
Truth of black water suppressed due to lack of lab in Bhilwara
भीलवाड़ा। जिले में औद्योगिक विकास के बढ़ते कदम के साथ गहराती काले पानी यानि जल प्रदूषण की समस्या से बनास व कोठारी नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों को निजात नहीं मिल सकी है। हालात यह है कि ग्यारह साल पूर्व राज्य सरकार द्वारा काले पानी की जांच के लिए मंजूर की गई लैब आजादनगर स्थित राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मण्डल कार्यालय परिसर मेंअभी तक स्थापित नहीं हो सकी। ऐसे में प्रोसेस हाऊस द्वारा काले पानी यानि रसायन युक्त पानी के नदियों में छोड़ जाने की शिकायतों के बाद मौके से लिए जा रहे पानी के नमूने की जांच भी प्रदेश के अन्य जिलों के भरोसे टिकी हुई है।
राज्य सरकार ने जिले में औद्योगिक इकाई एवं परम्परागत जल स्रोतों में प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए जिला मुख्यालय पर राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मण्डल विभाग स्थापित कर रखा है। राजसमंद जिले का अतिरिक्त कार्य भार भी विभाग को सौंप रखा था, लेकिन तीन माह पूर्व सरकार ने राजसमंद में ही प्रदूषण नियंत्रण मण्डल कार्यालय खोल दिया, इससे राजसमंद जिले का काम स्थानीय स्तर पर ही शुरू होने से भीलवाड़ा जिला कार्यालय का बोझा थोड़ा कम हुआ है।
कोरोना का संकट थमा, फिर उभरी शिकायतें
जिला प्रदेश में औद्योगिक विकास के मामले में प्रदेश के सात प्रमुख जिलों में शुमार है। यहां लघु व मध्यम समेत बीस हजार से अधिक औद्योगिक इकाईयां स्थापित है, जहां जल व वायु प्रदूषण को लेकर अलग-अलग शिकायतें रहती है। खास कर प्रोसेस हाउसों की ओर से काला पानी छोड़े जाने की शिकायतेें सर्वाधिक है। कोरोना संकट काल में अधिकांश औद्योगिक इकाईयों में उत्पादन कार्य नाम मात्र का होने से शिकायतें भी कम हो गई थी, लेकिन जिले के कोरोना संकट से उभरने, बंद इकाईयों के चालू होने एवं श्रमिकों की वापसी से फिर औद्योगिक विकास का चक्र घूमने लगा है।
काले पानी का कहर
बारिश होते ही गुवारडी नाला, बनास व कोठारी नदी में काले पानी छोड़ जाने और इस काले पानी से फसलें चौपट होने व खेतीहर भूमि के बंजर होने की शिकायतें भी उठने लगती है। चिमनी से जुड़ी इकाइयों से वायु प्रदूषण होने को लेकर भी ग्रामीणों के शिकवे शिकायतें है। जबकि मेडिकल बायोवेस्ट को लेकर क्षेत्र के लोग विरोध प्रशासन के समक्ष विरोध दर्ज कराते रहे है।
यह गांव काले पानी से प्रभावित
काले पानी से बनास नदी क्षेत्र में बसे गुवारड़ी, मंडपिया, सालरिया, चोहिला का खेड़ा, दाता जीती, मंगरोप, फागणो का खेड़ा, कुमारिया, पातलियास, भग्गा का खेड़ा, हुड़ा का खेड़ा, खाती खेड़ा, पीपली, कुलदिया, महेशपुरा गांव सर्वाधिक रूप से काले पानी से प्रभावित है।
ग्रामीणों ने दिखाया काला पानी, बताई अपनी पीड़ा
मंगरोप की भगवती कीर नदी में काले पानी आने से तट क्षेत्र में सब्जियां नहीं हो रही है, खेतों में स्थित कई कुओं का पानी खराब हो रहा है, छोटे तालाबों का पानी भी प्रदूषित हो रहा है, इससे फसलें भी जल रही है। इसी प्रकार प्रेमसुख सोलंकी ने काले पानी से भरी बोतलें बताते हुए कहाकि ग्रामीण विभाग को शिकायत करता है, विभाग सेम्पल लेता है, लेकिन रिपोर्ट ही समय पर नहीं आती है, ऐसे में कार्रवाई भी नहीं हो पाती है। पाटनिया के नारायण गुर्जर का कहना है कि काले पानी को रोकने के लिए विभाग को सख्ती करनी चाहिए, इसके लिए जरूरी है पानी के नमूने लिए जाए और इकाईयों के मालिकों पर कड़ी कार्रवाई हो। मंगरोप की तारा देवी भी कहती है कि काला पानी नदी किनारे स्थित खेतों व परम्परागत जलस्रोतों को प्रदूषित कर रहा है।
ग्यारह वर्ष से लैब का इंतजार
राज्य सरकार ने जिले में प्रदूषण के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए विभाग को सावचेत कर रखा है, लेकिन साधन एवं सुविधा के अभाव में विभाग असहाय है। हालांकि सरकार ने आजादनगर स्थित मण्डल कार्यालय में ही अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित करने की मंजूरी दिसम्बर २०१० में दे रखी है। इस लैब के लिए स्वीकृत वरिष्ठ वैज्ञानिक व कनिष्ठ वैज्ञानिक के पद सृजत है, लेकिन स्वीकृत पद के अनुपात में अधिकांश पद खाली है।
कोटा, उदयपुर की लैब में अटक रही जांच
प्रदेश में जयपुर, जोधपुर, अलवर, कोटा व उदयपुर में संभागीय प्रदूषण जांच प्रयोगशाला है। इनमें से जयपुर, उदयपुर व कोटा प्रयोगशाला में भीलवाड़ा जिले की औद्योगिक इकाईयों से जल व वायु के नमूने जांच के लिए भिजवाए जाते है। लेकिन इन नमूनों की जांच रिपोर्ट समय पर नहीं होने से लापरवाह इकाईयों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है और नाही सुधार के हालात बन पाते है। Truth of black water suppressed due to lack of lab in Bhilwara
लैब जल्द करेंगे स्थापित
मण्डल कार्यालय के प्रथम मंजिल पर लैब प्रस्तावित है, निर्माण कार्य की मंजूरी मिल गई है। फिलहाल वायु व ध्वनि प्रदूषण की जांच प्रायोगिक रूप पर शुरू की है, शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति से शहरी बाशिंदों को बताने के लिए डिस्पले केन्द्र भी स्थापित किए जा रहे है। जबकि जल के नमूने प्रदेश की प्रमुख प्रयोगशालाओं को भिजवाया जा रहा ।
महावीर मेहता , क्षेत्रिय अधिकारी, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, भीलवाड़ा
Published on:
08 Oct 2021 12:29 pm
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