भीलवाड़ा . कोठारी नदी को छलनी करने के बाद भी बजरी माफिया बेखौफ हैं। भदाली खेड़ा बाइपास के पास से निकल रही नदी में गुरुवार को भी बड़ी संख्या में ट्रैक्टर चालक व मजदूर बजरी भरते नजर आए। खास बात है कि ट्रैक्टर चालक का फोन हर समय चालू रहता है ताकि किसी के आने की सूचना मिलते ही वे वहां से निकल सकें। यह नजारा दूसरे दिन मौके पर देखने को मिला। जैसे ही पत्रिका फोटोग्राफर मौके पर पहुंचा तो सबके फोन बजने लगे। देखते ही देखते सभी मजदूर व ट्रैक्टर चालक वाहनों को लेकर भाग निकले।
पत्रिका टीम ने दूसरे दिन भी भदालीखेड़ा क्षेत्र में कोठारी नदी के हालात देखे तो सड़क पर पहले से ही मौजूद कुछ युवक सक्रिय हो गए। उनके फोन घनघनाने लगे। वाहन चालकों को सूचना देने में जुट गए। सूचना मिलने पर नदी में बजरी भर रहे एक दर्जन से अधिक ट्रैक्टर चालक भाग निकले। कईट्रैक्टर तो बजरी से आधे भरे थे तो कुछ ने मौके पर ही बजरी खाली कर दी।
बजरी खनन की सुप्रीम कोर्ट से स्वीकृति मिलने के बाद भी सरकार बजरी दोहन की स्वीकृति जारी नहीं कर रही है। यही कारण है कि भीलवाड़ा जिले में दो प्रमुख बनास व कोठारी नदी में बहने वाली बजरी को अवैध दोहन हो रहा है। इन दोनों नदियों से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टरों, डम्पर, ट्रक आदि लाखों टन बजरी से भरकर निकल रहे हैं। लेकिन विभाग केवल एक-दो ट्रैक्टर को पकड़कर प्रदेश भर में वाहवाही लूट रहा है।
जिला प्रशासन भी कर रहा अनदेखी
जिला प्रशासन ने अवैध खनन को रोकने के लिए कार्यबल बना रखा है। टीम में खनिज, राजस्व, पुलिस व वन विभाग के अधिकारी तक शामिल है। कार्रवाई केवल खनिज विभाग के अधिकारी भी कभी-कभार करते हैं। इधर खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे समय-समय पर अवैध खनन पर कार्रवाई करते हैं। इस कारण ही प्रदेश में भीलवाड़ा खनिज विभाग अव्वल रहा है।