
बांधवगढ़ और रातापानी बना हॉटस्पॉट, वर्चस्व को लेकर बाघ और तेंदुओं के बीच हो रही लड़ाई, अबतक 10 की मौत
सिर्फ इंसान ही नहीं, पशुओं के बीच भी अपने इलाके की सीमाओं को लेकर संघर्ष होता है। कई बार इन संघर्षों में उनकी जान तक चली जाती है। कुछ ऐसा ही देखने में आ रहा है बांधवगढ़ और रातापानी अभयारण्यों में। यहां बाघों और तेंदुओं की लड़ाई खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है और ये अभयारण्य इनकी आपसी लड़ाई के हॉट स्पॉट बनते जा रहे हैं। इसकी बानगी है कि, यहां बीते 11 महीने में 10 जंगली जानवरों की लड़ाई के कारण मौत हो चुकी है। इनमें बाघों की संख्या 9 है और एक तेंदुए की मौत का मामला सामने है।
सबसे अधिक टकराव बाघों के बीच हो रहे हैं और मौतें भी इन्हीं की सबसे अदिक हो रही हैं। बाकी के टाइगर रिजर्वों में भी वन्यप्राणियों का द्वंद्व बढ़ा है। लेकिन इनके बचाव के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाल ही में दो बाघों की आपसी लड़ाई को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता व्यक्त की है।
स्थायी उपाए
- टाइगर रिजर्वों की सीमा का विस्तार करें। जहां जरूरी हो, वहां नए टाइगर रिजर्व बनाए जाए।
- बफर जोन को कोर क्षेत्र में बदले और शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ाई जाए।
- जिन क्षेत्रों में इनकी आबादी अधिक है, वहां से कम आबादी वाले क्षेत्रों में बाघ, तेंदुए की शिफ्टिंग की जाए।
बांधवगढ़ : 6 मौतें, वजह कम लैंड स्कैप में अधिक आबादी
बांधवगढ़ रिजर्व में अब तक 6 बाघों की मौतें हो चुकी है। ज्यादातर मौतें आपसी संघर्ष के कारण हुई है, जिसकी वजह बाघों की आबादी बढ़ना है। अनुमान के मुताबिक बांधवगढ़ में बाघों की संख्या 170 से 180 तक पहुंच गई है। इन्हें वन क्षेत्र व शिकार की कमी होने लगी है, जिसके कारण बाघ एक-दूसरे की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं और संघर्ष हो रहा है। सबसे अधिक संघर्ष ताला, पतौर, पनपथा में हो रहे हैं।
रातापानी: 4 मौतें, वजह हिरण-चीतल की कमी
पिछले 10 महीने में 3 बाघ व 1 तेंदुए की मौत हुई है। ये संघर्ष सामान्य वन मंडल के चिखलोद, देलावाड़ी और रातापानी वन्यजीव अभयारण्य की बरखेड़ा व गोहरगंज रेंज में हुई है। इनमें से बरखेड़ा रेंज में तेंदुए व बाकी में बाघों की जान गई। एक अनुमान के मुताबिक, यहां 60 बाघ है जिनके शिकार के लिए हिरण, चीतल जैसे वन्यप्राणियों की कमी होना मुख्य है।
इंसानों को नुकसान
उमरिया मानसेवी वन्यप्राणी अभिरक्षक पुष्पेंद्र नाथ द्विवेदी का कहना है कि, अभी तो आपसी संघर्ष में बाघों की ही मौत के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन, भविष्य में इंसानों के लिए भी खतरा बढ़ने की आशंका है। बांधवगढ़ के कोर वन क्षेत्रों से लगे मजरे-टोले में इसकी शुरुआत हो चुकी है। निपटने के लिए रणनीति जरूरी है।
शिफ्टिंग की जाए
मध्य प्रदेश वन्यप्राणी विभाग पीसीसीएफ, सेवानिवृत्त जसबीर सिंह चौहान का कहना है कि, जिन टाइगर रिजर्वों व प्रदेशों का वन क्षेत्र बाघों के लिए अनुकूल है वहां मप्र के अधिक आबादी वाले रिजर्व से बाघों को शिफ्ट करना होगा। समय रहते बाघों की जनसंख्या मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। ऐसा करके बाघों व संबंधित रिजर्व के नजदीक रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
Published on:
22 Dec 2023 03:40 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
