्रथम किस्त नगर परिषद भीलवाड़ा ने दे दी है, मगर दूसरी किस्त के लिए कच्ची बस्ती के लोग नगरपरिषद के चक्कर काट काट कर थक चुके हैं। सरकार का हर घर में शौचालय निर्माण का कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है।


नहीं मिलता है लोन
कच्ची बस्ती में रहने वाले लोगों को अगर किसी बैंक में जाए तो उसे उस बैंक से लोन भी नहीं मिलता है। रोजगार के लिए लोन के लिए जाए तो भी उसको लोन नहीं दिया जाता है। नगरपरिषद से रोजगार के लिए आवेदन दिया जाता है, लेकिन जब बैंकों में भेजते हैं तो बैंक उसके आवेदन को निरस्त कर देती है। इसलिए यह सरकार कच्ची बस्ती के लोगों के लिए गरीब लोगों के लिए कुछ भी नहीं कर पाई।