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बाघों के बाद अब इस तकनीक से होगी जंगली हाथियों की निगरानी, 12 लोगों की ले चुके हैं जान

मध्य प्रदेश में तीन साल से डेरा डाले हुए हैं 50 जंगली हाथी। देश के जाने माने हाथी विशेषज्ञों को टीम जल्द सौंपेगी रिपोर्ट।

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बाघों के बाद अब इस तकनीक से होगी जंगली हाथियों की निगरानी, 12 लोगों की ले चुके हैं जान

भोपाल. मध्य प्रदेश में बाघों के बाद अब जंगली हाथियों की निगरानी रेडियो कॉलर से की जाएगी। इससे उनके हर मूवमेंट का पता चल सकेगा। हाथियों का झुंड किस ओर जा रहा है, उसके आधार पर नियंत्रण के लिए वन अमला एक्शन लेगा। गांवों के आस-पास उनकी निगरानी ड्रोन कैमरे से भी की जाएगी। जंगली हाथियों से निपटने के लिए विभिन्न राज्यों के हाथी विशेषज्ञों ने यह सुझाव सरकार को दिए हैं।

हाथियों से अति प्रभावित क्षेत्रों में सोलर से संचालित इलेक्ट्रिक फैंसिंग भी की जाएगी। इस फेंसिंग में हर समय हल्के करंट का प्रवाह होगा, जिससे हाथियों का दल गांव की तरफ न जा सके। विशेषज्ञों ने जो सुझाव दिए हैं। उनके आधार पर कम और दीर्घ अवधि की योजना बनाई जाएगी।

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विशेषज्ञों ने किया प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण

हाथियों की समस्या का समाधान निकालने के लिए सरकार ने मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक की अध्यक्षता में हाथी विशेषज्ञों का एक दल गठित किया है। दल ने बांधवगढ़ के प्रभावित क्षेत्रों में जाकर स्थिति को देखा।

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12 लोगों की ली जान

प्रदेश के जंगलों में तीन सालों से 50 हाथियों का अलग-अलग झुंड डेरा डाले हुए है। इस दौरान हाथियों ने 100 से अधिक घरों को बर्बाद कर दिया। 12 से अधिक लोगों की जानें भी लीं। पहले छत्तीसगढ़ से हाथियों का झुंड आता था और कुछ समय बाद वापस चला जाता था। लेकिन अब झुंड के कुछ हाथी यहीं बस जाते हैं, जो फसलों को बर्बाद करते रहते हैं। 25 हाथियों का एक दल हाल ही में आया है।


ऐसे होगा काम

-नुकसान की भरपाई तुरंत होगी

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