उड़ीसा के पुरी में रुकता है भगवान का रथ, तो कहां जाते हैं भगवान, जानने के लिए यहां क्लिक करें
मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के छोटे से गांव मानौरा में, जो मध्यप्रदेश की पुरी के रूप में विख्यात है। मान्यता है कि जब उड़ीसा में रथ रुकता है तो मानौरा में भगवान के रथ को झटका लगता है।
विदिशा- मानोरा के मंदिर में विराजित भगवान के विग्रह।
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फोटो: 5-विदिशा
नितिन कान्त चतुर्वेदी/विदिशा/भोपाल। विश्व विख्यात उड़ीसा के पुरी शहर में हर साल निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान जब रथ अचानक रुकता है, तो वहां के पुजारी घोषणा करते हैं कि भगवान कुछ देर के लिए मानौरा पधार गए हैं। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के छोटे से गांव मानौरा में, जो मध्यप्रदेश की पुरी के रूप में विख्यात है। मान्यता है कि जब उड़ीसा में रथ रुकता है तो मानौरा में भगवान के रथ को झटका लगता है। रथ खींचने के लिए तैयार श्रद्धालु समझ जाते हैं कि भगवान आ गए। इसी के साथ मानौरा में रथ यात्रा शुरू हो जाती है।
मंदिर के सामने खड़ा रथ, इस बार इसी में निकलेगी यात्रा।
विदिशा-सागर रोड पर जिला मुख्यालय से करीब 33 किमी दूर स्थित ग्राम मानौरा में 6 जुलाई को भगवान जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसके लिए 5 जुलाई से ही मेला शुरू हो चुका है। यह मेला तीन दिन तक चलेगा।
यह है मान्यता
मानौरा में किंवदंती है कि करीब 188 वर्ष पहले इस क्षेत्र के 42 गांवों के जागीरदार प्रभुभक्त माणकचंद तरफदार अपनी पत्नी पद्मावती के साथ भगवान जगन्नाथ के दर्शन की कामना लेकर पिण्ड भरते हुए उड़ीसा के तीर्थ स्थल पुरी गए थे। उनकेे ह्रदय में भाव था कि वे भगवान को अपने गांव मानौरा लेकर आएंगे।
पिंड भरने के दौरान कीचड़ में लिपटे श्रद्धालुओं को ऐसे नहलाया जाता है।
मानौरा से पुरी तक की आधी यात्रा में ही ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण दोनों का शरीर छिल चुका था। जगह-जगह से खून रिसने लगा था। इसके बाद भी वे पुरी की ओर बढ़े जा रहे थे, लेकिन बीच में ही अचेत हो गए। तब उनकी इस भक्ति से प्रसन्न भगवान जगन्नाथ स्वामी ने उन्हें दर्शन दिए और इच्छा पूछी। माणकचंद ने आग्रह किया कि 'प्रभु मेरे साथ मानोरा चलो'। भगवान जगन्नाथ ने उन्हें वचन दिया कि 'हर वर्ष आषाढ़ सुदी दोज के दिन मैं मानोरा आऊंगा।'
उधर, उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर के पुजारियों को भगवान ने स्वप्न में दर्शन देकर मानोरा के लिए प्रस्थान करने को कहा। इसके बाद पुरी से ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा माता के विग्रह मानोरा लाए गए। यहां मंदिर में उन्हें प्रतिष्ठापित किया गया। उसके बाद से हर साल यहां रथ यात्रा मेला भरने लगा। जिसमें दूर-दूर से लाखों भक्त आते हैं। तरफदार माणकचंद और उनकी पद्मावती की समाधियां आज भी इस मंदिर के पास ही हैं।
ऐसे निकाली जाती है रथ यात्रा
मानौरा में रथ यात्रा के दिन सुबह भगवान के विग्रह की पूजा कर उन्हें रथ पर विराजित किया जाता है। इसके बाद भगवान के आगमन का इंतजार किया जाता है। उधर, पुरी में रथ यात्रा प्रारंभ हो चुकी होती है। वहां कुछ देर रथ आगे बढऩे के बाद अचानक रुक जाता है। वहां के पुजारी घोषणा करते हैं कि भगवान जगदीश मानोरा पधार गए हैं।
इधर, मानोरा में रथ को अचानक झटका लगते ही यहां के पुजारी और भक्त समझ जाते हैं कि भगवान आ गए। इसके बाद रथ आगे खिंचने लगता है। यह रथ यात्रा पूरे गांव का भ्रमण करती है। अगले दिन रथ वापस मंदिर पहुंचता है, जहां भगवान के विग्रह फिर से मंदिर में विराजित कर दिए जाते हैं।
ये भी है खास
-दूर-दूर से भक्तगण तमाम कष्टों के बावजूद पिंड भरते हुए मानोरा मंदिर पहुंच रहे हैं। वहां दंडवत करते हुए मंदिर की परिक्रमा कर रहे हैं।
दूरदराज के शहरों और गांवों से लोग मानोरा तक पिंड भरते हुए जा रहे हैं।
-मानोरा मंदिर में अपनी मान्यताओं के लिए कई भक्त गोबर से उल्टे छापे लगाए जाते हैं। मान्यता पूरी होने पर हल्दी के सीधे छापे लगाए जाते हैं।
- कई श्रद्धालु यहां अपनी कामना से ध्वज चढ़ाते हैं।
-रथयात्रा के दिन भगवान को लगने वाले भोग को 'अटका' कहा जाता है। यह मीठा पीला भात होता है। जिसे सिर्फ पुजारी तीन कोरी हांडियों को एक के ऊपर एक रखकर पकाते हैं।
-रथयात्रा मेले के दौरान परंपरा के अनुरूप गांव का हर घर मेहमाननवाजी के लिए तैयार है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को ग्रामीणों द्वारा ठहरने, भोजन, पानी आदि की यथासंभव व्यवस्था की जा रही है।
मानोरा जाने वाले भक्तों के लिए ग्राम भदारबड़ागांव में निशुल्क भंडारा।
-विदिशा से मानोरा तक विभिन्न गांवों के ग्रामीणों द्वारा नेशनल हाईवे से गुजरने वाले भक्तों के लिए निशुल्क भोजन, पानी, शरबत, चाय, नाश्ता आदि का इंतजाम किया गया है। इस बार 40 से अधिक स्थानों पर ये भंडारे खोले गए हैं।
-आधुनिकता के बावजूद मानोरा का मेला आज भी ठेठ देहाती अंदाज में लगता है। मेले में ग्रामीण जीवनशैली की जरूरतों की ही वस्तुएं अधिक मिलती हैं।
-जिला प्रशासन ने यहां सुरक्षा, बिजली, पानी, पार्किंग, निगरानी, प्राथमिक उपचार आदि के इंतजाम किए हैं। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए 5 जुलाई से 7 जुलाई तक हाईवे पर मेले में आने वाले वाहन छोड़कर बाकी भारी वाहन निकलना प्रतिबंधित किया गया है।