
भोपाल। मंगलवार से सावन का महीना शुरू हो चुका है। जिस तरह सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, ठीक वैसे ही सावन का महीना भी भोलेनाथ को समर्पित महीना माना जाता है। इस बार का यह सावन महीना अधिमास के कारण खास हो चला है। ऐसे में शिव भक्तों को दो महीने शिव की विशेष पूजा अर्चना का मौका मिलेगा। हिंदू धर्म में माना जाता है कि अगर आप भगवान शिव की कृपा पाना चाहते हैं तो इस महीने में उनकी पूजा-पाठ जरूर करें। सावन के इस महीने में शिव भक्त देश के कोने-कोने में स्थापित शिव मंदिरों में आशीर्वाद लेने पहुंच जाते हैं। वहीं मप्र भी देश का ऐसा राज्य है जिसे शिव नगरी कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यहां शिव के ऐसे अद्भुत मंदिरों की एक लंबी लिस्ट है, जहां दर्शन करना भक्त के लिए सौभाग्य माना जाता है। क्योंकि यहां शिव दर्शन भी सौभाग्य से ही होते हैं। तो अगर आप भी इन अद्भुत मंदिरों में शिव दर्शन करने का मन बना रहे हैं, तो पत्रिका.कॉम आपको बता रहा है मप्र के ऐसे शिव मंदिरों के बारे में जिनके दर्शन करने देश-दुनिया से लोग यहां पहुंचते हैं...
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
उज्जैन को महाकाल की नगरी कहा जाता है क्योंकि यहां भगवान शिव को समर्पित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। इसलिए सावन के महीने में इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में देश-विदेश से भक्तगण भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं। आपको बता दें कि महा शिवरात्रि के दिन, हर साल मंदिर के पास एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है और मंदिर पूरी रात खुला रहता है।
ओंकारेश्वर
खंडवा जिले का ओंकारेश्वर मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना गया है। बता दें कि यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रसिद्ध हिंदू मंदिरों में से एक मंदिर है। सावन के महीने में यहां शिव भक्तों का सैलाब उमड़ता है। यह खंडवा के मांधाता में है। ओंकारेश्वर नर्मदा नदी और नर्मदा की सहायक नदी कावेरी के तट पर स्थापित है।
पशुपतिनाथ मंदिर
मंदसौर का श्री पशुपतिनाथ मंदिर राज्य के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना गया है। यह मंदिर भी भगवान शिव को समर्पित है। आपको बता दें कि यहां भक्त शिव के पशुपतिनाथ रूप की पूजा करने पहुंचते हैं। 5वीं या 6ठी शताब्दी में बने स्थापित इस मंदिर में सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पशुपतिनाथ मंदिर में शिवलिंग पर भगवान शिव के आठ चेहरे चित्रित हैं। गौरतलब है कि शैव धर्म में भगवान शिव के आठ चेहरे आठ पहलुओं के प्रतीक माने गए हैं।
खजुराहो का मतंगेश्वर मंदिर
मतंगेश्वर मंदिर खजुराहो के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। जो भगवान शिव को समर्पित है। बता दें कि यह मंदिर लगभग 1100 साल पहले चंदेल शासन काल में बनाया गया था। मतंगेश्वर मंदिर उत्तर भारत के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक माना गया है। भगवान शिव को समर्पित मतंगेश्वर मंदिर खजुराहो के सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक माना गया है। सावन के महीने में यह क्षेत्र शिवभक्तिमय हो जाता है।
ओंकारेश्वर गौरी सोमनाथ मंदिर
ओंकारेश्वर का गौरी सोमनाथ मंदिर राज्य के सबसे पवित्र मंदिरों में से एक माना गया है। गौरी सोमनाथ मंदिर में shivling छह फीट लंबा है। ये मंदिर तारे के आकार का है। आपको बता दें कि मंदिर में गर्भगृह के बाहर नंदी की मूर्ति और शिव जी के पीछे देवी पार्वती की मूर्ति भी है। सावन के महीने में यह मंदिर भक्तों की श्रद्धा से आबाद रहता है।
ककनमठ मंदिर
मुरैना जिले के सिहौंनिया में ककनमठ का प्राचीन मंदिर है। माना जाता है कि दुनिया का यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां शिव तो हैं लेकिन नंदी नहीं हैं। 11वीं सदी में निर्मित ये मंदिर अद्भुत कला का परिचायक है। लेकिन रात में लोग इस मंदिर में जाने से डरते हैं। यह मंदिर भूतों वाले मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। 120 फीट की ऊंचाई पर बना यह मंदिर केवल शिलाओं से बनाया गया है।
भोजपुर के भोजेश्वर महादेव
मप्र की राजधानी भोपाल के पास रायसेन जिले का भोजपुर शिव मंदिर प्रदेश के सोमनाथ मंदिर के रूप में दुनिया भर में प्रसिद्ध है। 11वीं सदी का यह मंदिर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां के शिवलिंग को एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है, जो एक ही पत्थर से निर्मित है। इस मंदिर को देखने के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ यहां पहुंचती है। खासतौर पर सावन के महीने में मंदिर की वास्तुकला की खूबसूरती देखते बनती हैं। वहीं प्राकृतिक सौंदर्य भी हर किसी को यहां खींच लाता है।
बटेश्वरा के शिवमंदिर
मुरैना जिले में स्थित बटेश्वरा में शिव मंदिरों की एक पूरी शृंखला है। यहां सैकड़ों शिव मंदिर हैं। कहा जाता है कि 11वीं शताब्दी में गुर्जर प्रतिहार राजाओं ने इन मंदिरों का निर्माण करवाया था। बाबा बेटश्वरनाथ धाम में भगवान शिव सेठ और पार्वती सेठानी की मुद्रा में बैठे नजर आते हैं। सावन के महीने में यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यह मंदिर इसलिए भी प्रसिद्ध है कि यहां लोगों की मन्नत पूरी होती है और लोग यहां घंटा चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं।
Updated on:
05 Jul 2023 01:53 pm
Published on:
05 Jul 2023 01:52 pm
