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यहां महकी ‘रेगिस्तान की केसर’: शिक्षक भाटी ने खोजा राज्य पुष्प रोहिड़ा का कुनबा

Rohida flower: प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित स्थानीय शिक्षक दिनेश सिंह भाटी के शोधपरक प्रयासों से शाहपुरा तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में रोहिड़ा के दुर्लभ वृक्षों की पहचान की गई है

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Rohida flower: शाहपुरा। मरू प्रदेश की तपती धूप में अपनी पीत-केसरिया आभा बिखेरने वाला राजस्थान का राज्य पुष्प रोहिड़ा अब शाहपुरा के ग्रामीण अंचलों में भी अपनी जड़ें मजबूत कर रहा है।

रोहिड़ा के दुर्लभ वृक्षों की पहचान मानी जा रही बड़ी उपलब्धि

प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित स्थानीय शिक्षक दिनेश सिंह भाटी के शोधपरक प्रयासों से शाहपुरा तहसील के विभिन्न क्षेत्रों में रोहिड़ा के दुर्लभ वृक्षों की पहचान की गई है, जो जैव विविधता की दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है ।

आम तौर पर पश्चिमी राजस्थान (मारवाड़ और शेखावाटी) में बहुतायत से पाया जाने वाला रोहिड़ा (वैज्ञानिक नाम: टेकोमेला अण्डूलाटा) अब शाहपुरा के अरनियाघोड़ा, ईटमारिया, दौलतपुरा, प्रतापपुरा, ढीकोला, लूलांस, भोजपुर और कनेछन क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से लहलहा रहा है ।

पारिस्थितिकी तंत्र का भी मुख्य आधार है राज्य पुष्प रोहिड़ा

शिक्षक भाटी विगत 4-5 वर्षों से इन वृक्षों पर निरंतर निगरानी रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि 1983 में राज्य पुष्प घोषित रोहिड़ा ना केवल अपनी मजबूत लकड़ी के कारण 'रेगिस्तान का सागवान' कहलाता है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र का भी मुख्य आधार है ।

फाल्गुन से चैत्र ( फरवरी - अप्रैल ) के दौरान इस पर खिलने वाले फूल पक्षियों जैसे गौरैया, शक्करखोरा और बुलबुल के लिए भोजन व आश्रय का प्रमुख स्रोत हैं। दिनेश सिंह भाटी केवल खोज तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक विशेष अभियान पर भी कार्य कर रहे हैं ।

उनका लक्ष्य है कि प्रत्येक शिक्षण संस्थान में राष्ट्रीय और राज्य प्रतीकों बरगद, कमल, खेजड़ी और रोहिड़ा को अनिवार्य रूप से रोपा और संवर्धित किया जाए ।

आंखों को सुकून दे रही रोहिड़ा की केसरिया छटा

दिनेश सिंह भाटी ने कहा कि रोहिड़ा का प्रकीर्णन प्राकृतिक रूप से हवा के जरिए होता है । यदि हम मानसून के दौरान इसके बीजों का सही प्रबंधन करें, तो शाहपुरा क्षेत्र में भी इसकी सघनता बढ़ाई जा सकती है ।

हमारा लक्ष्य प्रकृति, पानी और पंछी का व्यापक संरक्षण है । नवसंवत्सर के इस अवसर पर शाहपुरा के ग्रामीण क्षेत्रों में बिखरी रोहिड़ा की केसरिया छटा न केवल आंखों को सुकून दे रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रसारित कर रही है।