1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकार ने दी 52 एकड़ जमीन, एमपी के इस शहर में बढ़ेगा ‘बिजली उत्पादन’

MP News: रिसर्च सेंटर में अत्याधुनिक लैब्स, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और इंडस्ट्री-कॉलैबोरेशन की भी सुविधा होगी।

less than 1 minute read
Google source verification
(फोटो सोर्स: पत्रिका)

(फोटो सोर्स: पत्रिका)

MP News: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइसर) अब नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्वस्तरीय अनुसंधान का केंद्र बनने जा रहा है। संस्थान को हाल ही में सरकार द्वारा 52 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जहां एक अत्याधुनिक रिसर्च सेंटर की स्थापना की जाएगी। इस सेंटर में सोलर, विंड, हाइड्रो और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते हुए ऊर्जा स्रोतों पर इनोवेटिव और इंटरडिसिप्लिनरी शोध को प्रोत्साहन मिलेगा।

रिसर्च सेंटर में अत्याधुनिक लैब्स, टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म और इंडस्ट्री-कॉलैबोरेशन की भी सुविधा होगी। आइसर के निदेशक प्रोफेसर गोवर्धन दास ने बताया कि यह स्वदेशी तकनीक के विकास, उद्योग-शिक्षा सहयोग और तकनीकी विशेषज्ञों के प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। पहल से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

बढ़ेगा सोलर एनर्जी उत्पादन

इस ऊर्जा केंद्र के तैयार होने से सोलर, विंड, हाइड्रो और ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी समेत सभी प्रकार की रिन्यूएबल एनर्जी पर नए शोध संभव होंगे। अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान में मप्र में 7 हजार मेगावाट सोलर एनर्जी का उत्पादन हो रहा है। राज्य सरकार की सोलर के जरिए 13 से 14 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता और बढ़ाने की तैयारी है।

स्थानीय युवाओं को भी मिलेगा लाभ

प्रो. दास ने बताया कि इससे न केवल वैज्ञानिक समुदाय को लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए भी रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर खुलेंगे। यह अनुसंधान केंद्र भारत और विश्व के अग्रणी संस्थानों के बीच सहयोग को भी नई ऊंचाई देगा।