
Kakkaji warns on India US Free Trade Agreement Sparks farmers Protest (फोटो सोर्स: सोशल मीडिया)
India US FTA: भारत सरकार अमरीका से मुक्त व्यापार समझौता (India US FTA) कर रही है। यदि समझौता होता है तो यह हमारे किसानों को बर्बाद कर देगा। हमारे पास पर्याप्त खाद्यान्न होने के बावजूद हम अमरीका से खरीदने के लिए बाध्य हो जाएंगे। इससे कीमतें गिरेंगी जिससे किसानों को नुकसान होगा। सरकार को अमरीका के साथ समझौता रोककर अन्य 20 देशों के साथ किए गए मुक्त व्यापार समझौते निरस्त करने चाहिए। सरकार ऐसा नहीं करती है तो किसान बड़ा आंदोलन करेंगे। किसानों से संबंधित कानून, योजनाएं इत्यादि पर किसानों को भरोसे में लिया जाना चाहिए। यह बात राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा (कक्काजी) ने कही।
उन्होंने बताया कि अमरीका की भारी सब्सिडी वाले उत्पादों के आने से घरेलू कृषि उत्पादों की कीमतें गिरेंगी। भारी सब्सिडी, कानूनी दबाव और शिकारी व्यापार नीतियों से लैस अमरीका निर्यात जैसे दूध, गेहूं, कपास, फल, मेवे, दालें, चिकन और रबर करोड़ों भारतीय किसानों की आजीविका को खत्म कर देंगे। ग्रामीण परिवारों को कर्ज में धकेल देंगे। भारत की खाद्य संप्रभुता को खतरे में डाल देंगे। अमरीका के डेयरी उत्पाद जैसे चीज से धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं भी प्रभावित होंगी। अमरीका के चीज में अक्सर बछड़े की आंतों से निकले रैनेट का उपयोग किया जाता है।
कक्काजी ने बताया कि सरकार ने मूंग खरीदी शुरू की है, लेकिन अभी प्रभावशाली लोगों की मूंग ही खरीदी जा रही है। मध्यप्रदेश नकली खाद-बीज व कीटनाशक का हब बन गया है। किसानों को किसी भी जिले में डीएपी खाद की एक बोरी तक नहीं मिली। कलेक्टर इतने बेलगाम हो गए हैं कि सरकार के फैसले के बावजूद जिलों में गो अभयारण्य के लिए जमीन नहीं दे रहे। भूमि अधिग्रहण के जरिए सरकार किसानों की जमीन हड़पने का काम कर रही है। सीमांकन, बंटान, नामांतरण और बंटवारा में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है।
भारत सरकार का अमरीका के साथ मुक्त व्यापार समझौता एक ऐसा प्रस्तावित समझौता है, जिसमें दोनों देश एक-दूसरे के साथ व्यापार को और आसान बनाने कि दिशा पर विचार कर रहे हैं। इस समझौते का उद्देश्य आयात-निर्यात पर लगने वाले शुल्क (TAX) को कम किए जाए या हटाए जाए है, ताकि दोनों देशों की कंपनियों को व्यापार में सुविधा हो सके।
1. कृषि उत्पादों पर टैक्स में राहत
अमरिका चाहता है कि भारत दालें, गेहूं, चना, सोया, और जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें (GM Crops) जैसे कृषि उत्पादों पर लगने वाले भारी टैक्स को कम करें या हटा दें।
2. दूध और डेयरी सेक्टर में एंट्री
अमरिका चाहता है कि उसकी डेयरी कंपनियां भी भारत में आसानी से उत्पाद बेच सकें, लेकिन भारत इसे किसानों के लिए नुकसानदायक मान रहा है।
3. स्टील और एल्यूमिनियम पर टैक्स में छूट
वहीं भारत चाहता है कि अमरीका उसके उत्पाद स्टील और एल्यूमिनियम पर लगाए गए टैक्स हटाए ताकि, भारत से ये सामान आसानी से निर्यात किया जा सके।
4. डिजिटल व्यापार (Digital Trade):
अमरीका चाहता है कि भारत डाटा लोकलाइजेशन (Data Localization) की नीति में ढील दे, यानी विदेशी कंपनियां भारतीय यूजर डाटा को विदेश में भी स्टोर कर सकें।
समझौता तीन चरणों में किया जाना प्रस्तावित
अंतरिम समझौता (Interim Deal)
यह पूरा समझौता भारत और अमरीका तीन चरणों में करना पूरा करना चाहते हैं-
पहले चरण में एक अंतरिम डील जुलाई 2025 से पहले लाने की योजना है। इसके तहत कुछ खास चीजों जैसे, स्टील एल्यूमिनियम, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज, बादाम और सेब जैसे सेक्टर शामिल हो सकते हैं। कृषि और डेयरी सेक्टर को फिलहाल इस चरण में शामिल नहीं किया जाए, क्योंकि किसान इसका विरोध कर रहे हैं।
दूसरे चरण का समझौता तब होगा, जब पहले चरण के नतीजे सकारात्मक नजर आएंगे। इसके तहत डिजिटल बिजनेस, ई-कॉमर्स, सेवा क्षेत्र और निवेश जैसे मुद्दे जुड़ सकते हैं।
भारत और पाक के बीच खाद्य समझौता का ये आखिरी चरण होगा। इसमें कृषि, GM फसलें, बौद्धिक संपदा (IPR) और विवाद समाधान जैसे विवादित मुद्दे शामिल किए जाएंगे। इस समझौते का यही वो हिस्सा है जिसका किसान और सामाजिक संगठन विरोध कर रहे हैं।
कुल मिलाकर भारत सरकार चाहती है कि पहले चरण के तहत कम टकराव वाले सेक्टर्स से शुरुआत की जाए। फिर धीरे-धीरे उन संवेदनशील सेक्टर को आगे बढ़ाया जाए, जिनका विरोध हो सकता है।
किसानों का कहना है कि अगर अमेरिका से सस्ता गेहूं, चना, दूध या GM फसलें भारत में आने लगीं, तो देशी किसान बाजार से बाहर हो जाएंगे। शिवकुमार शर्मा 'कक्काजी' जैसे किसान नेताओं का कहना है कि ये समझौता भारतीय कृषि पर सीधा हमला होगा।
Updated on:
26 Jun 2025 02:49 pm
Published on:
26 Jun 2025 11:48 am
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