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डीवीआर का प्रिंट नहीं दिया, पेश की टूटी सीडी, जानिए कैसे बरी हो गए मिर्ची बाबा

भोपाल कोर्ट ने वैराग्यानंद गिरी यानि मिर्ची बाबा को रेप केस में बरी कर दिया है। पीड़ित महिला ने कोर्ट में आरोपी बाबा को पहचानने से ही इंकार कर दिया जिसके आधार पर करीब 12 महीने तक जेल में रहे मिर्ची बाबा बाहर आ गए। पीड़िता की शिकायत के बाद मेडिकल में महिला से रेप की पुष्टि हुई थी। डीएनए रिपोर्ट भी महिला के पक्ष में थी इसके बावजूद मिर्ची बाबा छूट गया। दरअसल इस केस में पुलिस की भी जबर्दस्त लापरवाही सामने आई है।

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वैराग्यानंद गिरी यानि मिर्ची बाबा

भोपाल कोर्ट ने वैराग्यानंद गिरी यानि मिर्ची बाबा को रेप केस में बरी कर दिया है। पीड़ित महिला ने कोर्ट में आरोपी बाबा को पहचानने से ही इंकार कर दिया जिसके आधार पर करीब 12 महीने तक जेल में रहे मिर्ची बाबा बाहर आ गए। पीड़िता की शिकायत के बाद मेडिकल में महिला से रेप की पुष्टि हुई थी। डीएनए रिपोर्ट भी महिला के पक्ष में थी इसके बावजूद मिर्ची बाबा छूट गया। दरअसल इस केस में पुलिस की भी जबर्दस्त लापरवाही सामने आई है।

ग्वालियर के जरेडुआ डेम आश्रम के स्वामी वैराग्यानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा को पिछले साल अगस्त में ग्वालियर से गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ भोपाल में रायसेन की एक महिला ने दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। महिला ने शिकायत में कहा कि मिर्ची बाबा ने मिनाल रेसिडेंसी में एक कमरे में उससे दुष्कर्म किया।

महिला की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज किया और जांच शुरु की। पुलिस ने सन 2022 में नवंबर में चालान पेश किया और भोपाल की अपर सत्र न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर की कोर्ट में सुनवाई शुरु हो गई। कोर्ट ने 6 सितंबर 2023 को फैसला सुनाते हुए इस मामले में मिर्ची बाबा को बरी कर दिया।

पीड़िता की शिकायत के बाद महिला का मेडिकल परीक्षण कराया गया था जिसमें रेप की पुष्टि हुई थी। मिनाल रेसिडेंसी से मिर्ची बाबा के कमरे से चादर, गमछा, भभूत और साबूदाना जैसी गोलियां भी जब्त की गई थी। डीएनए के लिए मिर्ची बाबा का खून का सैम्पल भी लिया गया।

बाबा के कमरे से जब्त चादर पर सीमन मिले थे। डीएनए मैच कराने पर ये पीड़िता और मिर्ची बाबा के ही निकले थे। इसके बावजूद मिर्ची बाबा बरी हो गया क्योंकि पीड़िता अपने बयान से पलट गई। उसने मिर्ची बाबा की पहचानने से ही इनकार कर दिया।

इस मामले में पुलिस ने गंभीर लापरवाहियां की। पुलिस ने आरोपी का नाम मिर्ची बाबा की जगह सोनी वैरागी लिख दिया था। महिला की एमएलसी रिपोर्ट में किसी डॉक्टर का मत ही नहीं दिया गया। पुलिस की जांच इसलिए भी संदेह के घेरे में है क्योंकि उसने कोर्ट में बंद लिफाफे में टूटी सीडी पेश की। इतना ही नहीं, सीडी बनाने से पहले जो प्रमाण पत्र बनवाना होता है, पुलिस ने उसे भी नहीं बनवाया।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि पुलिस ने बाबा के मकान से जब्त डीवीआर के प्रिंट भी कोर्ट में पेश नहीं किए न ही इसकी सीडी बनवाई। घटनास्थल के डीवीआर और सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग मिर्ची बाबा के खिलाफ सबसे अहम साक्ष्य हो सकते थे पर पुलिस ने इनका प्रिंटआउट ही पेश नहीं किया। जबकि पुलिस ने घटनास्थल से डीवीआर जब्त किया था।

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