
BJP Organization Election: मध्य प्रदेश में जिला अध्यक्षों के नामों पर रायशुमारी लगभग पूरी होने को है। वहीं दिल्ली में भी संगठन पर्व को लेकर आज रविवार से दो दिवसीय बैठकों का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रीय स्तर पर हो रही इन बैठकों में राज्यवार संगठन चुनावों की प्रगति और स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक ही नीतिगत निर्णय लिए जाने हैं।
माना जा रहा है कि इसी बैठक में जिला अध्यक्षों को लेकर नई गाइडलाइन तय की जा सकती है। वहीं इस बार जिला अध्यक्षों के रूप में कई महिला चेहरे भी कमान संभाल सकते हैं। बता दें कि दिल्ली बैठक में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद, प्रदेश चुनाव प्रभारी समेत प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय पर्यवेक्षक भी शामिल हुए हैं।
दरअसल, संगठन में एक बड़ा तबका ऐसा है जो मांग कर रहा है कि जो 5 साल तक जिला अध्यक्ष पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं, उन जिला अध्यक्षों को रिपीट नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि नए चेहरों को जिला अध्यक्ष होने का अवसर मिलना चाहिए।
इधर कुछ जिलाध्यक्ष चाहते हैं कि कुछ व्यक्तियों को जिला अध्यक्ष के रूप में दोबारा मौका दिया जाना चाहिए। इस तबके का तर्क है कि ये वे चेहरे हैं, जिनके नेतृत्व में पार्टी को विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बड़ी सफलता मिली है, उनका कार्यकाल निर्विवाद और उपलब्धियों भरा रहा है तो उन्हें दोबारा मौका मिलना चाहिए।
जिला अध्यक्ष चुनाव को लेकर भाजपा दो तबकों में बंट गई है। वहीं मध्य प्रदेश के भाजपा नेताओं का कहना है कि इस मसले पर फिलहाल कोई स्पष्ट नीति नहीं हैं। उनका कहना है कि ये मसला अब राष्ट्रीय स्तर की बैठक में ही स्पष्ट होगा। नई नीति बनी तो नए चेहरे सामने आ सकते हैं या चुनावों में भाजपा की भारी सफलता का श्रेय लेने वालों को ही दोबारा मौका मिल सकता है।
बता दें कि शनिवार तक प्रदेश के अधिकांश जिलों में जिलाध्यक्ष के लिए रायशुमारी की प्रक्रिया पूरी हो गई है। वहीं कई जिलों में रायशुमारी की गई, इसलिए दिनभर प्रदेश कार्यालय से लेकर भाजपा के जिला कार्यालयों में गहमागहमी का दौर बना रहा। जानकारी के मुताबिक 1 जनवरी से 3 जनवरी के बीच जिला अध्यक्षों के 3 नामों का अंतिम पैनल तैयार किया जाएगा। इसके बाद अंतिम नामों की फाइनल सूची लिफाफे में बंद कर केंद्रीय संगठन को भेज दी जाएगी। वहीं केंद्रीय संगठन 5 जनवरी के बाद इसे कभी भी जारी कर देगा।
भाजपा की नई रणनीति के मुताबिक अब तक जो तय हुआ है उसके हिसाब से कोई भी जिलाध्यक्ष 60 साल से ज्यादा उम्र का नहीं होगा। वहीं लगभग 25 फीसदी जिलाध्यक्ष के पदों पर महिलाएं नजर आ सकती हैं। यानी कुल 60 जिलाध्यक्षों में से 15 जिलाध्यक्ष के रूप में महिलाओं को मौका मिल सकता है।
Published on:
29 Dec 2024 01:53 pm
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