दिग्विजय ने फिर की धारा 370 पर बयानबाजी, कश्मीरी नेताओं को दिया धन्यवाद

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एक बार फिर आर्टिकल 370 पर बयान देते हुए फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को थैंक्स कहा है।

By: Hitendra Sharma

Published: 03 Jul 2021, 08:22 AM IST

भोपाल. राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने फिर से धारा 370 को लेकर बयानबाजी की है। इस बार उन्होंने कश्मीरी नेता फारुख अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को थैंक्स कहा है, शुक्रवार को उन्होंने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधाते हुए कहा है कि 20 हज़ार से ज्यादा लोग अभी क्या कर रहे हैं? जान लीजिए

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दिग्विजय ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने से पहले किसी दल के साथ विचार विमर्स नहीं किया, इतने बड़े फैसले के बाद भी किसी से चर्चा नहीं की गई। दिगविजय सिंह ने कहा है कि धारा 370 लागू किए बिना फारुख अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती के साथ कश्मीर के सभी लोग नहीं मानेंगे। दिग्गी के बयान से एक बार फिर सियासी सरगर्मियां बढ़ गई हैं।

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जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को लेकर दिग्विजय सिंह ने तीन सप्ताह पहले भी बयान दिया था कि अगर कांग्रेस सत्ता में लौटी तो आर्टिकल 370 की दोबारा बहाली पर विचार किया जाएगा। ये बयान दिग्गी ने क्लबहाउस चैट में दिया था। दिग्विजय सिंह के बयान के बाद से बीजेपी ने जमकर आलोचना की, दिग्विजय सिंह के बयान की निंदा खुद उनसे घर से शुरु हो गई। उनके छोटे भाई लक्ष्मण सिंह की पत्नी ने इस पर बयान पर कांग्रेस पार्टी से जबाब मांग कर पूछा था कि क्या ये कांग्रेस पार्टी का बयान माना जाए।

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रूबीना ट्वीटर (@SharmaSinghR) पर लिखती हैं कि कश्मीरी पंडितों और तथाकथित आरक्षण के बारे में जो बोला गया है वो दुर्भाग्यपूर्ण हैं। वो भी सीमा पार (पाकिस्तान) के एक पत्रकार से। एक ऐसा देश जिसने हमें शांति से रहने नहीं दिया। जैसे हमने कष्ट नहीं उठाया हो।

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने तो मांग कर दी कि दिग्विजय के संपर्कों की एनआईए से जांच होनी चाहिए। हालांकि लगाातर आलोचनाओं के बाद दिग्विजय ने सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने इस मामले में ट्विटर को नोटिस भी भेजा है।

कश्मीर नेताओं के साथ पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने 24 जून को हुई सर्वदलीय बैठक की थी। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, नेशनल कांफ्रेंस के फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ्ती और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद सहित चार पूर्व मुख्यमंत्रियों शामिल थे।

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