
bundelkhand
राजस्थान में तो रेगिस्तान है ही, लेकिन बुंदेलखंड भी रेगिस्तान बन सकता है। जलपुरुष के नाम से चर्चित राजेंद्र सिंह ने सूखे की मार झेल रहे बुंदेलखंड को लेकर दूसरे राजस्थान (रेगिस्तान) बनने की आशंका जताई है।
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में चार सामाजिक संगठनों की ओर से निकाली जा रही जल-हल यात्रा में हिस्सा लेने आए राजेंद्र सिंह ने कहा कि रााजस्थान तो रेत के कारण रेगिस्तान है, मगर बुंदेलखंड हालात के चलते रेगिस्तान में बदल सकता है। यहां के खेतों की मिट्टी के ऊपर सिल्ट जमा हो रही है, जो खेतों की पैदावार को ही खत्म कर सकती है।
राजेंद्र के मुताबिक उन्होंने जल-हल यात्रा के दौरान टीकमगढ़ और छतरपुर के तीन गांवों की जो तस्वीर उन्होंने देखी है, वह बेहद डरावनी है। उन्होंने बताया कि यहां लोगों को खाने के लिए अनाज और पीने के लिए पानी भी आसानी से उपलब्ध नहीं है। जानवरों के लिए चारा और पानी नहीं है। रोजगार के अभाव में युवा पीढ़ी पलायन कर गई है। इतना ही नहींए नदियां पत्थरों में बदलती नजर आती हैं, तो तालाब गड्ढे बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि इन सब स्थितियों के लिए सिर्फ प्रकृति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। इसके लिए हम लोग भी कम जिम्मेदार नहीं है। उनका मानना है कि अब भी स्थितियों को सुधारा जा सकता है क्योंकि मॉनसून करीब है। इसके लिए जरूरी है कि बारिश के ज्यादा से ज्यादा पानी को रोका जाए।
नदियों को पुनर्जीवित करने का अभियान चले, तालाबों को गहरा किया जाए और नए तालाब बनाए जाएं। उनके मुताबिक बारिश शुरू होने से पहले अगर ये सारे प्रयास कर लिए गए, तो आगामी वर्ष में सूखे जैसे हालात को रोका जा सकेगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर क्या होगा, यह तो ऊपर वाला ही जाने।

बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
