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Delhi Blast के बाद जवाद और उसके भाई हमूद की करतूतें उजागर, 50 करोड़ की ठगी का बड़ा खुलासा

Delhi Blast: दिल्ली ब्लास्ट के बाद अल-फला यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी, उसके भाई हमूद की करतूतें सामने आने लगी हैं। जांच में हुए खुलासे भोपाल के हजारों लोगों के साथ ठगी की, वो भी तब जब गैस त्रासदी से उबर रहे थे कई मुस्लिम परिवार

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Delhi blast

Delhi blast: फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं दोनों भाई। शुरू हो गई है जांच।(फोटो: पत्रिका/सोशल मीडिया)

Delhi Blast Accused: तलैया और शाहजहांनाबाद पुलिस ने पुराने ठगी मामलों की जांच फिर से शुरू कर दी है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी और उसके भाई हमूद की करतूत सामने आने लगी है। जांच में पता चला है कि दोनों ने धर्म और समुदाय की भावनाओं का सहारा लेकर भोपाल के हजारों लोगों को झांसे में लेकर 50 करोड़ ठग कर भाग गए थे।

सिद्दीकी भाइयों के पास थी भोपाल गैस त्रासदी की मुआवजा राशि

पुराने शहर के लोगों ने बताया कि 1990 के दशक में जब कई मुस्लिम परिवार भोपाल गैस त्रासदी से उबर रहे थे और उनके पास मुआवजा राशि थी तभी सिद्दीकी भाइयों ने अल-फलाह और अल-फहद नाम की इस्लामिक तरीके से चलने वाला बताकर निवेश योजनाएं शुरू कीं।

पिता से निवेश कराया एक लाख

शाहजहांनाबाद के शाहवर अजीज ने बताया कि मेरे पिता अब्दुल अजीज को भरोसे में लेने के लिए सिद्दीकी भाइयों ने लोगों से कहा कि ये आय जायज है, ये सूद नहीं, बल्कि हलाल है। इस बात पर दोनों भाईयों के कहने पर पिता अब्दुल अज़ीज़ ने 1 लाख निवेश किए थे। पिता अब नहीं रहे, लेकिन आज भी योजना की एफडी रसीद सुरक्षित है।

धार्मिक स्थलों में खोले दफ्तर

लोगों को भरोसे में लेने के लिए दोनों भाईयों ने धार्मिक स्थलों के पास दफ्तर खोले थे। हमूद ‘अल-फहद’ का संचालन ताजुल मसाजिद परिसर से करता था। वहीं जवाद ‘अल-फलाह’ को बुधवारा में कुलसुम बी मस्जिद के पास दफ्तर चलाता था। वे खुद को बहुत धार्मिक बताते थे। इसके अलावा उन्होंने एजेंटों के जरिए लोगों को निवेश कराने लगाए थे। इन्हें पोल्ट्री फार्म, कृषि परियोजनाओं और एग पाउडर एक्सपोर्ट जैसी योजनाओं में पैसा लगाने को कहा जाता था। पहले एक साल तक मुनाफा दिखाकर निवेशकों का विश्वास जीता जाता, फिर उन्हें पैसा निकालने की बजाय दोबारा निवेश करने के लिए कहा जाता।

बर्बाद हुई कई जिंदगियां

साल 2000 तक भोपाल में ही करीब 50 करोड़ रुपए लोगों के डूब गए। कई परिवारों ने बेटियों की शादी टाल दी, जो कभी नहीं हो पाई। कई युवकों ने पढ़ाई छोड़ दी। बुजुर्ग माता-पिता पुलिस थानों और अदालतों के चक्कर काटते रह गए।

रिटायर्डकर्मी ने जमा किए 4 लाख

भेल से रिटायर्ड नवाब मिर्जा बैग ने 4 लाख रुपये निवेश किए थे और सिर्फ एक साल लाभ मिला और फिर सब बंद हो गया। वहीं मुफ़ीक़ आलम के परिवार ने 1.4 लाख रुपए निवेश किए। उन्होंने दिल्ली तक केस किया, लेकिन केवल थोड़ा-सा पैसा ही वापस मिला।

पुराने ठगी मामलों की फिर से जांच के निर्देश

भाइयों के पुराने ठगी मामलों की पुन: जांच के निर्देश दे दिए गए हैं। दोनों थानों की पुलिस और जोन डीसीपी की निगरानी में छानबीन की जा रही है।

हरिनारायण चारी मिश्र, पुलिस कमिश्नर