
स्तनपान वाले बयान पर कायम अफसर अशोक शाह, नेताओं को दी ये नसीहत
भोपाल. मध्यप्रदेश में मांओं के द्वारा बेटियों को कम स्तनपान कराए जाने की बात कहने के बाद नेताओं के निशाने पर आए महिला बाल विकास विभाग के एसीएस (ACS) अशोक शाह अपने बयान पर कायम हैं। इसके साथ ही उन्होंने उन पर निशाना साधने वाले नेताओं को नसीहत भी दी है। एसीएस अशोक शाह ने कहा है कि उन्होंने जो कहा उस पर एक्प्लेनेशन देने की जरुरत नहीं है और जो कुछ भी कहा है वो NFHS-5 के सर्वे के आधार पर कहा है। बता दें कि भोपाल में लाडली लक्ष्मी 2.0 कार्यक्रम के दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में एसीएस अशोक शाह ने कहा था कि 2005 में सिर्फ 15% माताएं बेटियों को दूध पिलाती थीं। आज थोड़ी खुशी है, लेकिन पूरी नहीं। आज 42% माताएं अपनी बेटियों को दूध पिलाती हैं जिसमें अभी बहुत सुधार की जरुरत है।
बयान पर मच गया था बवाल
सीएम शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में भरे कार्यक्रम के दौरान एसीएस अशोक शाह के मांओं के द्वारा बेटियों को स्तनपान न कराए जाने का बयान दिए जाने के बाद बवाल मच गया था। बीजेपी की वरिष्ठ नेता और प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इसे लेकर कड़ी नाराजगी जताते हुए खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान से फोन पर इस बात की शिकायत की थी और एक के बाद एक कई ट्वीट कर भी अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उमा भारती ने अपने ट्वीट में लिखा था 'वरिष्ठ अधिकारी का बेहद असंगत व हास्यास्पद कथन देखा। मुख्यमंत्री महिलाओं के सम्मान के लिए सजग व संवेदनशील हैं। जब मैंने फोन पर बात करके सीएम को यह बात बताई, तो वह इस कथन से असहमत व आश्चर्यचकित थे। मुख्यमंत्री जी की बात से लगा कि समारोह में बहुत शोर के कारण वह इस बात को सुन नहीं पाए। मुझे लगता है कि सीएम इस कथन को ठीक करने का रास्ता स्वयं निकाल लेंगे।' आगे उन्होंने लिखा- वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि “हमारी योजना के कारण अब 42% महिलाएं अपनी बेटियों को दूध पिलाती हैं, जबकि 2005 से पहले वह 15% था। अगर यह कथन सही छपा है, तो यह बेटी विरोधी, माता विरोधी व मध्यप्रदेश की मातृशक्ति की छवि खराब करने वाला है। अधिकारियों को बयान के प्रति सचेत व जिम्मेवार रहना चाहिए। अमीर हो या गरीब, बेटा हो या बेटी, बच्चे के जन्मते ही हर मां अपने बच्चे को दूध पिलाती ही है। लाखों में एक केस में कई कारणों से ऐसा नहीं होता होगा। आखिर सारी महिलाएं बेटियां ही हैं, वो जिंदा कैसे रह गईं?
विस स्पीकर ने अफसर को याद दिलाई थी भारत की संस्कृति
विधासनभा स्पीकर गिरीश गौतम ने एसीएस अशोक शाह के इस बयान के बाद एसीएस अशोक शाह को उनकी संस्कृति याद रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था कि हम पश्चिमी देशों से तो वापस नहीं आए हैं, भारत की संस्कृति को समझना पड़ेगा। हमेशा याद रखना संस्कृति बनती है परंपराओं और संस्कारों के मेल से और भारतीय दर्शन में तीन चीजें हैं प्रकृति, विकृति और संस्कृति। प्रकृति क्या है प्रकृति का नियम ये है कि जो आपके पास है वो आप रखो और जो हमारे पास है वो हम रखें, आप मत लो। हमको शोषण नहीं करना है हमको दोहन करना है, जिस तरह से गाय दूध देती है तो उसको निचोड़ना नहीं है, जितना दूध देती है दोह लो और छोड़ दो वो 6 घंटे बाद फिर दूध देगी। तो हमको दोहन करना है ये है प्रकृति और विकृति क्या है हम प्रयास करते हैं आपको कुछ न मिले भले हमें मिले या न मिले ये विकृति है। और संस्कृति ये है कि पहले आप प्राप्त कर लो जो बचा कुछा होगा तो हम प्राप्त कर लेंगे क्योंकि हम वसुधैव कुटुंबकम वाले हैं अतिथि देवो भव वाले हैं..ये भारतीय संस्कृति है। हमें इसका ख्याल रखना चाहिए और इसलिए मैंने कहा कि जाओ जरा पूछो कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वो पश्चिमी देशों से लौटे हों और कहा हो कि हमारी माताएं बच्चों को दूध नहीं पिलाती शायद वहां से लौटे हों वहां नहीं पिलाते..वहां की संस्कृति अलग है हमारी संस्कृति अलग है।
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Published on:
12 Nov 2022 08:01 pm
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