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अब सुप्रीम कोर्ट में होगा हरियाणा में अनियमित तौर पर सरकारी विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों के भविष्य का फैसला

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला बृहस्पतिवार को आनन-फानन में हुई बैठक में लिया है...
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भिवानी

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Prateek Saini

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Updated: 17 Aug 2018, 8:38 PM IST

संजीव शर्मा की रिपोर्ट...

(चंडीगढ़): हरियाणा की पूर्व हुड्डा सरकार की नियमितीकरण नीति का दंश झेल रहे हजारों कर्मचारियों के भविष्य का फैसला अब सुप्रीम कोर्ट में होगा। प्रदेश सरकार ने इस मामले में जहां हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर ली है वहीं सरकार ने विधानसभा में बिल लाकर कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने की संभावनाओं को भी अभी पूरी तरह से खारिज नहीं किया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला बृहस्पतिवार को आनन-फानन में हुई बैठक में लिया है। इस बैठक में विपक्ष व कर्मचारी संगठनों ने भी अपनी सहमति दी है।

क्या है पूरा विवाद

बीती 31 मई को हाईकोर्ट ने वर्ष 2014 में अधिसूचित रेगुलाईजेशन की सभी नीतियों को रद्द करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने 6 माह में सभी रिक्त पदों को नियमित भर्ती से भरने और इन पदों पर कार्यरत सभी अनियमित कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करने के भी आदेश दिए थे। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों ने संघर्ष शुरू कर दिया और सरकार इस मुद्दे पर बीच का रास्ता निकालने में जुटी हुई है। इस विवाद को सुलझाने के लिए कर्मचारी संगठनों की मुख्यमंत्री मनोहर लाल तथा उनके प्रधान सचिव राजेश खुल्लर के साथ कई बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन किसी का भी कोई परिणाम सामने नहीं आया है।


दो दिन में लिए दो फैसले

इस उठापटक के बीच हरियाणा के मुख्य सचिव ने बीती 27 जुलाई को एक पत्र जारी करके कर्मचारियों की चाईल्ड केयर लीव, शिशु शिक्षा भत्ता, वार्षिक वेतन बढोतरी, प्रमोशन, एलटीसी व लोन देने पर रोक लगा दी। यह पत्र सार्वजनिक होते ही कर्मचारी संगठनों ने जहां सरकार को घेर लिया और विपक्ष भी इस मुद्दे पर आक्रामक हो गया। नए विवाद के बाद कर्मचारियों द्वारा जहां बैठकों का दौर शुरू कर दिया गया वहीं दो दिन बाद सरकार इस मुद्दे पर बैकफुट पर आ गई और आदेश वापस ले लिए।


अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका के साथ विधानसभा के विकल्प भी खुले

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को इन कर्मचारियों के मुद्दे पर छह माह के भीतर ठोस फैसला करने के निर्देश दिए थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद विधानसभा का सत्र कुछ दिन के लिए टल गया है। माना जा रहा है विधानसभा का मानसून सत्र अब सात सितंबर से होगा। जिसके चलते सरकार ने इस मामले में पहलकदमी करते हुए महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन की अध्यक्षता में पूर्व महाधिवक्ता हवा सिंह हुड्डा, इनेलो के प्रतिनिधि नरेश सिंह सेखावत, अतिरिक्त महाधिवक्ता लोकेश सिंगल और भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधि परविंद्र चौहान की मौजूदगी में कर्मचारी नियमितिकरण मामला पर बैठक हुई। जिसमें योगेश त्यागी और अन्य बनाम हरियाणा राज्य सीडब्ल्यूपी संख्या 17208/2014 में कर्मचारी नियमितिकरण के फैसले के विरूद्घ सर्वसम्मति से सर्वोच्च न्यायालय में सरकार द्वारा और भारतीय मजदूर कर्मचारी संघ द्वारा (एसएलपी) अपील दायर करने का निर्णय लिया है। हरियाणा सरकार के इस फैसले के बाद अब कर्मचारियों के भविष्य के मुद्दे पर कोई भी फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिया जाएगा