केन्द्र सरकार की इस बड़ी कंपनी के आधे से ज्यादा Employees छोड़ने वाले हैं नौकरी, जानिए वजह

सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL पर संकट, एक साथ 50 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों की हुई छुट्टी

By: Faiz

Updated: 22 Jan 2020, 12:33 PM IST

भोपाल/ भारत की सरकारी दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) में सेवा देने वाले 79 हजार कर्मचारी इस महीने के अंत तक अपने दायित्वों को अलविदा कहने जा रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि, ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब इतनी बड़ी संख्या में इम्प्लॉयज एक साथ देशभर में बीएसएनएल से 'वीआरएस' ले रहे हैं। इसी कवायद के चलते मध्य प्रदेश के 3300 अधिकारी-कर्मचारी भी काम से परमनेंट छुट्टी लेकर अपने घर बैठ जाएंगे। सूत्रों की माने तो, इसे सरकारी खर्च कम करने की कवायद बताया जा रहा है।

 

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सेवाएं हो सकती हैं ठप

बता दें कि, एक साथ बीएसएनएल से देशभर में पचाय फीसदी से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारियों की अपनी पोस्ट छोड़ने से संचार सेवाएं ठप होने की भी ज्यादा आशंका है। वहीं, केन्द्र सरकार के पास फिलहाल इसकी कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं दिखाई दे रही है। हालांकि, इस अभाव के कारण मैदान में बचे आधे से भी कम इम्प्लॉयज पर कई लोगों का काम सौंपा जाने लगा है। इधर, बीएसएनएल जिसकी सेवाओं पर किसी जमाने में लोगों को सबसे अधिक भरोसा था, आज उसी बीएसएनएल के ग्राहकों की शिकायतों की लिस्ट लगातार लंबी होती जा रही है।

 

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31 जनवरी को इन इम्प्लॉयज का कंपनी में आखरी दिन

बदले में कर्मचारियों को सभी देयकों का भुगतान करने सरकार ने एकमुश्त 18 हजार करोड़ रुपए मंजूर भी कर दिये हैं। वहीं, के देशभर में 79 हजार अधिकारी-कर्मचारी 31 जनवरी 2020 को एक साथ बीएसएनएल की नौकरी छोड़ने वाले हैं। इसी तर्ज पर मध्य प्रदेश में सभी जिलों से कुल 3300 अधिकारी-कर्मचारी वीआरएस लेकर कंपनी की सेवाओं से मुक्त हो जाएंगे।

 

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बचे स्टाफ पर गिरी गिरेगी गाज

हालांकि, ये बात समझना जरूरी है कि, कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी स्वेच्छा से वीआरएस लेता है, इसके पीछे उसका अपना ही पर्सनल कारण हो सकता है। वीआरएस नौकरी काल पूरा होने से पहले नौकरी छोड़ने पर मिलता है, जो पेंशन से काफी कम होता है। साथ ही, इसके बाद कर्मचारी या अधिकारी को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेशन भी नहीं मिलती। वहीं, सरकार की ओर से ये तर्क दिया गया है कि, 50 से ऊपर की उम्र वाले स्टाफ पर वेतन का खर्च सबसे ज्यादा है, इसलिए इस कदम को उठाया जा रहा है। ताकि, कंपनी को होने वाले घाटे व खर्च कम हों। अब ऐसी स्थिति में प्रदेश के सभी जिलों में बैठा स्टाफ बड़ी संख्या में नौकरी छोड़ देगा, जिसका खामियाजा बचे हुए स्टॉफ को भुगतना होगा। कई जिलों से तो ऐसी जानकारी भी सामने आई है कि, कंपनी में बचे एक-एक अधिकारी कर्मचारी को पांच-पांच लोगों के कार्यों की जिम्मेदारी दी जा रही है।

 

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20 साल का बीएसएनएल

आपको बता दें कि, देश में बीएसएनएल का गठन 1 अक्टूबर 2000 को हुआ था, जबकि इसके द्वारा दी जा रही दूरसंचार सेवाएं पिछली सदी से चल रही हैं। मध्य प्रदेश में फिलहाल, बीएसएनएल के 11 लाख ग्राहक हैं। इनमें छह लाख मोबाइल धारक हैं, साढ़े तीन लाख लैंडलाइन ग्राहक है, 1.4 लाख ब्रॉडबैंड और 50 हजार फाइबर टू द होम (एफटीटीएच) कनेक्शन हैं। जिनकी सेवाओं पर इन इम्प्लॉयज के नौकरी छोड़ने का असर पड़ सकता है।

 

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ये है स्टाफ की छुट्टी का कारण

मध्य प्रदेश बीएसएनएल के मुख्य महाप्रबंधक महेश शुक्ला ने बताया कि, राज्य से बीएसएनएल को सालाना करीब 660 करोड़ रुपए आमदनी होती है, जबकि इम्प्लॉय सैलरी समेत अन्य खर्च 750 करोड़ रुपए से ज्यादा हैं। प्रदेश स्तर पर ही देंखें तो, ये घाटा साल दर साल बढ़कर हो रहा है। प्रदेशभर में सिर्फ वेतन में ही हर महीने 50 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। एक बार वीआरएस देने के बाद यही खर्च घटकर 23 करोड़ रुपए रह जाएगा। बची हुई राशि का इस्तेमाल रखरखाव और विकास कार्यों में होगा। उन्होंने बताया कि, इस महीने 3300 कर्मचारी वीआरएस की वजह से कम हो जाएंगे। इससे दूरसंचार सेवाएं प्रभावित न हों, इसके लिए हम व्यवस्था की जा रही है।

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