28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Navratri 2024 : एमपी में यहां गिरे थे माता सती के अंग, नवरात्र में करें इन शक्तिपीठों के दर्शन

Navratri 2024 : मध्य प्रदेश में मां शक्ति के ऐसे चमत्कारी और प्राचीन मंदिर भी है जहां दर्शन करने मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

4 min read
Google source verification

भोपाल

image

Akash Dewani

Oct 02, 2024

Navratri 2024

Navratri 2024 : माता शक्ति के आगमन में अब कुछ ही घंटे बाकी है। उनके आगमन से पूरे देश में भव्य और सुंदर पंडाल बनाए जा रहे है। मध्य प्रदेश में भी कई जगह ऐसे पंडाल बनाए जा रहे है जहां दूर-दूर से लोग माता के दर्शन करने के लिए आते है। हालांकि, मध्य प्रदेश में मां शक्ति के ऐसे चमत्कारी और प्राचीन मंदिर भी है जहां दर्शन करने मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है।

प्रदेश में देवी शक्ति को समर्पित चार ऐसे मंदिर है जहां उनके शरीर के अंग और आभूषण कटकर गिरे थे। इन मंदिरों को शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा रहता है। चलिए आपको बताते है कौन से है यह मंदिर और क्या है इनकी खासियत।

यह भी पढ़े - Navratri 2024: इस नवरात्रि बिलाईमाता के सिर सजेगा सोने का मुकुट, जानें 250 साल पुराने मंदिर का इतिहास…

क्या है शक्तिपीठ की पौराणिक कथा

मध्य प्रदेश में स्थित 4 शक्तिपीठ के बारे में जानने से पहले शक्तिपीठ क्या होते है उनके बारे में जानना आवश्यक है। इसके पीछे एक बहुत ही रोचक कथा है जो कि शिव महापुराण में वर्णिंत है। कथा के अनुसार, माता सती के पिता दक्ष ने एक बार अपने निवास में महायज्ञ का आयोजन करवाया जिसमे उन्होंने भगवान शिव को छोड़कर सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनियों को आमंत्रित किया था। माता सती अपने पति को न बुलाए जाने नाराज हो गई।

उन्होंने अपने पिता से पुछा की उन्होंने उनके पति को क्यों आमंत्रित नहीं किया? जिसके जवाब में दक्ष ने शिव को अपशब्द कहे। माता सती अपने पति का यह अपमान सह न पाई और यज्ञ कुंड में अग्नि स्नान कर अपने प्राण त्याग दिए। उनके शरीर को भगवान शिव क्रोध में आकर समस्त ब्रह्मांड में लेकर घूमते रहे। भगवान शिव को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के 51 या 108 टुकड़े कर दिए जो भारत समेत आस- पास के देशों जा गिरे। जहां-जहां माता सती के अंग और आभूषण गिरे वहां मंदिर बन गए जिन्हे शक्तिपीठ कहा गया।

यह भी पढ़े - Navratri 2024: महालक्ष्मी रूप में हाथी पर सवार आ रही मां दुर्गा, यहां अद्भुत स्वरूपों में देंगी दर्शन

हरसिद्धि शक्तिपीठ - उज्जैन

माता शक्ति को समर्पित यह मंदिर करीब 2000 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है। यह मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में स्तिथ है और बाबा महाकाल के मंदिर के पास है। यहां माता की दाहिने हाथ की कोहनी कटकर गिरी थी। यहां नवरात्र के पहले दिन मंदिर के पुजारियों द्वारा घट स्थापना की जाती है। 9 दिन तक पूजन अर्चन चलता है। 9वें दिन माता के लिए विशेष पूजन हवन किया जाता है। हरसिद्धि माता परमारवंश की कुल देवी है जो की वैष्णव देवी भी है। यहां बलि प्रथा नहीं मनाई जाती है। उज्जैन वासियों का ऐसा भी मानना है कि यह मंदिर स्वयं भगवान विष्णु ने बनवाया था और यह राजा विक्रमादित्य की तपोभूमि भी है।

यह भी पढ़े - Navratri 2024 : माता को घर लाने से पहले जान ले उनके 16 श्रृंगार

मैहर शक्तिपीठ - मैहर

मध्य प्रदेश के नए जिलों में से एक मैहर में भी एक शक्तिपीठ मौजूद है जो त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। इसे ज्यादातर लोग मैहर माता मंदिर के नाम से जानते है लेकिन इसका असल नाम मैहर शक्तिपीठ और शारदा माता मंदिर है। यहां मां शारदा भक्तों को आशीर्वाद देती है। भगवत पुराण के अनुसार, यहां माता सती के गले का हार गिरा था जिसकी वजह से इस पूरे क्षेत्र का नाम मैहर पड़ गया। मैहर का अर्थ होता है माता का हार। तक पहुंचने के लिए भक्तों को 1001 सीढ़ियों को चढ़ना होता है। मान्यता है कि आल्हा ने यहां 12 वर्ष तपस्या की थी और आल्हा ऊदल भाइयों ने ही इस मंदिर की खोज की थी। नवरात्रि के दौरान इस मंदिर के पास मेले का भी आयोजन होता है जहां लाखों श्रद्धालु देश के हर एक कोने से मेले का लुफ्त उठाने के लिए आते है।

यह भी पढ़े - Navratri 2024: महंगी हो गई पूजा और व्रत की थाली, मेवों से लेकर फल तक के दाम बढ़े

भैरव पर्वत शक्ति पीठ - उज्जैन

उज्जैन में एक और शक्तिपीठ मौजूद है जिसका नाम भैरव पर्वत शक्तिपीठ है। यह मंदिर क्षिप्रा नदी के किनारे भैरव पहाड़ियों में बसा हुआ है। इसे अवंती शक्तिपीठ या गढ़कालिका मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां माता सती के ऊपरी होंठ गिरे थे। मान्यता के अनुसार, यह मंदिर सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों से एक महाकवि कालिदास की आराध्य देवी भी कहा जाता है। यहां माता सती को मां कालिका माता के नाम से पूजा जाता है। मां कालिका तांत्रिकों की देवी भी मानी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह मां काली का सबसे रौद्र और खतरनाक रूप माना जाता है। यहां पर भी हर नवरात्रि के दौरान 9 दिवसीय आयोजन किया जाता है।

संबंधित खबरें

यह भी पढ़े - Navratri Colour: नवरात्रि पूजा में नौ दिन पहनें इन रंगों के कपड़े, मां दुर्गा सुन लेंगी हर प्रार्थना

शोंदेश शक्ति पीठ - अमरकंटक

नर्मदा नदी की उद्गम स्थल अमरकंटक यह भी पढ़े - Navratri 2024: इस नवरात्रि बिलाईमाता के सिर सजेगा सोने का मुकुट, जानें 250 साल पुराने मंदिर का इतिहास…में स्थित है चौथा शक्तिपीठ जिसका नाम है शोंदेश या सोनाक्षी शक्ति पीठ है। यहां माता सती नर्मदा माता या सोनाक्षी माता के नाम से पूजा जाता हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए 100 सीढ़ियों से चढ़कर जाना पड़ता है। यह मंदिर करीब 6000 साल पुराना बताया जाता है जहां माता सती का दाहिना नितंभ गिरा था। मान्यता है कि, जो भी व्यक्ति यहां आकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करता है उसे स्वर्ग प्राप्त होता है। नवरात्रि के दौरान यहां भव्य आयोजन किया जाता जिसमें श्रद्धालु नर्मदा नदी में स्नान करने के बाद माता दर्शन के दर्शन करते है।