
देवगुरु का राशि परिवर्तन: मंगल के घर से जानिये अब किन राशियों का होगा अमंगल!
भोपाल। ज्योतिषशास्त्र के 12 ग्रहों में से एक देवताओं के गुरु यानि बृहस्पति अपने ही दिन यानि गुरुवार को एक बड़ा राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं।
ज्योतिष के 12 ग्रहों में गुरु को काफी मजबूत ग्रह माना जाता है। इसी के चलते यह भी कहा जाता है कि यदि गुरु कहीं मध्य यानि प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव पर आ कर बैठ जाए और उस पर किसी की कूदृष्टि न हो तो वह कुण्डली के सभी दोषों को दूर करने में सक्षम होता है।
गुरु के इस राशि परिवर्तन के संबंध में ज्योतिष के जानकार बीके श्रीवास्तव और पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि बृहस्पति दिनांक 11 अक्टूबर 2018 की शाम को वृश्चिक राशि (मंगल के घर) में प्रवेश करेंगे।
वहीं बृहस्पति के इस राशि परिवर्तन के दौरान चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में होगा, जो कि बृहस्पति का ही नक्षत्र है। ऐसे में कुल मिलाकर ये बात साफ है कि अपने आगमन काल से ही गुरु मजबूत अवस्था मे होंगे। फलस्वरूप जिन जातकों का बृहस्पति योगकारी है, वे जीवन के सभी क्षेत्र में खास प्रगति प्राप्त करेंगे।
ऐसे समझेें प्रभाव:
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार वैदिक ज्योतिष में गुरु का गोचर अत्यंत महत्वपूर्ण है। गुरु जीवन में उन्नति का कारक हैं और इन्हें ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत शुभ माना गया है।
बृहस्पति के शुभ प्रभाव से जातक का मन अध्यात्म और धार्मिक कार्यों में लगता है। वहीं गुरु करियर में उन्नति, स्वास्थ्य में सुधार और आर्थिक स्थिति को मजबूत करता है।
पंडित शर्मा के अनुसार साल 2018 में बृहस्पति देव अधिकतर समय तुला राशि में गोचर करने के बाद 11 अक्टूबर यानि गुरुवार के दिन शाम को तुला राशि से चलकर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगें और मार्च, 2019 तक इसी राशि में विराजमान रहेंगें। गुरु के इस गोचर को विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा।
वैसे भी गुरुवार का दिन श्री विष्णु या मां सरस्वती का माना जाता है। अत: बृहस्पति के किसी भी प्रकार के बुरे प्रभाव से बचने के लिए श्रीविष्णु की पूजा सबसे उचित मानी जाती है। वहीं चुंकि गुरु मंगल की राशि में प्रवेश कर रहे है और मंगल के देव श्रीहनुमान है अत: ऐसे में श्रीराम की पूजा सर्वाधिक उचित मानी जाएगी।
ये होगा आम प्रभाव!...
ज्योतिष बीके श्रीवास्तव के अनुसार इस परिवर्तन से लोगों के अंदर सरकार के प्रति अविश्वसनीयता की स्थिति बनने, मंगल की राशि में आया गुरु कई जगह धार्मिक उन्माद पैदा करने व मंगल की नकारात्मक राशि का गुरु उच्च वर्ण के लोगों का भी सरकार पर भरोसा तोड़ने की संभावना बनाता है।
ये पड़ेगा आपकी राशि पर असर...
1. मेष -
आपके नवम और द्वादश भाव के स्वामी बृहस्पति देव हैं और आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर करेंगें। आपके लिए यह गोचर ज्यादा शुभ नहीं है। ऐसे में भाग्य का साथ नहीं मिलेगा। गुरु की वंदना करते हुए प्रयास करते रहें। अनचाही यात्राएं करनी पड़ सकती हैं।
इस बार गुरु रजत पाद से प्रवेश कर रहा है। जिसके कारण आपको प्रारंभिक संघर्ष देगा और आर्थिक स्थिति को भी खराब करेगा, परंतु रजत पाद से आगमन के कारण उत्तरार्ध्द सामान्य होगा। इस बीच आप स्वयं के बनाये योजना पर उचित शुभ चिंतको से परामर्श अवश्य ले।
- नकारात्मकता को कम करने के लिए नियमित रूप से 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' का 108 बार जप अवश्य करें।
2. वृष -
आपकी राशि से सप्तम भाव में बृहस्पति का गोचर स्वर्ण पाद से हो रहा है, जिसके कारण आपको हर क्षेत्र में सफलता दिलाएगी। जीवनसाथी की ओर से खुशियां मिल सकती हैं। दांपत्य जीवन में मधुरता आएगी। साझेदारी से व्यापार में लाभ होगा। नौकरी, व्यवसाय और पैसों से जुड़े मामलों में सोच-समझकर फैसला लें।
