
The tears of the poison are lifespan in bhilwara
भीलवाड़ा।
कभी जीवनदायनी रही कोठारी नदी पूरी तरह से मैली हो चुकी है। नदी मे भीलवाड़ा डेयरी अपने यहां से निकलने वाले दूषित पानी को छोडऩे में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। डेयरी के अलावा शहर से निकलने वाले सीवरेज का पानी भी कोठारी नदी में जा रहा है। नगर परिषद के कर्मचारी शहर का कचरा, बायोमेडिल वेस्ट व मृत मवेशी नदी में डाल रहे हैं। इसे लेकर कुछ लोग नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एजीटी) में भी गए। इस पर एनजीटी ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से भी रिपोर्ट मांगी, लेकिन हालात में सुधार नजर नहीं आ रहा है।
शहर के निकट से निकल रही कोठारी नदी आगे जाकर बनास में मिल रही है। बनास का पानी भीलवाड़ा जिले के अलावा अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, जयपुर सहित अन्य शहरों को सप्लाई किया जा रहा है। शहर का लगभग ४५० लाख लीटर प्रतिदिन नदी में छोड़ा जा रहा है। हालांकि जिन्दल की ओर से एक एसटीपी लगा रखा है, लेकिन प्लांट में जरूरत के आधार पर चलाया जाता है। शेष पानी कोठारी नदी में जा रहा है।
कोठारी बन गई ट्रेचिंग
आरके-आरसी व्यास कॉलोनी से निकलने वाला कचरा कोठारी नदी में डाला जा रहा है। कृषि उपज मंडी में बाहर से आने वाले ट्रक चालक माल खाली होने के बाद कचरा कोठारी नदी व उसके किनारे डाल रहे हैं। कई बार कचरे को आग के हवाले कर दिया जाता है।
बायोमोडिल वेस्ट
कोठारी नदी के आस-पास के चिकित्सालयों का बायोमेडिकल वेस्ट भी डाला जा रहा है। प्लास्टिक की थैलियों के अलावा दवा की शीशियां बिखरी नजर आती है। इससे नदी का वातारवण दूषित हो रहा है।
एनजीटी को लेकर बनी कमेटी
कोठारी नदी में दूषित पानी व अन्य निर्माण का मामला एनजीटी में गया था। एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण मण्डल से रिपोर्ट मांगी थी। कलक्टर ने इसके लिए एक कमेटी गठित की, लेकिन दूषित पानी व कचरे पर रोक नहीं लगी।
जारी करेंगे नोटिस
कोठारी नदी में दूषित पानी छोडऩा, कचरा डालना, बायोमेडिकल वेस्ट डालना गंभीर है। इससे नदी दूषित हो रही है। इसके लिए सम्बन्धित विभाग को व चिकित्सालयों को नोटिस जारी किया जाएगा।
राजीव पारीक, क्षेत्रीय अधिकारी, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मण्डल
Published on:
27 Mar 2019 10:40 am
