
dr kalam memorial lecture
भोपाल। दुनियाभर में मिसाइल मैन के नाम से पहचान बनाने वाले डा. अवुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम ( Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam ) भारत के 11वें राष्ट्रपति थे। 27 जुलाई को उनकी पुण्य तिथि है, आज देश उन्हें याद कर रहा है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनकी पुण्य तिथि पर उन्हें याद किया है। वे 8 बार भोपाल आ चुके हैं। पत्रिका.काम आपको बताने जा रहा है उनसे जुड़े दिलचस्प किस्से...।
आज भी प्रेरणा देती है यह शपथ :-:
12 दिसंबर 2012 को भोपाल के समन्वय भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम ने युवाओं को शपथ दिलाई थी। यह शपथ आज भी लोग याद करते हैं। बच्चों ने कलाम के शब्दों को दोहराते हुए यह शपथ ली थी। आज भी यह प्रेरणा देती है।
यह है वो शपथ :-:
'देश के युवा होने के नाते हम सफलता पाने के लिए पूरे साहस से काम करेंगे और दूसरों की सफलता से खुश होंगे, अखंड होंगे, परिवार के अच्छे सदस्य बनेंगे और अपनी मां को खुश करेंगे। तिरंगा मेरे मन में लहराएगा और मैं अपने मन में अपने देश का सम्मान बरकरार रखूंगा। मैं समय की कीमत समझूंगा।'
उमा भारती की अंग्रेजी के हो गए थे मुरीद :-:
डॉ. कलाम उस समय उमा भारती के अंग्रेजी के ज्ञान के मुरीद हो गए थे, जब वे राष्ट्रपति के रूप में सन 2004 में भोपाल आए थे। वे यहां इंटखेड़ी के एक सरकारी स्कूल में पहुंचे तो उन्हें हिन्दी नहीं आती थी और वे अंग्रेजी में भी भाषण दे रहे थे। उमा भारती ने भी माइक उठाया और उनके शब्दों का अनुवाद करने लगी। इससे कलाम बहुत खुश हुए और भारती की मंच से ही तारीफ करते हुए कहा कि इतने अच्छे तरीके से ट्रांसलेट कोई अनुवादक भी नहीं कर सकता था।
सत्य खोजने वाले पत्रकार बनाओ :-:
12 दिसंबर 2012 की बात है जब कलाम साहब विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में शामिल होने भोपाल आए थे। उस वक्त यहां पतंजलि और पाणिनी पर शोध कार्य चल रहा था। डा. कलाम को रिसर्च के बारे में पता लगा, तो उन्होंने पाणिनी के बारे इतनी जानकारी दी कि शोध कार्य और बेहतर हो गया। पत्रिकारिता विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति से वे एक बात कह गए थे। उन्होंने कहा था कि ऐसे पत्रकार तैयार करो जो सत्य की खोज करें और उस सत्य को प्रकाशित करें जो जनहित में हो।
कम्प्यूटर पर हिन्दी में काम करने की दी प्रेरणा :-:
डॉ. कलाम 2012 में प्रशासन अकादमी में आयोजित हुए लैंग्वेज कम्प्यूटिंग कार्यशाला में शामिल होने आए थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बच्चों से कहा था कि कम्प्यूटर के जरिए असीम ज्ञान पाया जा सकता है। इसमें भाषा कभी भी आड़े नहीं आएगी। यह पहला मौका था जब उन्होंने शासकीय स्कूल के बच्चों को हिन्दी में कम्प्यूटर के इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया। ताकि बच्चे न केवल तकनीक से जुड़े बल्कि अपनी भाषा से भी जुड़ाव महसूस करें।
मैं तुमसे प्यार करता हूं :-:
इसके पहले वे साल 2002 में भी भोपाल आ चुके थे। इस दौरान उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी का शिकार हुए परिवार के लोगों से मुलाकात की थी। गैस पीडि़तों के लिए की गई शासकीय मदद, स्वयं सेवी संगठनों से मुलाकात और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं का जायजा भी लिया था। यह वही दौर था जब एक बार फिर गैस त्रासदी के जिम्मेदारों को सजा मिलने की आज बंधनी शुरू हुई थी। यहां बच्चों से बोले थे कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं।
ऐसा था कलाम का सफर :-:
15 अक्टूबर 1931 को रामेश्वर में जन्मे डॉ. कलाम ने मद्रास प्रौद्योगिकी संस्थान से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में योग्यता हासिल की। भारत के मिसाइल मैन के रूप में विख्यात डॉ. कलाम अग्नि और पृथ्वी मिसाइल के सफल निर्माण एवं परिचालन के लिए प्रसिद्ध रहे। देश में पहले सेटेलाइट प्रक्षेपण यान के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
मप्र दौरे पर कलाम
Updated on:
27 Jul 2020 11:46 am
Published on:
27 Jul 2020 11:36 am
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