नौकरी व व्यवसाय की दिशा में चतुर्दिक सफलता प्रदान कराएगा। यह याद रखे कि आप की शनि की ढैय्या चल रही है। अतः शनि की सावधानी अवश्य रखें। विदेश से जुड़े कार्यो को करने में बहुत सावधानी रखें। संभव हो सके तो बचने की कोशिश करें।
3. मिथुन -
आप की राशि से छठे भाव मे गुरु का गोचर करेंगें, जो आपके लिए बहुत शुभकर नहीं कहा जाएगा। इस दौरान शत्रु और विरोधी परेशान कर सकते हैं। भाई-बहनों के साथ मतभेद हो सकते हैं। सेहत को लेकर सावधान रहें। कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
रोग, शत्रु, से परेशानी के साथ साथ जातक के चलते हुए कार्यो में अचानक अवरोध का सामना करना पड़ सकता है। वे जातक जिन्हें पाचन से संबंधित समस्या है, उन्हें विशेष सावधान रहना चाहिए। यद्यपि राशि से छठे गुरु का गमन ताम्र पाद से हो रहा है जो कि धनदायी माना जाता है। लेकिन यह फल तभी प्राप्त होगा जब आप कार्य को बहुत सावधानी से करेंगे। नियमित रुप से राम रक्षा स्तोत्र का पाठ परम कल्याणकारी सिद्ध होगा या भगवान विष्णु की आराधना करें।
4. कर्क -
कर्क राशि से पंचम भाव में गुरु गोचर करेंगें। ये मिश्रित फल प्रदान करने वाला कहा जायेगा। घर में कोई नन्हा मेहमान आ सकता है। संतान सुख की प्राप्ति होगी। किसी उच्च अधिकारी की मदद मिल सकती है। अच्छे लोगों की संगत में रहेंगें।
यह मन मे अंतर्द्वंद्व पैदा कर जातक को भटकाने का प्रयास करता है। फलतः जातक कभी कभी किसी भी कीमत पर सफलता प्राप्त करने की तरफ बढ़ने का प्रयास करता है, परंतु सफल नही होता। संतान पक्ष से थोड़ी चिंता मिल सकती है।
यहां यह ध्यान रखें कि उपरोक्त फल मात्र पूर्वार्द्ध में ही प्राप्त होता है, तत्पश्चात गुरु आर्थिक प्रगति प्रदान करने के साथ साथ सभी प्रकार से सफलता प्रदान करता है। अच्छी सफलता हेतु नियमित रूप से विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें।
5. सिंह -
आपकी राशि राशि के चतुर्थ भाव में गुरु का गोचर होगा, जो कि मिश्रित फल प्रदान करने वाला कहा जायेगा। ये गोचर आपके लिए थोड़ा कष्टकारी हो सकता है। मित्रों और रिश्तेदारों के साथ मतभेद की संभावना है। अपमान सहना पड़ सकता है। घर में कोई शुभ कार्य संपन्न हो सकता है।
आपको अपनी वर्तमान स्थिति को बनाये रखने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ेगा। भूमि, भवन से संबंधित कार्य मे बहुत सावधानी रखें, अन्यथा विवाद की स्थिति पैदा होसकती है। माताजी व पत्नी का स्वास्थ्य भी चिंता पैदा कर सकता है। स्थिति को सामान्य बनाने हेतु प्रत्येक बृहस्पतिवार को पीला चावल छू कर दान अवश्य करें।
6. कन्या -
11 अक्टूबर से लगभग 13 माह तक गुरु आपकी राशि से तृतीय भाव में गोचर करेगा। गुरु का यह गोचर निश्चित रूप से आपके संघर्ष को बढ़ाएगा, परंतु संघर्ष के बाद आप के आशा से अधिक सफलता प्रदान करेगा।
व्यापार में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बिजनेस में किसी तरह का निवेश करने से बचें। लापरवाही की वजह से प्रमोशन रूक सकता है। मेहनत और लगन के साथ काम करें।
ताम्र पद से बृहस्पति का आगमन आपके लिए आर्थिक विकास का मार्ग खोलेगा। भाई व बहन से रिश्तों में थोड़ी परेशानी पैदा कर सकता है। उन जातकों को जिनका जन्मकालिक तृतीयेश दुर्बल हैं, उन्हें थायरॉइड अथवा गले से संबंधित अन्य रोग दे सकता है। इससे बचाव हेतु नियमित मृत्युंजय मंत्र का जप अवश्य करें।
7. तुला -
तुला राशि के द्वितीय भाव में गुरु का गोचर होगा। इसका आगमन स्वर्ण पाद से है। अतः सफलता का मार्ग प्रशस्त होगा, नौकरी प्राप्त होने की पूरी संभावना है। पैसों का संचय करेंगें और धन लाभ की भी संभावना है। निवेश कर सकते हैं। जल्दबाजी में कोई निर्णय ना लें। दूसरों को प्रभावित कर पाएंगें। प्रमोशन मिल सकती है।
