
धनतेरस 2019: दीपावली पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त...,धनतेरस 2019: दीपावली पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त...,धनतेरस 2019: दीपावली पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त...
भोपाल। इस साल यानि 2019 में दीपावली ( Deepawali ) का पांच दिवसीय पर्व 25 अक्टूबर से शुरू होकर 29 अक्टूबर तक चलेगा। वहीं इस दौरान 25
अक्टूबर, 2019 (शुक्रवार) को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा।
धनतेरस ( Dhanteras ) के दिन बर्तन व अन्य कई तरह की चीजें खरीदने की परंपरा और मान्यता है। वहीं इस दिन सोने की खरीदारी करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। सोना खरीदने के पीछे पौराणिक कथा भी जुड़ी हुई है। धनतेरस ( Dhanteras ) धन और तेरस दो शब्दों के मेल से बना है।
धनतेरस मुहूर्त :
19:10:19 से 20:15:35 तक
अवधि : 1 घंटे 5 मिनट
प्रदोष काल : 17:42:20 से 20:15:35 तक
वृषभ काल : 18:51:57 से 20:47:47 तक
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार धनतेरस ( Dhanteras ) कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाने वाला त्यौहार है। धन तेरस को धन त्रयोदशी व धन्वंतरि जंयती के नाम से भी जाना जाता है।
धनतेरस के दिन सोने-चांदी आदि धातु की चीज खरीदना शुभ माना जाता है और अगर ये चीज शुभ योग (shubh yog ) में खरीदा जाए तो ये और अधिक फलदायक होता है। जानें खरीदारी का शुभ मुहूर्त...
वहीं इस बार धनतेरस के दिन खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त शाम शाम 7 बजकर 19 मिनट से 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। हालांकि पूरा दिन खरीदारी के लिए शुभ रहेगा, लेकिन इस दिन कोई खास चीज विशेष मुहूर्त में खरीदी जाए तो शुभ होता है। इसी मुहूर्त में पूजा करना भी लाभदायक होता है।
धनतेरस पर सोना खरीदने की पौराणिक कथा...
धनतेरस पर वैसे तो हम कई तरह की चीजें खरीदते हैं मगर बाजार में स्वर्णकारों के यहां इस दिन लोगों की भीड़ देखने को मिलती है। मगर क्या आप जानते हैं इसके पीछे भी एक कारण है।
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार धनतेरस पर सोने खरीदने का नाता सालों से चली आ रही एक पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है।
पौराणिक कथा के अनुसार धनतेरस हिम नामक एक राजा के बेटे के श्राप से संबंधित है। बताते हैं कि राजा हिम के बेटे को श्राप था कि शादी के चौथे दिन ही उसकी मृत्यु हो जाएगी। मगर जब इस बात का राजकुमार की पत्नी को पता चला तो उसने एक नीति बनाई।
उसने अपने पति से शादी के चौथे दिन जगे रहने के लिए कहा। मगर पति कहीं सो न जाए इसके लिए वह लगातार गीत और कहानियां सुनाती रही। उसके बाद उसने घर के दरवाजे पर सोने-चांदी व अन्य बहुमूल्य वस्तुएं रख दीं। घर के आस-पास दीये भी जलाए।
यम सांप के रूप में राजा हिम के बेटे की जान लेने आए तो आभूषणों और दीपों की चमक से अंधे हो गए। वह घर के अंदर प्रवेश ही नहीं कर सके।
वह आभूषणों के ढेर पर बैठ गए और रात भर गीत सुनते रहे। सुबह होने पर यमराज राजकुमार के प्राण लिए बिना ही चले गए क्योंकि मृत्यु की घड़ी बीत चुकी थी।
विशेष समय: 25 अक्टूबर का ऐसे समझें...
25 अक्टूबर 2019 का पंचांग तिथि नक्षत्र
माह – कार्तिक
तिथि – द्वादशी – 19:10:19 तक
पक्ष – कृष्ण
वार – शुक्रवार
नक्षत्र – पूर्वा फाल्गुनी – 11:00:29 तक
अशुभ समय : राहुकाल – 10:40:49 से 12:05:07 तक
शुभ मुहूर्त
चर – 06:32 से 07:55
लाभ – 07:55 से 09:18
अमृत – 09:18 से 10:42
शुभ – 12:05 से 13:28
चर – 16:15 से 17:38
खरीदारी के खास मुहूर्त...
