
229 गंभीर बीमारियों का कारण है मोटापा (Photo Source- Patrika)
Health Alert : देश में 354 मिलियन लोग 'पेट ओबेसिटी' यानी तोंद और कमर का घेरा बढ़ने से परेशान हैं। जबकि, 251 मिलियन सामान्य ओबेसिटी से ग्रस्त हैं। बावजूद इसके शिक्षित वर्ग भी मोटापा को गंभीर बीमारी के बजाय केवल कॉस्मेटिक समस्या मानता है। यही वजह है कि, हार्ट अटैक, डायबिटीज और हाइपर टेंशन जैसे मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इस समस्या पर कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. पीसी मनोरिया ने मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित कुशाभाऊ ठाकरे हॉल में आयोजित 'सीडीईई एंड सीसी सीओएन' कार्यक्रम में चिंता व्यक्त की। कार्यक्रम में दूसरे दिन देश के शीर्ष चिकित्सा विशेषज्ञों ने मोटापा को एक 'वैश्विक महामारी' बताया।
डॉ. मनोरिया ने बताया कि जब पेट की ओबेसिटी बढ़ती है तो यह मेटाबॉलिक ओबेसिटी कहलाती है, जो भविष्य में लिवर और किडनी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देती है। मोटापा लगभग 229 तरह की बीमारियों को जन्म देता है। डायबिटीज और 16 तरह के कैंसर का खतरा भी शामिल है।
मोटापे के मुख्य कारणों पर बोलते हुए डॉ. मनोरिया ने हाई कैलोरी फूड और एनर्जी एक्सपेंडिचर (कैलोरी की खपत) के खराब होने को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि, अधिक भोजन से पेट में हार्मोन एकत्रित होते हैं, जिससे लिवर में फैट जमा होता है और यह फैट इंसुलिन को रोकने का काम करता है।
-डॉ. मनोरिया ने ओबेसिटी से निपटने के लिए जीवनशैली में सुधार को एकमात्र समाधान बताया और सलाह देते हुए कहा-
-रोजमर्रा की एक्टिविटी करते रहें।
-कम भोजन करें और सही समय पर खाएं।
-अच्छी नींद लें।
-खाना सेहत के लिए खाएं, स्वाद के लिए नहीं।
-सैचुरेटेड फूड से दूर रहें, क्योंकि ‘यह जहर के समान है।’
-दैनिक जीवन में सलाद और फ्रेश फूड को शामिल करें।
अन्य सत्रों में, बेंगलुरु के डॉ. अरविंदा जगदीशा ने एआई को डॉक्टरों का सहयोगी बताया, वहीं डॉ. खिलनानी ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस और डॉ. खुसरव बजन ने सेप्सिस के शुरुआती इलाज के महत्व पर चर्चा की।
Updated on:
24 Nov 2025 07:36 am
Published on:
24 Nov 2025 07:36 am
