
भोपाल. प्रदेश में पड़ रही कड़ाके की ठंड धड़कनों पर भारी पड़ रही है। गर्मी के दो माह मई-जून में 2306 मामले आए थे लेकिन सिर्फ दिसंबर में ही 3728 केस में मरीजों को अस्पताल ले जाना पड़ा। भोपाल-इंदौर में हार्ट अटैक के मामलों में तो दोगुना वृद्धि हुई। एक्सपर्ट का कहना है कि बदलती लाइफस्टाइल से शहरों में लोग प्रभावित हो रहे हैं।
जेएईएस 108 एंबुलेंस सेवा की रिपोर्ट कहती है दिसंबर में सबसे ज्यादा मामले सागर व रीवा में सामने आए। सागर में 347, रीवा में 294 केस रिपोर्ट किए गए। भोपाल में 108 केस आए। यहां मई में 18, जून में 44, जुलाई में 59 केस आए थे। ठंड में दोगुने हो गए। यही हाल इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर का भी रहा। इंदौर में मई में 10 केस आए थे। जून में 27, जुलाई में 31 को अस्पताल ले जाया गया। दिसंबर में ये मामले बढ़कर 41 हो गए। जो पिछले १० माह में सबसे ज्यादा हैं। जबलपुर में दिसंबर में 201 तो ग्वालियर में 155 मरीजों को अस्पताल ले जाना पड़ा।
छोटे शहरों में दिल ज्यादा जवां
रिपोर्ट के अनुसार छोटे शहरों में कभी हार्ट अटैक के केस दहाई का आंकड़ा से ज्यादा ऊपर नहीं पहुंचे। आगर में जहां मई में 9, जून में 13 और जुलाई में 13 केस सामने आए थे। दिसंबर में भी महज 13 केस ही सामने आए। इसी तरह अलीराजपुर में 15 और झाबुआ में 12 केस ही रिपोर्ट हुए। बुरहानपुर में 10 मामलों में एम्बुलेंस की आवश्यकता पड़ी।
शहरों में देर रात तक जागने और अधिक तनाव से दिल हो रहा कमजोर
डॉ. आदर्श वाजपेयी ने बताया, ठंड का मौसम हार्ट के मरीजों के लिए मुश्किल भरा होता है। जैसे सर्दी बढ़ती है वैसे ही ब्लड प्रेशर बढऩे लगता है। ऐसे में जिनके हार्ट में पहले से ब्लॉकेज होती है वो इस मौसम में हार्ट अटैक या हार्ट फेल्योर के शिकार हो सकते हैं। गांव में लोग जल्दी सो जाते हैं। वे कृषि या व्यवसाय से जुड़े हैं। उनकी जिदंगी ज्यादा तनावभरी नहीं होती। शहरों में देर रात तक जागने व सुबह देर तक सोने की आदत दिल को समय से पहले बूढ़ा बना देती है। तनाव भी एक कारण है।
एलएन मेडिकल कॉलेज के कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. विवेक त्रिपाठी बताते हैं कि मरीज शुरुआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देते। समस्या गंभीर होने पर अस्पताल पहुंचते हैं। क्षमता से अधिक कसरत और शारीरिक गतिविधियां कम होने से भी दिल के मरीज बढ़ रहे हैं।
Published on:
10 Jan 2023 02:25 pm
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