
कार्यशाला में उठा मुद्दा जीएसटी स्टिम फैल, नहीं मिला रिफण्ड
भीलवाड़ा।
देश में एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद निर्यातकों के सामने कई समस्या है। ऑन लाइन सिस्टम पूरी तरह से फैल हो चुका है। रिटर्न समय पर दाखिल नहीं होने से आज देश में करीब तीन हजार करोड़ का रिफण्ड बकाया चल रहा है। यह बात कस्टम हाउस के विषय विशेषज्ञ एलएम शर्मा ने पत्रिका से बातचीत में कहीं।
शर्मा भीलवाड़ा में दो दिवसीय निर्यात प्रोत्साहन, प्रक्रिया एवं दस्तावेजीकरण कार्यशाला में मुख्य वक्ता थे। उन्होंने बताया कि अच्छे निर्यातकों की और से रिटर्न दाखिल करने के दस दिन के अन्दर इनपुट टैक्स रिफण्ड का प्रावधान है। अन्य निर्यातकों को दस्तावेज की जांच करने के 60 दिन में रिफण्ड का प्रावधान है, लेकिन देश में किसी भी निर्यातकों को रिफण्ड नहीं मिला है। भीलवाड़ा में भी निर्यातकों के करीब 50 करोड़ रुपए अटके पड़े है। जबकि सितम्बर का रिटर्न और बाकी हो जाएगा। जीएसटी में 18 प्रतिशत आईजीएसटी लगाने से भी निर्यातकों पर असर पड़ा है। डयूटी ड्रा बैक में भी रिफण्ड नहीं मिल रहा है। इसमें क्लेम करने के एक माह में रिफण्ड का प्रावधान है।
एमएसएमई पखवाडे के तहत प्रशासन, उद्योग केन्द्र एवं लघु उद्योग भारती की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला पुर रोड स्थित कांची रिसोस्र्ट में चल रही है। समापन सोमवार को होगा। निर्यात क्षेत्र में पहल करने वाले 35 युवा निर्यातक हिस्सा ले रहे है। इसमें निर्यात संबंधी समस्त एजेन्सियों, विभिन्न देशों में निर्यात की संभावना, आईई कोड संबंधी दस्तावेजीकरण विषय पर सुनील चतुर्वेदी ने भी जानकारी दी।
लद्यु उद्योग भारती के प्रान्तीय उपाध्यक्ष केके जिन्दल ने भीलवाड़ा में स्पेशन इकोनोमिक जोन (एसईजेड) स्थापना का सुझाव दिया। जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबन्धक राहुलदेव सिंह, जिला उद्योग अधिकारी मोहम्मद सिराज खान, उद्योग प्रसार अधिकारी आरपी नामा, सहायक प्रशासनिक अधिकारी एसके सेन, लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष संजीव चिरानिया, सचिव अनूप बागडोदिया, सुमित जागेटिया, गिरीश अग्रवाल, राम किशोर काबरा अजय मून्दडा आदि उपस्थित थे।
Published on:
01 Oct 2017 10:30 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
