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Land pooling act : प्राधिकरणों को मिलेगी संजीवनी, नये कानून से खत्म होगा संकट

Land pooling act: गुजरात की तरह लैंड पूलिंग एक्ट लाने की तैयारी, जमीन अधिग्रहण महंगा होने से प्राधिकरणों पर छाया संकट

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Land pooling act

हरीश दिवेकर, भोपाल. प्रदेश में विकास प्राधिकरणों को संजीवनी देने के लिए गुजरात की तरह लैंड पूलिंग एक्ट लाने की तैयारी है। अभी भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 लागू होने के बाद से विकास प्राधिकरणों पर संकट छाया हुआ है। आवासीय सहित अन्य योजना लाने के लिए किसानों से जमीनें लेने में समस्या आ रही है। इससे कई प्राधिकरणों में ताला डलने की स्थिति बनती दिख रही है।

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नया कानून आने के बाद किसानों को उनकी जमीन के बदले में 60 प्रतिशत विकसित जमीन मिल सकेगी। वहीं, प्राधिकरण पैसा खर्च किए बगैर नई आवासीय और व्यावसायिक योजना लॉन्च कर सकेंगे। इसमें किसानों को भी फायदा होगा। वे अपने हिस्से की विकसित जमीन को बेच सकेंगे।

बीघा में प्लॉट होंगे डवलप

गुजरात की तर्ज पर की जाने वाली लैंड पुलिंग में एक बीघा या चार बीघा का ही एक प्लॉट होगा। इसका फायदा यह होगा कि बड़े प्लॉट पर बड़े प्रोजेक्ट आ सकेंगे। इन पर मल्टी, रो-हाउस, शॉपिंग मॉल व एचआइजी श्रेणी के बंगले बनाए जा सकेंगे। यहां की सड़कें भी 20 मीटर या उससे ज्यादा चौड़ी रहेंगी। गार्डन भी बड़े रखे जाएंगे।


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ऐसे समझें पूरा मामला

मास्टर प्लान में प्रस्तावित चौड़ी सड़कें जमीन, सार्वजनिक पार्किंग सहित अन्य विकास कार्य न अटकें, इसके लिए इसके लिए राज्य सरकार गुजरात की तर्ज पर लैंड पूलिंग स्कीम ला रही है। भू-स्वामी से ली गई जमीन के बदले अधिकतम 60 प्रतिशत तक विकसित जमीन देने का प्रावधान स्कीम के तहत है।

कॉलोनियां होंगी विकसित

कॉलोनियों में 60% किसान और 40% जमीन विकास प्राधिकरण की होगी। लैंड पूलिंग की कार्रवाई केवल नगरीय क्षेत्रों में मास्टर प्लान के हिसाब से बसावट व विस्तार तथा ग्रीन फील्ड विकास के तहत हरी-भरी कॉलोनियां बसाने के लिए ही किया जा सकेगा।

शहरों का व्यवस्थित विकास समय पर हो सके, इसके लिए जमीन अधिग्रहण जैसी जटिल प्रक्रिया से बचने के लिए लैंड पुलिंग एक्ट लाने की तैयारी की जा रही है। इसके लागू होने से मास्टर प्लान की प्रस्तावित सड़कों के साथ विकास कार्यों में तेजी आएगी।
- संजय दुबे, पीएस, नगरीय विकास एवं प्रशासन विभाग

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लैंड पुलिंग स्कीम?
किसी बसावट में सरकारी एजेंसी या निजी विकासकर्ता जितने भी लोगों की जमीन लेंगे, वह सहमति से ली जाएगी। जिन भूखंडों के लिए सहमति नहीं बनेगी, वहां लैंड एक्ट के तहत जमीन लेकर उसका मुआवजा दिया जाएगा। सहमति से जमीन सरेंडर करने पर लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन क्लब मानी जाएगी।

ये है प्रस्तावित एक्ट में
किसी स्कीम में 10 लोगों की जमीन ली जा रही है। ऐसे में भले ही किसी के भूखंड पर पार्क विकसित हो और दूसरे व्यक्ति की जमीन के थोड़े हिस्से से सड़क निकाली जा रही हो, लेकिन योजना में कुल सुविधाएं विकसित करने के लिए जितनी जमीन काम में ली जाएगी, उसे सभी 10 भूखंडों मालिकों का समान हिस्सा मानते हुए लैंड पूलिंग मानी जाएगी।