काल- सुबह 7:33 बजे खाद्यान्न खरीदने के लिए शुभ समय है।
शुभ- सुबह 9: 13 का समय गाड़ी, मशीन, कपड़ा और शेयर खरीदने के लिए शुभ है।
चर- दोपहर 2: 12 बजे का समय गाड़ी और गैजेट खरीदने के लिए शुभ है।
लाभ- दोपहर 3: 51 का समय लाभ कमाने वाली मशीन और कम्प्यूटर खरीदने के लिए शुभ है।
अमृत- शाम 5: 31 बजे का समय जेवर और बर्तन खरीदने के लिए शुभ।
काल- 7: 11 बजे का समय घरेलू सामान खरीदने के लिए शुभ है।
धनतरेस पर लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल 2 घंटे 24 मिनट का रहेगा। जो शाम 5 बजकर 45 मिनट से 8 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। धनतेरस पर चौघड़िया मुहूर्त में कभी भी मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।
धनतेरस पर सबसे पहले मिट्टी का हाथी और भगवान धन्वंतरि की मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद चांदी या तांबे की आचमनी में जल का आचमन कर भगवान गणेश का पूजन करें। हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर भगवान धन्वंतरि का ध्यान भी करें।
मान्यता है कि इस दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जनक धन्वंतरि देव समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धन तेरस को धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है।
धन्वंतरि देव जब समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे उस समय उनके हाथ में अमृत से भरा कलश था। इसी वजह से धन तेरस के दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। धनतेरस पर्व से ही दीपावली की शुरुआत हो जाती है।
धनतेरस के कुछ खास शास्त्रोक्त नियम
1. धनतेरस कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की उदयव्यापिनी त्रयोदशी को मनाई जाती है। यहां उदयव्यापिनी त्रयोदशी से मतलब है कि, अगर त्रयोदशी तिथि सूर्य उदय के साथ शुरू होती है, तो धनतेरस मनाई जानी चाहिए।
2. धन तेरस के दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्त) में यमराज को दीपदान भी किया जाता है। अगर दोनों दिन त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल का स्पर्श करती है अथवा नहीं करती है तो दोनों स्थिति में दीपदान दूसरे दिन किया जाता है।
धनतेरस की पूजा विधि और धार्मिक कर्म
मानव जीवन का सबसे बड़ा धन उत्तम स्वास्थ है, इसलिए आयुर्वेद के देव धन्वंतरि के अवतरण दिवस यानि धन तेरस पर स्वास्थ्य रूपी धन की प्राप्ति के लिए यह त्यौहार मनाया जाना चाहिए।
1. धनतेरस पर धन्वंतरि देव की षोडशोपचार पूजा का विधान है। षोडशोपचार यानि विधिवत 16 क्रियाओं से पूजा संपन्न करना। इनमें आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन (सुगंधित पेय जल), स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध (केसर-चंदन), पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आचमन (शुद्ध जल), दक्षिणायुक्त तांबूल, आरती, परिक्रमा आदि है।
2. धनतेरस पर पीतल और चांदी के बर्तन खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि बर्तन खरीदने से धन समृद्धि होती है। इसी आधार पर इसे धन त्रयोदशी या धनतेरस कहते हैं।
3. इस दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीये जलाने चाहिए। क्योंकि धनतेरस से ही दीपावली के त्यौहार की शुरुआत होती है।
4. धनतेरस के दिन शाम के समय यम देव के निमित्त दीपदान किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मृत्यु के देवता यमराज के भय से मुक्ति मिलती है।
धनतेरस के दिन करें 5 में कोई 1 उपाय, हो जाएंगे मालामाल...
धनतेरस के दिन कुबेर देवता का पूजा की जाती है जबकि दीपावली पर धन की देवी लक्ष्मी की पूजा होता है।ज्योतिष के अनुसार अगर धनतेरस और दिवाली के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होता है और व्यक्ति मालामाल बन जाता है।
: मां लक्ष्मी का कृपा पाने के लिए दीपावली के दिन लक्ष्मी के चरणों में कौडियां रखें। ऐसा करने से धन लाभ होता है।
: घर की तिजोरी के दरवाजे पर महालक्ष्मी का ऐसा चित्र लगाएं जिसमें लक्ष्मी जी बैठी हुई हों और दो हाथी सूड़ उठाए नजर आते हों। चित्र सुंदर और परंपरागत हो। ऐसा करने पर हमेशा तिजोरी में लक्ष्मी जी का वास रहेगा।
: वास्तु के अनुसार धन के देवता कुबेर का स्थान उत्तर दिशा में माना गया है। इसलिए नकदी को उत्तर दिशा में रखेंगे तो लाभ होगा।
: धनतेरस और दीपावली पर महालक्ष्मी यंत्र का पूजन कर इसकी स्थापना करें। यह यंत्र धन वृद्धि के लिए अधिक उपयोगी माना गया है।
: कुछ जानकारों की मानें को नकदी को उत्तर दिशा और रत्न-आभूषणों को दक्षिण दिशा में रखना चाहिए। दक्षिण दिशा में भारी कीमती चीजें रखना शुभ माना जाता है।
इन 4 चीजों से मां लक्ष्मी होती हैं आकर्षित...
