
निंदा करना मनुष्य का सबसे बड़ा अवगुण
देश के विख्यात श्रीमदभगवत कथावाचक आचार्य अनिरुद्धाचार्य इन दिनों भोपाल में हैं। वे केंद्रीय जेल में कैदियों को श्रीमदभगवत कथा सुना रहे हैं। आचार्य अनिरुद्धाचार्य ने कैदियों और यहां उपस्थित अन्य लोगों को क्रोध पर नियंत्रण पाने के उपाय बताए। अनिरुद्धाचार्य ने यह भी कहा कि निंदा करना मनुष्य का सबसे बड़ा अवगुण है, इससे हर हाल में बचें।
भोपाल केंद्रीय जेल में चल रही श्रीमदभगवत कथा में कथा वाचक पंडित अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि राजा परीक्षित को आचार्य सुखदेव ने मनुष्य के जीवन को सात दिवस का बताया। अनिरुद्धाचार्य ने इन सात दिवस के सारांश का महत्व बताते हुए कहा कि यह जीवन पानी के बुलबुले के समान होता है जिसे सतकर्मों में लगाना चाहिए।
उन्होंने निन्दा करने को मनुष्य का सबसे बड़ा अवगुण बताया। आचार्य ने बताया कि मनुष्य को जीवन में परोपकारी एवं पुण्य के काम करने चाहिए। इसके लिए एक गीत भी सुनाया। आचार्य अनिरुद्धाचार्य ने गाया— मान मेरा कहना नहीं तो एक दिन पछताएगा, मिट्टी का खिलौना मिट्टी में मिल जाएगा जिसे सुनकर सभी बंदी एवं उपस्थित लोग आनंद विभोर हो गए।
आचार्य अनिरुद्धाचार्य ने जिंदगी में सुख प्राप्त करने और कभी किसी बात का दुख महसूस नहीं होने देने के लिए कुछ अहम टिप्स दिए—
1. अपना दिमाग परिवार एवं संसार के सभी कमों में लगाना चाहिए जबकि दिल सिर्फ भगवान से लगाने पर ही जीवन में सच्चे आनन्द की प्राप्ति होती है।
2. मनुष्य को संतोषी प्रवृत्ति वाला होना चाहिए, कहा भी कहा गया— संतोषी सदा सुखी।
3. जीवन के चारों आश्रमों ब्रहमचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ एवं संन्यास में किए जाने वाले कार्यों पर नियमपूर्वक अमल करें। इससे जीवन सुखमय तरीके से व्यतीत किया जा सकेगा।
4. केवल खुद के लिए नहीं बल्कि औरों के लिए भी जिएं। परोपकार करने से न केवल आपकी आत्मा सुखी होती है बल्कि इससे पुण्य भी मिलता है।
5. किसी भी हाल में क्रोध न करें, दुनिया में अधिकांश अनर्थ गुस्से के कारण ही होते हैं जिससे आखिरकार दुख ही मिलता है।
Published on:
02 Mar 2024 01:50 pm
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