
21 जुलाई को संसद में मुद्दा उठेगा। Patrika
MP News- मध्यप्रदेश के लाखों कर्मचारियों के करोड़ों रुपए अटके पड़े हैं। कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी उन्हें यह राशि नहीं दी जा रही है। प्रदेश के आउटसोर्स और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के साथ यह नाइंसाफी की जा रही है। सन 2024 में उनके वेतन बढ़ाने के आदेश जारी किए गए थे। इसपर अमल करते हुए वेतन में तो बढ़ोत्तरी की गई लेकिन 11 माह के एरियर की राशि नहीं दी गई। लेबर कोर्ट के आदेश के बाद भी ज्यादातर कर्मचारियों को एरियर नहीं मिल सका है।
एमपी में आउटसोर्स और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का कोर्ट के आदेश के बाद वेतन बढ़ाया गया था। कोर्ट के फैसले पर अमल करते हुए श्रमायुक्त ने सभी कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन देने के साथ 11 महीने का एरियर भी देने का निर्देश जारी किया था। फैक्ट्री मालिकों और ठेकेदारों ने कर्मचारियों का वेतन तो बढ़ा दिया लेकिन नहीं दिया।
कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों के अनुसार करीब 95 प्रतिशत कर्मचारियों को अभी तक एरियर नहीं दिया गया है।
करीब 2.75 लाख कर्मचारियों के 350 करोड़ रुपए अटके हैं।श्रमायुक्त से लेकर विभागीय अधिकारियों तक इसकी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। बिजली कंपनियों और स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को एरियर का इंतजार है।
एमपी की श्रमायुक्त रजनी सिंह ने इस संबंध में उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि सभी नियोक्ताओं को नवंबर 2024 में ही कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन और एरियर देने का आदेश दे दिया गया था। श्रमायुक्त कार्यालय में भी कुछ शिकायतें आई थीं जिनका निराकरण कर दिया गया था।
श्रमायुक्त रजनी सिंह ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को एरियर का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित करेंगे। यदि नियोक्ता आउटसोर्स कर्मचारियों को एरियर का भुगतान नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
16 Jul 2025 08:13 pm
Published on:
16 Jul 2025 08:12 pm
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