व्यवसाय के क्षेत्र में भी अपेक्षित सफलता प्राप्त होगी। नए व्यवसाय का रास्ता भी बनेगा। आपको स्वयं तथा परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखना होगा, नहीं तो सफलता आधी रह जायेगी।
8. वृश्चिक -
राशि पर बृहस्पति का परिक्रमण मिला-जुला फल प्रदान करने वाला कहा जायेगा। इस राशि के प्रथम भाव में गोचर होगा। इस दौरान आपको कष्ट सहना पड़ सकता है। चुनौतियां और परेशानियां आ सकती हैं। निवास स्थान बदलने के योग हैं। खर्च अधिक होने की वजह से आपका बजट बिगड़ सकता है।
यदि जन्मकालिक गुरु अकारक अथवा पापाक्रांत अवस्था में है, तो जातक को व्यावसायिक हानि, नौकरी में संकट, आर्थिक व्यय व पत्नी के स्वास्थ्य से संबंधित परेशानी देगा, परंतु यदि जन्मकालिक गुरु कारक अवस्था में हो व बली हो तो निश्चित रूप से आर्थिक, सामाजिक प्रगति प्रदान करने के साथ साथ नया अवसर प्रदान करेगा।
9. धनु -
आपकी राशि का अधिपति भी गुरु है जो कि आपकी राशि से बारहवें भाव मे परिक्रमण करेगा। इस गोचर के दौरान बृहस्पति आपकी राशि से द्वादश भाव में प्रवेश करेगा। मानसिक तनाव बढ़ सकता है। बेवजह तनाव से बचें। धैर्य और संयम रखें। पैसों के लेन-देन में सतर्क रहें। निवेश के लिए सही समय नहीं है।
जो कि आप को शारीरिक, मानसिक तथा आर्थिक कष्ट प्रदान कर सकता है। अतः पूरे बृहस्पति के परिक्रमण काल मे प्रत्येक निर्णय बहुत सोच विचार कर ही लें। जोखिम भरा कोई कार्य न करे। विपरीत गुरु के असर को कम करने के लिएदेवाधिदेव महादेव से यह प्रार्थना नियमित 108 बार करें
- शिव समान दाता नहीं विपत्ति निवारन हार।
परदा मोरी राखियो, वरधा के सवार।।
10. मकर -
आपके अच्छे दिनों की शुरुआत होने जा रही है। लंबे संघर्ष के बाद बृहस्पति आप के लाभ भाव मे गमन करने जा रहा है। मकर राशि के एकादश भाव में गुरु का गोचर होगा। प्रोफेशनल लाइफ में उन्नति मिलेगी। ऑफिस में प्रमोशन मिल सकती है। नया व्यवसाय शुरु कर सकते हैं। संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है।
एकादश भाव का गुरु का गोचर चतुर्दिक विकास प्रदान कराने वाला कहा जायेगा। रोजी रोजगार, यश, प्रसिद्धि, धन दौलत आदि सभी क्षेत्रों में सफलता सुनिश्चित कही जाएगी।
- पूरे साल नशे का सेवन कदापि न करें।
11. कुम्भ -
आपकी राशि से दशम भाव मे बृहस्पति का गोचर सामान्य फलकारी कहा जायेगा। यह ध्यान रखें कि नौकरी में बार बार परिवर्तन कदापि न करें। गुरु आपकी राशि से दशम भाव में गोचर करेंगें। सहकर्मियों से मतभेद हो सकते हैं। सेहत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मानसिक तनाव हावी रहेगा। कड़ी मेहनत और आत्मबल के साथ देर से ही सही लेकिन सफलता जरूर मिलेगी।
विदेश जाने हेतु जातक को मौके खूब मिलेंगे। व्यवसाय करने वाले जातकों को प्रारंभ में थोड़ी समस्या आएगी, लेकिन उत्तरार्द्ध में फल सामान्य प्राप्त होगा।
- हृदय रोग, उच्च रक्तचाप से संबंधित जातको को नियमित रूप से लघु मृत्युंजय मंत्र का जप 108 बार अवश्य करें।
12. मीन -
आपकी राशि का अधिपति ग्रह ही गुरु हैं, जो 11 अक्टूबर से 13 माह तक आपके भाग्य की राशि मे गोचर करेगा। गुरु आपकी राशि से नवम भाव में गोचर करेगा। प्रमोशन और सैलरी में बढ़ोत्तरी हो सकती है। जीवन में खुशहाली आएगी। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी। पिता की सलाह से लाभ हो सकता है।
यह एहसास कराएगा कि प्रत्येक कदम पर भाग्य आपके साथ है। रुका हुआ कार्य संपादित होगा। पूर्व के रुके कार्य सहजता पूर्वक होंगे। शिक्षा, पत्रकारिता, कपड़े से संबंधित कार्य, आयात-निर्यात आदि का कार्य करने वालों के लिए यह समय स्वर्णिम कहा जाएगा।
- उत्तरोतर विकास के लिए श्री विष्णु भगवान दर्शन प्रत्येक गुरुवार को जरूर करें।
Published on:
07 Oct 2018 05:17 pm
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