
भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती-2018 के रिजल्ट आने के बाद से बार-बार संशोधन कर कई वर्गों के शिक्षकों को नियुक्ति दी जा रही है, लेकिन दिव्यांग वर्ग के कई शिक्षकों को अब तक नियुक्ति का कोई मौका नहीं दिया गया। इन दिव्यांग शिक्षकों ने शिवराज सरकार से अपील की है कि प्रमाण पत्र के अभाव में और बाद में दिव्यांग हुए शिक्षकों को भी द्वितीय काउंसलिंग में शामिल करने का मौका दें। चलने-फिरने में असहज यह दिव्यांग इन दिनों शिक्षक स्कूल शिक्षा विभाग, डीपीआई, मंत्रालय और मंत्रियों के बंगले के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
मप्र शिक्षक भर्ती 2018 के रिजल्ट के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने कई बार संशोधन किए, जिसमें डबल डिग्री को मान्य कर दिया, एलाइड विषय, वैधता में वृद्धि कर दी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 90 की जगह 75 अंक में पात्र मान लिया गया। लेकिन, प्रदेश के दिव्यांग टीचर भी अपने लिए संशोधन का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उन्हें भी द्वितीय काउंसलिंग के जरिए नियुक्ति मिल जाए।
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दिव्यांग शिक्षकों ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र क्रमांक PA/आयुक्त/4UCR/81/2022 दिनांक 29/09/2022 को जारी किए गए विज्ञापन में ईडब्ल्यूएस वर्ग को 30 सितम्बर से 10 अक्टूबर 2022 तक हा या नहीं में विकल्प भरने का मौका दिया गया, वहीं प्रमाण-पत्र को भी अपलोड करने का आदेश दिया गया। दिव्यांगों का कहना है कि नियमों में कई बार संशोघन कर कई वर्गों को नियुक्ति देकर स्कूल शिक्षा विभाग ने सराहनीय कार्य किया है, जिससे हजारों शिक्षकों को नियुक्ति मिलने जा रही है। इसी प्रकार दिव्यांगों को भी पोर्टल में संशोधन करके नियुक्ति का मौका दिया जाना चाहिए।
मंत्रालय ने दिया था ऐसा आदेश
खंडवा जिले के पुनासा तहसील के नर्मदानगर के एक दिव्यांग शिक्षक वैभव चौहान पुत्र दगड़ूलाल चौहान ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को आवेदन दिया था। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल शिक्षा विभाग के अपर सचिव संजय गोयल की ओर से पत्र क्रमांक 811/2291/2022/20-01 के जरिए आदेश जारी कर दिव्यांग शिक्षकों को विकलांग सर्टिफिकेट प्रस्तुत कर द्वितीय काउंसलिंग में शामिल करने की कार्यवाही करने को कहा गया था। लेकिन, मंत्रालय के आदेश के बाद भी दिव्यांगों के विषय में कोई फैसला नहीं हुआ।
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दिव्यांग शिक्षकों ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की है कि उन्हें भी एक संशोधन के जरिए नियुक्ति दी जाना चाहिए। जो शिक्षक भर्ती के ऐसे आवेदक जिन्होंने पात्रता परीक्षा के समय दिव्यांग प्रमाण-पत्र नहीं लगाया या बाद में दिव्यांग हो गए। 4 वर्ष के अंतराल के बाद हुए कई संशोधन को संज्ञान में लेते हुए वंचित दिव्यांग वर्ग के लिए भी पोर्टल पर लिंक खोलकर विकलांगता में 'हा या नहीं' का विकल्प भरने का मौका देना चाहिए।
अधर में है इनका भविष्य
छिंदवाड़ा के सुंदर पटेल, कौशल सिंह, सतीश कुमार, रोहित तिवारी भी ऐसे दिव्यांगों में शामिल हैं, जो अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। इन शिक्षकों में उच्च माद्यमिक शिक्षक वर्ग -1 और वर्ग-2 के शिक्षक शामिल हैं। इन दिव्यांगों ने पत्रिका को बताया कि पूरे प्रदेश में वंचित दिव्यांगों की संख्या 500 से अधिक है, दिव्यांग आवेदकों ने कई बार स्कूल शिक्षा विभाग, लोक शिक्षण संचालनालय, में आवेदन दिया गया। उन्हें दूसरी काउंसिलिंग में मौका देने का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक इनका भविष्य अधर में है।
Updated on:
06 Oct 2022 03:20 pm
Published on:
06 Oct 2022 03:16 pm
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