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10 घंटे में 23 डॉक्टर्स की टीम ने की सर्जरी, छाती और पेट से जुड़ी थीं जुड़वा बहनें, स्तुति को मिली नई जिंदगी

MP News: 2 जुलाई 2011 को बैतूल में जन्मी थीं जुड़वां बहनें आराधना और स्तुति, 10 घंटे चली थी जटिल सर्जरी, 15 दिन में आराधना ने तोड़ दिया था दम, स्तुति को मिली नई जिंदगी, जीवन के संघर्ष और मेडिकल साइंस की सफलता की कहानी कहती पत्रिका की रिपोर्ट...

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Bizarre baby girl was born in mp 14 years ago successful surgery

बैतूल में 13 साल पहले जन्मीं थीं दो जुड़वां बच्चियां, छाती और पेट से जुड़ी थीं. मेडिकल साइंस की सफलता की कहानी... (फोटो: पत्रिका)

MP News: 02 जुलाई 2011… वह तारीख है जब बैतूल में जुड़वा बहनों का जन्म हुआ। स्तुति और आराधना। दोनों बहनों के दिल और लिवर आपस में जुड़े थे। कुदरती दिक्कतों के आगे डॉक्टरों ने हौसला नहीं छोड़ा। पाढर के छोटे अस्पताल में 20 जून 2012 को 23 डॉक्टरों, 11 नर्सों की टीम ने 10 घंटे जटिल सर्जरी कर स्तुति-आराधना को अलग किया। यह केस मेडिकल साइंस में जिंदगी की नजीर बना। एक बार फिर प्रदेश के लोगों में उम्मीद जगी है। गुरुवार को बैतूल जिला अस्पताल में सिर से जुड़ी बच्चियों के जन्म के बाद लोग जिंदगी की उम्मीद कर रहे हैं।

अब चहक रही 14 साल की जिंदगी

चूडिय़ां खबनिया के हरि यादव और मां माया यादव की बेटी स्तुति अब सामान्य जीवन जी रही है। पूरी तरह स्वस्थ है। हंसती-खेलती है। टेकरा गांव के निजी स्कूल में 9वीं की छात्रा है। उसका बड़ा भाई प्रवीण 17 साल का है।

आसान नहीं था लेकिन कर दिखाया

पाढर अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. राजीव चौधरी ने बताया, स्तुति-आराधना के केस में सर्जरी करने वाली टीम में ऑस्ट्रेलिया के भी तीन डॉक्टर थे। यह सब आसान नहीं था। ऑपरेशन जन्म के 1 साल बाद किया था। जांच में पता चला कि दो हार्ट बने हैं, एक ही पैकेट में हैं। दोनों के हार्ट अलग किए। लिवर दो भागों में किया। लिवर धीरे-धीरे बढ़ जाता है।

दोनों बच्चियों के दो हॉर्ट होने से सर्जरी संभव हुई। हालांकि आराधना की मौत सर्जरी के 2 सप्ताह बाद हो गई थी। यदि एक ही अंग जुड़वा में हो तो विभाजन नहीं किया जा सकता। आराधना-स्तुति का जन्म पाढर अस्पताल में हुआ था। माता-पिता इलाज कराने में असमर्थ थे, इसलिए बच्चियों को अस्पताल को सौंप दिया था।

उम्मीद से टिका आसमान

21 अगस्त को बैतूल जिला अस्पताल में खेड़ी सेलगांव की अनिता धुर्वे ने जुड़वा बेटियों को जन्म दिया। वे सिर से जुड़ी हुई हैं। उन्हें भोपाल रेफर किया गया। इसके बाद स्तुति-आराधना के बहाने जीवन बचाने पर भी चर्चा चल पड़ी।

ऐसे दुर्लभ केसों पर आखिर क्या कहते हैं एक्सपर्ट

इंदौरके एमटीएच अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील आर्य से पत्रिका ने किए सवाल, जानें जवाब...

पत्रिका: जुड़वा का जन्म ऐसे क्यों होता है?

Expert: इस तरह जुड़े बच्चों को कंज्वाइंड ट्विन्स कहते हैं। यह एक समान भ्रूण के अपूर्ण विभाजन से होता है। एक ही ओवम में साथ विकसित होते हैं। इसमें पैर से, छाती से, सिर से या पूरे शरीर से भी जुड़े हो सकते हैं। कभी-कभी कमर के नीचे का हिस्सा एक (दो पैर होते हैं), बाकी शरीर अलग-अलग होता है। करीब 1 लाख जन्म में 1 केस आता है, जो बेहद ही दुर्लभ है।

पत्रिका: बच्चे किस स्थिति में अलग-अलग हो सकते हैं?

Expert: यदि अहम अंग दो-दो विकसित होते हैं तो अलग करने की संभावना बढ़ती है। जैसे दो दिल या सिर के साथ अन्य अंग दो होना। एम्स में ऐसी सर्जरी हुई है, पर कुछ दिन बाद एक की मौत हो गई। विदेश में शोध भी हुआ है। बचने की बात करें तो संभावना बेहद कम होती है। प्रतिशत में नहीं बताया जा सकता। यह सब अंदरूनी अंगों की स्थिति पर निर्भर करता है।