
ice cream
भोपाल। सिर्फ तीन माह के कारोबार के लिए 9 माह तक इंतजार करने वाले आइसक्रीम कारोबारियों को इस बार शुरू होने से पहले ही पटरी से उतर गया है। अब लॉकडाउन में गर्मी का सीजन गुजर जाएगा और 9 माह बाद ही इस कारोबार को पटरी पर लाया जा सकेगा। मध्यप्रदेश में लॉकडाउन के दौरान इस कारोबार ( ice cream business ) को 150 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है।
गर्मी का सीजन चल रहा है और इस सीजन की सबसे पसंदीदा आइसक्रीम कोरोना के कारण गायब है। आइसक्रीम ( Ice Cream ) का उद्योग मार्च माह में शुरू होने से पहले ही यह पटरी से उतर गया था। प्रदेश में आइसक्रीम और उसका कच्चा माल फैक्ट्रियों में रखा है, लेकिन पार्लर बंद होने से सप्लाई नहीं हो पा रही है। कारोबारियों ( ice cream industry ) का कहना है कि जो क्षेत्र ग्रीन जोन में है, वहां भी आइसक्रीम की सप्लाई को अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे तैयार माल भी खराब होने की स्थिति में पहुंच गया है। इससे भारी नुकसान ( financial crisis ) उठाना पड़ रहा है। यही हाल रहा तो इस उद्योग के 50 प्रतिशत प्लेयर मार्केट से बाहर हो सकते हैं।
एक नजर
10 हजार करोड़ की आइसक्रीम इंडस्ट्री देशभर में
18 फीसदी के टैक्स स्लैब में है यह उद्योग
3 माह में बिक्री के लिए 9 माह होता है इंतजार
3 हजार करोड़ का व्यवसाय मार्च अप्रैल मई में
6 फैक्ट्री भोपाल में बनाती हैं बर्फ
1 लाख से अधिक लोग आइसक्रीम बर्फ व्यवसाय से जुड़े हैं
तीन बड़े शहरों में होता है बड़ा कारोबार
आइसक्रीम की खपत भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में ज्यादा होती है। इंदौर में विभिन्न कंपनियों के करीब 42 एवं भोपाल में 35 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर हैं। इंदौर और भोपाल में रोजाना आठ लाख से ज्यादा की बिक्री होती है। टॉप एंड टाउन कंपनी इंदौर के डिस्ट्रीब्यूटर दर्पण हसीजा के मुताबिक कारोबार का नुकसान तो हुआ है। उम्मीद है कि 17 मई के बाद रिकवरी होने लगेगी। ग्वालियर में करीब आधा दर्जन से अधिक कंपनियों के 35 डिस्ट्रीब्यूटर हैं। वॉडीलाल ग्वालियर के सीएंडएफ संदीप जैन के अनुसार शादी- विवाह, रेस्टोरेंट, रेस्टोरेंट, मॉल आदि बंद होने का आइसक्रीम कारोबार पर बुरा असर पड़ा है।
50-60 फीसदी व्यापार
गर्मी के मौसम में मार्च-अप्रैल और मई माह में कारोबार के लिए आइसक्रीम निर्माता 9 माह तक इंतजार करते हैं। इन्हीं महीनों में शादी-विवाह, धार्मिक आयोजन होते है। यानी पूरे गर्मी के सीजन का 50 से 60 फीसदी प्रतिशत कारोबार गर्मी के इन्हीं दिनों में हो जाता है। इस उद्योग को राहत प्रदान करने के लिए आइसक्रीम निर्माताओं की नेशनल बॉडीज ने राहत देने की मांग करते हुए सरकार को पत्र लिखा है।
बर्फ फैक्ट्रियां भी बंद
इन दिनों बर्फ फैक्ट्रियों में भी ताले पड़े हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि 17 मई के बाद भी हालात सामान्य नहं हुते हैं तो हमारा घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। हजारों लोगों का रोजगार छिन जाएगा। अशोक आइस फैक्ट्री के संचालक रंजीत सिंह संधू बताते हैं कि फरवरी के आखिरी दिनों से ही बर्फ की मांग शुरू हो जाती है। इस बार ऑर्डर ही नहीं मिले। होटल, रेस्टोरेट में भी बर्फ लगता है, लेकिन वहां से भी आर्डर नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि फैक्ट्रियां बंद होने से प्रोडक्शन बंद हैं। इसके बावजूद बिजली के बिल लाखों में आ रहे हैं। सरकार को चाहिए कि कम से कम बिजली के बिल से तो उन्हें राहत दी जाए।
सरकार को लिखा है पत्र
इंडियन आइसक्रीम मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता अनुव्रत पवरई बताते हैं कि हमने सरकार को पत्र लिखा है। मार्च, अप्रैल और मई की 40 से 45 प्रतिशत बिक्री चली गई। अब जो बिजनेस होना है, उसमें भी कई तरह की परेशानियां दिखाई दे रही हैं। ठेला गाड़ी वाले तक अपने घर चले गए हैं। लेबर की समस्या भी चुनौती बनी हुई है।
भारी नुकसान की आशंका
टॉप एंड टाउन के डायरेक्टर अरुण रामानी कहते हैं कि इस साल कोरोना वायरस के कारण हुए लॉकडाउन से आइसक्रीम बिजनेस को बड़ा नुकसान हुआ है। तैयार माल भी नहीं बिक रहा है और नया माल तैयार ही नहीं हो सका। ऐसे में अकेले मध्यप्रदेश में ही 150 करोड़ रुपए से अधिक का व्यवसाय प्रभावित होने की आशंका है।
Published on:
06 May 2020 02:00 pm
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