
सरकार की जेब खाली फिर भी ऋण माफ, नहीं हो रही भरपाई- फिर 18 हजार करोड़ की ऋण माफी से आएंगी मुश्किलें
जसराज ओझा
भीलवाड़ा।
चुनाव में फायदा लेने के लिए सरकार ने अपनी झोली खाली होने के बावजूद ऋण माफी तो कर दी, लेकिन पुनर्भरण नहीं होने से सहकारी बैंकों की साख पर आंच आ गई है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के आठ हजार करोड़ के ऋ ण में से बैंकों को वापस केवल 2 हजार करोड़ का पुनर्भरण हो पाया है। शेष छह हजार करोड़ का बैंकों को इंतजार है। पुराने ऋ ण माफी का भुगतान नहीं होने से बैंक चिंतित हैं कि वर्तमान कांग्रेस सरकार की दो लाख के तक ऋ ण माफी की घोषणा से करीब 18 हजार करोड़ की राशि का पुनर्भरण कैसे होगा।
पूर्ववर्ती सरकार ने 30 सितंबर 2017 की स्थिति में ग्राम सेवा सहकारी समितियों से ऋण लेने वाले किसानों का 50-50 हजार रुपए तक का ऋण माफ कर दिया था। इससे सरकार पर करीब आठ हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ा। सरकार के खजाने में यह राशि उपलब्ध नहीं थी। इसके पुनर्भरण के लिए हर बजट में दो हजार करोड़ रुपए देने का प्रावधान रखा गया। सरकार ने आठ हजार करोड़ की ऋण माफी कर केंद्रीय सहकारी बैंकों (सीसीबी) को उस वक्त केवल दो हजार करोड़ रुपए ही चुकाए।
इधर, बैंकों पर किसानों को नया फसली ऋण देने का संकट आ गया। बैंकों के खजाने भी खाली हो गए। सरकार ने नया रास्ता निकालते हुए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से सभी सीसीबी को कुल 2200 करोड़ का ऋण दिलवाया है। इस पर 8.65 प्रतिशत की दर से ब्याज लगेगा। यह ब्याज सीसीबी की जगह सरकार ही देगी।
8.65 प्रतिशत की दर से ब्याज चुकाएगी राज्य सरकार
भीलवाड़ा में एक लाख 21 हजार किसानों का करीब 320 करोड़ रुपए का ऋण माफ किया गया। ऋण माफ होने के बाद किसान फिर फसली ऋण लेने पहुंच गए। सीसीबी के पास पैसा नहीं था। एेसे में करीब 157 करोड़ रुपए का ऋण राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से लिया गया। इसके लिए 8.65 प्रतिशत की दर से ब्याज चुकाना पड़ेगा। यह ब्याज राशि राज्य सरकार वहन करेगी। भीलवाड़ा सीसीबी की तरह प्रदेश के सभी बैंकों ने निगम से 2200 करोड़ का ऋण ले रखा है। इसके ब्याज का भार भी सरकार को वहन करना पड़ेगा। 31 मार्च 2019 को सभी बैंकों को सहकारी निगम को पहली किस्त चुकानी है। इस दिन तक सरकार ने सीसीबी को पैसा नहीं दिया, तो संकट आ जाएगा।
किसानों के साथ होगा कागजी खेल
सरकार के पास बजट नहीं है। जिन किसानों का फसली ऋण माफ हुआ, वे फिर से समिति में ऋण लेने जाएंगे। उनसे यही कहा जाएगा कि उनका पुराना ऋण माफ हो गया। नया ऋण आ गया है और फिलहाल खाते में ही जमा रहेगा। जब राशि उपलब्ध होगी तब नकद दे दिया जाएगा।
जरूरत 5000 करोड़ की, लिए 2200 करोड़
राज्य की पिछली भाजपा सरकार ने ऋण माफी की। इसके पुनर्भरण के इसके बाद सभी बैंकों के माध्यम से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से करीब पांच हजार करोड़ रुपए का ऋण लेने के अनुबंध हुए। इसमें से कुछ केंद्रीय सहकारी बैंकों के पास कुछ की राशि थी।
निकालेंगे रास्ता
प्रदेश में पहले आठ हजार करोड़ की ऋण माफी हुई थी। फिलहाल दो हजार करोड़ दिए गए। शेष के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम से ऋण लिया। पांच हजार करोड़ रुपए का ऋण लेना था, लेकिन 2200 करोड़ रुपए का ही लिया है। इसकी किस्त व ब्याज फिलहाल राज्य सरकार ही चुकाएगी। नई ऋण माफी के पुनर्भरण लिए भी कुछ रास्ता निकाला जाएगा।
विद्याधर गोदारा, प्रबंधक निदेशक, एपेक्स बैंक जयपुर
Published on:
25 Dec 2018 08:41 pm
