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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अकेले शिवराज, हर दिन कर रहे 10 रैलियां

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अकेले शिवराज, हर दिन कर रहे 10 रैलियां
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भोपाल

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Shailendra Tiwari

•

Updated: 19 Nov 2018, 12:43 PM IST

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अकेले शिवराज, हर दिन कर रहे 10 रैलियां

भोपाल. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 28 नवंबर को वोटिंग होनी है। चुनाव के लिए दोनों ही दल के नेता प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं। भाजपा की तरफ से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कमान संभाल ली है। तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बीते दो महीनों से चुनावी दौरे में लगे हैं। प्रदेश में आचार संहिता लगने से पहले शिवराज सिंह चौहान जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे थे तो अब हर विधानसभा क्षेत्र में पहुंचकर भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में रैलियों को संबोधित कर रहे हैं। पीएम नरेन्द्र मोदी प्रदेश के चुनाव के लिए केवल 10 रैलियां करेंगे वहीं, सीएम शिवराज सिंह चौहान हर दिन 10 रैलियों को संबोधित कर रहे हैं। लेकिन इन सब के बीच एक एक सवाल है कि आखिर पीएम मोदी की रैलियां कम क्यों ? क्या शिवराज सिंह चौहान ही मध्यप्रदेश में भाजपा के सबसे बड़े फैक्टर हैं या फिर एक बार फिर से पीएम मोदी का फैक्टर अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगा।


मोदी फैक्टर या शिवराज, किसका असर?: शिवराज सिंह चौहान 2005 से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री है। ऐसे में यह चुनाव शिवराज सिंह के ईर्द-गिर्द घूम रहा है औऱ भाजपा ने एक बार फिर से शिवराज सिंह चौहान को मध्यप्रदेश के सीएम के के रूप में पेश किया है। मध्यप्रदेश में मोदी का फैक्टर काम करेगा या फिर शिवराज का इस पर जानकारों का मानाना है कि मध्यप्रदेश में मोदी फैक्टर निर्णायक नहीं होगा। 2013 के मुकाबले में 2018 के चुनाव भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। यहां इसबार चुनाव शिवराज सिह चौहान और बदलाव के बीच लड़ा जा रहा है। शिवराज सिंह चौहान जहां भाजपा सरकार की तारीफ कर रहे हैं वहीं कांग्रेस वक्त है बदलाव का नारा दे रही है। मोदी की मध्यप्रदेश में कम रैलियों को देखते हुए भाजपा का दावा है कि मोदी अपनी 10 चुनावी रैलियों के माध्यम से करीब 200 विधानसभा सीटों को कवर करेंगे। इसके बाद भी एक सवाल है कि क्या मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान ही सबसे बड़े नेता हैं क्योंकि अन्य क्षेत्रीय नेता विधानसभा चुनावों में सक्रिय नहीं दिख रहे हैं।

अन्य राज्यों से कम हैं मोदी की रैलियां: प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने देश के हर चुनावी राज्य में रैलियों को संबोधित किया है। 2018 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भी मोदी रैलियों को संबोधित कर रहे है लेकिन अन्य राज्यों की तुलना में मोदी की रैलियां मध्यप्रदेश में बहुत कम हैं। मोदी की रैलियां कम होन का एक कारण 2019 के लोकसभा चुनाव भी हैं। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद देश में आम चुनाव प्रस्तावित हैं ऐसे में भाजपा मोदी की लोकप्रियता में कोई गिरावट नहीं चाहती है। अगर चुनाव के परिणा भाजपा के अनुकूल नहीं हुए तो मोदी की लोकप्रियता पर भी सवाल खड़ें होंगे। क्योंकि लोकसभा चुनाव में मोदी देशभर में रैलियां करेंगे। वहीं, अन्य राज्यों की अपेक्षा मध्यप्रदेश में मोदी की रैलियों की तुलना करें तो यहां मोदी की रैलियां काफी कम हैं। अन्य राज्यों में आचार संहिता लगने के बाद मोदी की रैलियां का विवरण इस प्रकार है।

मोदी ने अपने गृहराज्य गुजरात में 34 चुनावी रैलियों को संबोधित किया था।
कर्नाटक में मोदी ने 21 चुनावी रैलियों को संबोधित किया।
महाराष्ट्र में 27 चुनावी सभाओं को संबोधित किया था।
हरियाणा में 11 रैलियां पीएम मोदी के लिए आयोजित की गई थीं।
झारखंड में मोदी ने 14 चुनावी सभाओं को संबोधित किया था।
बिहार में पीएम मोदी ने 32 चुनावी सभाएं की थीं।
उत्तर प्रदेश 24 रैलियों को संबोधित किया था।


शिवराज स्थानीय तो मोदी नेशनल मुद्दों पर कर रहे हैं चर्चा : शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता मध्यप्रदेश में बरकारार है या नहीं इसका फैसला ११ दिसंबर को होगा लेकिन एक बात तय है। मोदी औऱ शिवराज दोनों ही नेता अपने-अपने तरीके से मध्यप्रदेश में कांग्रेस को घेरने के लिे रमनीति बना रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान जहां स्थानीय मुद्दों पर जोर दे रहे हैं वहीं, नरेन्द्र मोदी अपने भाषणों में नेशनल मुद्दों पर कांग्रेस को घेर रहे हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मध्यप्रदेश का विधानसभा चुनाव शिवराज सिंह की जिम्मेदारी है। यही कारण है कि शिवराज सिंह चौहान अक्सर रैलियों में पहले शिवराज सरकार का नाम लेते हैं फिर भाजपा सरकार का का। शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि शिवराज सिंह चौहान ने ऐसा कर दिया, बाद में यह कहते हैं कि भाजपा सरकार ने ऐसा कर दिया।

लोकसभा चुनाव भी है कारण: जानकारों का कहना है कि केन्द्रीय नेतृत्व ने सीएम शिवराज सिंह चौहान की लोकप्रियता को देखते हुए मध्यप्रदेश में उन्हें फ्री हैंड कर दिया है। क्योंकि माना जा रहा है कि जब लोकसभा चुनाव होंगे उस दौरान पीएम मोदी और अमित शाह की ही रणनीति पर अमल होगा इसलिए लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा किसी भी तरह से पीएम मोदी की लोकप्रियता पर कोई कमी नहीं चाहती है। एक देखने वाली बात यह भी है कि मोदी दिग्गजों के गढ़ में ही चुनावी सभाओं को संबोधित कर रहे हैं।