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मध्यप्रदेश के 19 जिलों में बड़े सुपर मार्केट बनाए जाएंगे। ये नए बाजार 2000 स्क्वायर मीटर में विकसित होंगे। प्रदेश में ये बाजार केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बनवाएगी। इन बाजारों में सब कुछ मिलेगा, प्रदेश की पुरानी कला-संस्कृति के प्रतीक, शिल्पकारी, चित्रकारी, खिलौने, मिट्टी और बांस से निर्मित चीजें भी बेची जाएंगी। विशेष रूप से आदिवासियों को आजीविका के नए साधन मुहैया कराने और उनकी अतिरिक्त कमाई के लिए ये बाजार विकसित किए जा रहे हैं। यहां वनोपज भी बेची जाएंगी। स्थानीय उत्पादों के प्रमोशन के लिए यहां आऊटलेट की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
मध्यप्रदेश में जनजातियों के लिए ट्रायबल मल्टी-पर्पज मार्केटिंग सेंटर्स यानि टीएमएमसी डेवलप किए जाएंगे। प्रदेश में इन्हें सुपर मार्केट की तरह विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार ने 19 जिलों के लिए टीएमएमसी के प्रस्ताव भेज दिए हैं। ये सुपर मार्केट धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत बनेंगे।
मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य, लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन तथा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुर्नवास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने टीएमएमसी के बारे में बताया। डॉ. शाह ने बताया कि केंद्र सरकार ने देशभर में 100 ट्रायबल मल्टी-पर्पज मार्केटिंग सेंटर्स (टीएमएमसी) 'जनजातीय ग्रामीण हाट बाजार' तैयार करने की योजना बनाई है। इसके अंतर्गत मध्यप्रदेश के 19 जिलों में एक-एक टीएमएमसी स्थापित करने की योजना है। राज्य सरकार ने इसके लिए अधिकृत प्रस्ताव भेज दिया है।
जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव डॉ ई रमेश कुमार ने बताया कि टीएमएमसी राज्य के जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित किए जाएंगे। केंद्र को 19 जिलों में टीएमएमसी के प्रस्ताव भेजे गए हैं। ये मार्केट 2000 स्क्वायर मीटर में बनाए जाएंगे। मार्केट का बिल्ट-अप लैंड एरिया करीब 367.80 स्क्वायर मीटर होगा। टीएमएमसी एक-एक करोड़ रूपए की लागत से तैयार किए जाएंगे।
Published on:
06 Nov 2024 06:21 pm
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