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Blog by Kamal Nath: ‘बल्ले को भारत की जीत का प्रतीक बनाइए, प्रजातंत्र की हार का नहीं’

mp.patrika.com पर प्रस्तुत हैं मुख्यमंत्री कमलनाथ का वो ब्लॉग जो उन्होंने युवा साथियों के लिए लिखा है...।

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भोपाल

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Manish Geete

Jun 28, 2019

kamalnath

blog by madhya pradesh chief minister kamal nath


भोपाल। मध्यप्रदेश ( madhya pradesh ) के मुख्यमंत्री ( chief minister ) कमलनाथ ( Kamal Nath ) ने शुक्रवार को युवा साथियों के नाम एक ब्लॉग ( blog by kamal nath ) लिखा है। खास बात यह है कि इस संदेश ( kamal nath message ) में उन्होंने जहां भाजपा ( BJP) के बैटमार विधायक ( akash vijayvargiya ) पर तंज कसा है, वहीं युवाओं को संस्कारवान रहने की भी सीख दी है।

mp.patrika.com पर प्रस्तुत हैं मुख्यमंत्री कमलनाथ (CM KAMALNATH) का वो ब्लॉग जो उन्होंने युवा साथियों के लिए लिखा है...।

प्रिय युवा साथियों
हिन्दुस्तान की दो बड़ी खूबियां हैं, एक तो यह विश्व का सबसे बड़ा प्रजातंत्र है और दूसरा विश्व में सर्वाधिक युवा देश। ऐसे में स्वाभाविक है कि चुने हुए युवा जन-प्रतिनिधियों से देश को अपेक्षाएं भी अधिक होंगी, और हों भी क्यों न, हमारे पास अपने प्रजातंत्र की गौरवशाली विरासत जो है।

नेहरू ने कहा था संस्कारवान युवा ही देश का भविष्य
भारतीय प्रजातंत्र का जो छायादार वटवृक्ष आज हमें दिखाई देता है, इसके त्याग और बलिदान का बीज बहुत गहरा बोया गया है और आज समूचे विश्व के लिए यह प्रेरणादायी है। पंडित नेहरू कहते थे, संस्कारवान युवा ही देश का भविष्य संवारेंगे। आज हमारे चुने हुए युवा जनप्रतिनिधियों को आत्ममंथन-आत्मचिंतन करना चाहिए कि वे किस रास्ते पर भारत के भविष्य को ले जाना चाहते हैं। एक रास्ता प्रजातंत्र की गौरवशाली विरासत की उम्मीदों को पूरा करने वाला है, और दूसरा उन्मादी।

मर्यादा नहीं लांघे
उन्मादी व्यवहार सस्ता प्रचार तो दे सकता है, प्रजातंत्र को परिपक्वता नहीं दे सकता। युवा जनप्रतिनिधियों, आप पर दायित्व है सदन में कानून बनाने का, सड़कों पर कानून हाथ में लेने का नहीं। आप अपनी बात दृढ़ता और मुखरता से रखें, मर्यादा को लांघ कर नहीं।

हम विश्वकप में परचम लहराएंगे
आज समूचे विश्व को हमारे बल्ले की चमक देखने को मिल रही है। हमारी क्रिकेट टीम लगातार जीत हासिल कर रही है और हमें पूरी उम्मीद है कि हम विश्व कप में अपना परचम लहराएंगे। मगर बल्ले की यह जीत बगैर मेहनत के हासिल नहीं की जा सकती। खिलाड़ियों को मर्यादित मेहनत करनी होती है।

धैर्य से आती है सहनशीलताकमलनाथ ने आगे लिखा है कि मर्यादा धैर्य सिखाती है, धैर्य से सहनशीलता आती है, सहनशीलता से वे परिपक्व होते हैं और परिपक्वता जीत की बुनियाद बनती है। अर्थात खेल का मैदान हो या प्रजातंत्र, मूल मंत्र एक ही है। यह बात मैं सीमित और संकुचित दायरे में रह कर नहीं कह रहा हूं।

सभी दल से किया अनुरोध
सभी दल के युवा साथियों से मेरा यह अनुरोध है। मुख्यमंत्री होने के नाते मेरा दायित्व भी है कि मैं अपने नौजवान और होनहार साथियों के साथ विमर्श करता रहूं। युवा जनप्रतिनिधि साथियों, बल्ले को मैदान में भारत की जीत का प्रतीक बनाइए, सड़कों पर प्रजातंत्र की हार का नहीं।

आपका
कमलनाथ