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एमपी में महज 8775 के कर्ज पर नीलाम कर दी करोड़ों की 10 एकड़ जमीन

Lokayukta Court : सहकारिता विभाग के दो अधिकारियों को सुनाई सजा, भ्रष्टाचार पर शिकंजा, लोकायुक्त कोर्ट का अहम फैसला
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भोपाल

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deepak deewan

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Updated: 2 Sep 2026, 9:35 AM IST

किसान की करोड़ों की जमीन एक लाख में नीलाम कर दी

किसान की करोड़ों की जमीन एक लाख में नीलाम कर दी - Demo Pic- Source AI Grok

Bank Loan : देश में एक ओर जहां अरबों के बैंक लोन माफ किए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों को महज हजारों रुपए के कर्ज के लिए परेशान किया जा रहा है। एमपी के सहकारिता विभाग ने तो सारी हदें तोड़ दी। अधिकारियों ने महज 8775 रुपए के लिए गए कर्ज के बदले एक किसान की 10.31 एकड़ जमीन नीलाम करवा दी। विभाग के दो अधिकारियों को अब लोकायुक्त की विशेष अदालत ने तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है।

नियमों का उल्लंघन कर किसान की जमीन को कम कीमत में नीलाम कर पद का दुरुपयोग किया

विशेष लोक अभियोजक हेमलता कुशवाह ने बताया, 29 अगस्त 2026 को विशेष न्यायालय के न्यायाधीश मनोज कुमार की कोर्ट ने जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक के विक्रय अधिकारी विजेंद्र कुमार कौशल और सहकारिता विभाग के उप पंजीयक अशोक मिश्रा को दोषी माना है। इन दोनों ने नियमों का उल्लंघन कर किसान की जमीन को कम कीमत में नीलाम कर पद का दुरुपयोग किया था। पीडि़त किसान की शिकायत पर आरोपियों पर धोखाधड़ी, षडयंत्र रचने और फर्जी दस्तावेज बनाने सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था। दोनों पर अर्थदंड भी अधिरोपित किया गया है।

करोड़ों की जमीन की एक लाख में नीलामी

विशेष लोक अभियोजक ने पैरवी करते हुए कोर्ट को बताया, यह केस ग्राम चंदेरी छावनी तहसील हुजूर का है। किसान रिफाकत बी ने साल 1974 में अपनी कृषि भूमि बंधक रखकर पंप और कुएं के लिए 8,775 रुपए का कर्ज लिया था।

आरोप था कि अधिकारियों ने किसान की 10.31 एकड़ जमीन को 5 नवंबर 2004 को केवल 1.03 लाख रुपए में सौरभ मेटल प्राइवेट लिमिटेड को नीलाम कर दिया। वहीं नीलामी में नियमों का पालन नहीं किया गया और जमीन का मूल्य बाजार भाव व कलेक्टर द्वारा निर्धारित मूल्य से काफी कम रखा गया। नीलामी से जुड़े दस्तावेज और नोट शीट तैयार कर पुष्टि के लिए भेजे गए। बाद में नीलामी की पुष्टि भी कर दी गई।

लोकायुक्त ने की जांच:

अभियोजक के अनुसार, शिकायत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने जांच कर केस दर्ज किया और विवेचना के बाद कोर्ट में चालान पेश किया। अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।