
labour law amendment bill advance strike notice compulsory mp vidhan sabha monsoon session (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
labour law amendment bill: प्रदेश में अब लोक उपयोगी सेवाओं के साथ फैक्ट्रियों में हड़ताल या तालाबंदी करने के लिए प्रबंधन को कम से कम डेढ़ माह पहले सूचना देना अनिवार्य होगा। इससे प्रबंधन को संबंधित मुद्दों को हल करने और उचित कदम उठाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। ठेकेदारी का लाइसेंस लेने या पंजीयन कराने के लिए न्यूनतम नियोजित श्रमिकों की संख्या 20 से बढ़ाकर 50 की जाएगी। (advance strike notice)
यह प्रावधान मप्र श्रम विधियां संशोधन-प्रकीर्ण उपबंध विधेयक 2025 में किए गए हैं। इसे गुरुवार को विधानसभा ने मंजूरी दे दी। कांग्रेस विधायकों ने इसे मजदूरों का शोषण बढ़ाने वाला बता विरोध किया। इसमें संशोधन प्रस्ताव भी लाया गया, पर मतदान के बाद विधेयक पारित हो गया। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया और जमकर नारेबाजी की। (mp vidhan sabha monsoon session)
कांग्रेस नेताओं ने कहा, इस विधेयक से मजदूरों का हड़ताल और आंदोलन करने का अधिकार छीन जाएगा। वहीं श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि यह संशोधन विधेयक श्रमिकों के हित में है। सरकार श्रमिकों के हितों का संरक्षण करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत छोटी विनिर्माण इकाइयों को कारखाना अधिनियम के उपबंधों से राहत देने के लिए इसके तहत नियोजित श्रमिकों की संख्या बढ़ाई जा रही है। कारखाना अधिनियम के तहत निर्माण इकाई के पंजीयन के लिए अब मशीनों से उत्पादन होने की स्थिति में नियोजित श्रमिकों की संख्या 10 से बढ़ाकर 20 और बिना मशीन के उत्पादन होता है वहां 20 से बढ़ाकर 40 की जा रही है।
कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने कहा, संशोधन छोटी संस्था के कामगारों के हित में नहीं है। एक ओर सरकार निवेश बढ़ाकर रोजगार को बढ़ावा दे रही है। वहीं श्रमिकों का नुकसान कर रही है। विधायक दिनेश जैन बोस ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारी का ठेका प्रणाली से भारी शोषण होता है। कंप्यूटर ऑपरेटर को सरकार क्ञस् 13 हजार भुगतान करती है, पर उन्हें 12-13 हजार रुपए मिलते हैं। बिचौलिए पैसे खा जाते हैं। सीधे आउटसोर्स कर्मी के खाते में रुपए डालने की व्यवस्था होनी चाहिए।
विधानसभा में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने मप्र माल और सेवा कर संशोधन विधेयक 2025 पेश किया। इसमें विशेष आर्थिक जोन, मुक्त व्यापार, भंडारण क्षेत्र में माल आपूर्ति को जीएसटी विधान में सप्लाय की श्रेणी से बाहर किया। इसमें जब तक माल की निकासी निर्यात के लिए न हो, करदाता इस जोन में बिना कर दिए आपस में कारोबार कर सकेंगे।
Published on:
01 Aug 2025 08:59 am
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