1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Ganesh Chaturthi: जानिए क्यों हर शुभ काम की शुरूआत भगवान गणेश से की जाती है , क्यों सबसे पहले लिखते हैं ‘श्री गणेशाय नम:’

भगवान शिव ने एक योजना बनाई और प्रतियोगिता का आयोजन किया......

2 min read
Google source verification
photo1631257829.jpeg

Ganesh Chaturthi

भोपाल। हिंदू धर्म में भगवान गणेश की पूजा सबसे प्रथम देव के रूप में होती है. किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा अर्चना होती है. मान्यता है कि बप्पा अपने भक्तों के सभी दुखों के दूर करते हैं इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है. हर साल भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। किसी भी पूजा, आराधना, अनुष्ठान में सबसे पहले भगवान गणेश को पूजा जाता है। पंडित किसी भी काम का शुभारंभ करते समय सर्वप्रथम श्रीगणेशाय नम: लिखते हैं. यानी हर अच्छे काम की शुरूआत भगवान गणेश का नाम लेकर ही की जाती है. लेकिन ऐसा क्यों?

एक प्रचलित कथा के मुताबिक, सभी देवताओं में एक बार इस बात को लेकर विवाद हुआ कि सबसे पहले किस भगवान की पूजा की जानी चाहिए। सभी देवताओं के अपने महत्व और कार्य हैं। सभी भगवानों के बीच चर्चा हुई और हर कोई खुद को सर्वश्रेष्ठ बताने लगे। तभी नारद मुनी प्रकट हुए और उन्होंने देवताओं को भगवान शिव के पास जाने के लिए कहा। सभी की बात सुनकर शिवजी ने कहा जो भी देवता इस पूरे ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर सबसे पहले आएगा वही सर्वप्रथम पूजनीय माना जाएगा।

सभी देवता अपने-अपने वाहनों पर सवार हो कर ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने निकल गए। गणेश जी ने भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। सभी देवी-देवता जब ब्रह्माण्ड के चक्कर लगा रहे थे तभी गणेश जी को एक तरकीब सूझी और उन्होंने अपने माता-पिता के सात चक्कर लगा लिए। सभी देवगण ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाकर जब तक भगवान शिव-पार्वती के पास पहुंचे, तब तक गणेश जी प्रतियोगिता जीत चुके थे।

सभी देवता और गणेश जी के भाई कार्तिक अचंभित हो गए। तब शिवजी ने कहा, इस संसार में माता-पिता को समस्त ब्रह्माण्ड और लोक में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। माता के चरणों में ही समस्त संसार का वास होता है। इस कारण से गणेश जी ने अपने माता-पिता का ही चक्कर लगाया और इस प्रतियोगिता में जीत गए। इस प्रकार से सबसे पहले भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है।

क्यों सबसे पहले लिखते हैं 'श्री गणेशाय नम:'

गण शब्द व्याकरण में भी आता है। अक्षरों को गण कहा जाता है। अक्षरों के ईश यानी देवता होने के कारण भी गजानन को गणेश कहा जाता है। छन्द शास्त्र में मगण, नगण, भगण, यगण, जगण, रगण, सगण, तगण ये आठ तरह के गण होते हैं। इनके अधिष्ठात्र देवता होने के कारण इन्हें गणेश कहा जाता है। इसलिए लेखन, कविता, विद्या आरंभ के समय गणेशजी को सबसे पहले पूजा जाता है। बही खातों से लेकर, चिट्ठी आमंत्रण पत्रिकाओं में सबसे पहले श्री गणेशाय नमः लिखा जाता है, ताकि लेखन में कोई गलती न हो।