
mp education department: प्रशासनिक और डीडीओ पॉवर के बीच खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) के प्रभार को लेकर शिक्षा विभाग में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वरिष्ठ अधिकारी बीईओ का प्रभार लेने के लिए तैयार नहीं हैं, जिसके चलते प्रशासन को नियम-कायदों को दरकिनार कर कनिष्ठ अधिकारियों को प्रभार सौंपना पड़ा है। यह स्थिति केवल एक स्थान पर नहीं, बल्कि तीन विकासखंडों—गोहद, लहार और मेहगांव—में देखने को मिली है।
भिंड के गोहद में श्यामकिशोर भारद्वाज को खंड शिक्षा अधिकारी का प्रभार दिए जाने को लेकर पहले ही सवाल उठ चुके हैं। शीतकालीन सत्र में गोहद विधायक केशव देसाई ने इस संबंध में विधानसभा में प्रश्न पूछा था। तब सरकार ने जवाब दिया था कि भारद्वाज को केवल प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं, जबकि डीडीओ पॉवर पुराने अधिकारी के पास हैं।
हालांकि, 24 मार्च को बजट सत्र में जब दोबारा यही सवाल उठाया गया तो स्कूल शिक्षा मंत्री उदयप्रताप सिंह ने स्वीकार किया कि कलेक्टर के आदेश (7 अक्टूबर 2024) के तहत भारद्वाज को प्रशासनिक और वित्तीय दोनों प्रकार का प्रभार सौंपा गया है। मंत्री ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों ने बीईओ का प्रभार लेने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते कनिष्ठ को यह जिम्मेदारी देनी पड़ी।
गोहद में बीईओ पद की जिम्मेदारी संभालने से इनकार करने वाले वरिष्ठ अधिकारियों में शामिल हैं:
बड़ामलहरा विधायक सुश्री रामश्री ने भी 24 मार्च को विधानसभा में लहार और मेहगांव में बीईओ का प्रभार उच्च माध्यमिक शिक्षक को सौंपे जाने पर सवाल उठाया। नियमानुसार, बीईओ को डीडीओ पॉवर नहीं दिया जा सकता, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जिम्मेदारी न लेने की वजह से यहां भी कनिष्ठों को प्रभार देना पड़ा।
लहार में प्रभार न लेने वाले वरिष्ठ अधिकारी:
इस स्थिति में कनिष्ठ प्रेम सिंह बघेल को लहार में बीईओ का प्रभार देना पड़ा।
मेहगांव में असहमति जताने वाले वरिष्ठ अधिकारी:
जब इस मामले पर एक वरिष्ठ लोक सेवक से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि उनसे कभी बीईओ का प्रभार लेने के लिए नहीं कहा गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब विभाग के आदेश से वे सीएस (क्लस्टर समन्वयक) और प्राचार्य बन सकते हैं, तो बीईओ पद पर उनकी नियुक्ति भी आदेशानुसार होनी चाहिए थी।
मेहगांव के एक अन्य वरिष्ठ लोक सेवक ने भी दावा किया कि उनसे बीईओ का प्रभार लेने के लिए नहीं कहा गया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि वे इस पद के लिए पात्र नहीं हैं, तो उन्हें जिम्मेदारी लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
गोहद विधायक केशव देसाई ने इस मामले को गंभीर बताया और कहा,
'कोई लोक सेवक प्रभार लेने से मना कैसे कर सकता है? ऐसे तो वह पढ़ाने भी नहीं आएगा, प्राचार्य और परीक्षा का प्रभार भी लेने से इनकार कर सकता है। शासन ने हमारे प्रश्न का गोलमोल उत्तर दिया है। हम इस गलत परंपरा को रोकने का प्रयास करेंगे और अगले सत्र में फिर से इस मामले को उठाएंगे।'
संयुक्त संचालक, शिक्षा डीके पांडेय ने कहा 'कोई प्रभार लेने से इनकार तो नहीं कर सकता, लेकिन परिस्थितियों को देखकर निर्णय लिया जाता है। शासन और विभाग के आदेश का पालन करना आवश्यक होता है। भिण्ड में वरिष्ठों ने क्यों इनकार किया, इसकी जांच करवाई जाएगी।'
Published on:
26 Mar 2025 08:40 am
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