दीपों का पांच दिवसीय त्योहार दीपावली धनतेरस के साथ ही शुरू हो जाएगा। जो भैया दूज के साथ समाप्त होगा। धनतेरस पर हर तबके का व्यक्ति कुछ न कुछ नई चीज जरूर खरीदता है।
कहा जाता है कि इस खरीदी गई हर चीज के बरकत होती है। आपने अगर पहले से ही योजना बना ली है इस दिन आपको क्या खरीदना है तो भी यहां बताए गए इन 4 चीजों में से एक चीज जरूर खरीदें, क्योंकि ये चीज मां लक्ष्मी को आपके घर आकर्षित करती है।
: चांदी का सिक्का या बर्तन जरूर खरीदें। अगर आप ज्यादा भारी नहीं खरीद सकते तो एक छोटी सी चम्मच ही खरीद लें और इससे ही देवी लक्ष्मी की पूजा करें। चांदी के लक्ष्मी जी और गणेश जी भी खरीदे जा सकते हैं। पूजन के बाद इन्हें अपनी तिजोरी में रखें और नियमित धूप दीप दिखाएं। इससे आपके धन में वृद्धि होगी।
: धनतेरस के दिन धनिया के बीज खरीदें। यह धन का प्रतीक माना गया है। लक्ष्मी पूजन के समय देवी को धनिया अर्पित करने के बाद अपने बागीचे में कुछ बीज बो दें और कुछ को कौड़ी और गोमती चक्र के साथ तिजोरी में रखें।
: इस धनतेरस पत्नी के लिए लाल वस्त्र और श्रृंगार सामग्री खरीदकर उन्हें उपहार देना शुभ होता है। अविवाहित व्यक्ति किसी अन्य सुहागन स्त्री को उपहार दे सकते हैं।
: तिजोरी और स्टील के बर्तन खरीदना चाहते हैं तो यह भी खरीदे जा सकते हैं, लेकिन राहु की वस्तु होने के कारण एल्युमिनियम और शीशे की वस्तु धनतेरस के दिन न खरीदें।
न करें इन 5 चीजों का इस्तेमाल...
दीपावली पर घर में सुख-शान्ति और धन-संपदा प्राप्त करने के लिए इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। शास्त्रों में देवी लक्ष्मी की पूजा करते समय कुछ नियम बताए गए हैं अगर इनकी अनदेखी की जाती है और पूजा में इनका प्रयोग किया जाता है तो धन की देवी लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं इसलिए देवी लक्ष्मी की पूजा करते समय इन बातों का जरूर ध्यान रखें।
: भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय होती है लेकिन देवी लक्ष्मी को तुलसी से वैर है क्योंकि यह भगवान विष्णु के दूसरे स्वरूप शालिग्राम की पत्नी है। इस नाते तुलसी देवी लक्ष्मी की सौतन है। इसलिए देवी लक्ष्मी की पूजा में तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए।
: देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए दीपक की बाती का रंग लाल होना चाहिए दीपक को दायीं ओर रखें। दीपक बायीं ओर नहीं रखना चाहिए। इसका कारण यह है कि भगवान विष्णु अग्नि और प्रकाश स्वरूप हैं। भगवान विष्णु का स्वरूप होने के कारण दीप को दायी ओर रखना चाहिए।
: सफेद फूल देवी लक्ष्मी को नहीं चढ़ाएं। देवी लक्ष्मी चीर सुहागन हैं इसलिए इन्हें हमेशा लाल फूल जैसे लाल गुलाब और लाल कमल फूल चढ़ाया जाता है।
: देवी लक्ष्मी की पूजा तब तक सफल नहीं मानी जाती है जब तक भगवान विष्णु की पूजा नहीं होती है। इसलिए दीपावली की शाम गणेश जी की पूजा के बाद देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की भी पूजा करें।
: देवी लक्ष्मी की पूजा के समय प्रसाद दक्षिण दिशा में रखें और फूल बेलपत्र हमेशा सामने रखें।
Updated on:
30 Sept 2019 12:30 pm
Published on:
30 Sept 2019 12:21 pm

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