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पं. खुशीलाल हॉस्पिटल में अब सोनोग्राफी, थॉयराइड आदि जांचें भी

इंटरव्यू---डॉ. उमेश शुक्ला , प्राचार्य एवं सीईओ, पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय

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पं. खुशीलाल हॉस्पिटल में अब सोनोग्राफी, थॉयराइड आदि जांचें भी

भोपाल. आयुष विभाग की आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी तीनों शाखाओं में सरकारी संस्थाओं से दवाओं की आपूर्ति की प्रक्रिया मरीजों और अस्पताल प्रबंधन के लिए परेशानी का सबब बन जाती है। इस प्रक्रिया में दवाओं की डिमांड भेजने से आपूर्ति तक कई दिन लग जाते हैं, परिणामस्वरूप मरीजों को कई दिनों तक दवाएं नहीं मिल पातीं। पं. खुशीलाल हॉस्पिटल को आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में देश का टॉप इंस्टीट्यूट माना जाता है, जिसके चलते यहां दूर-दूर से मरीज आते हैं, लेकिन कई बार दवाओं का टोटा परेशान करता है। प्राचार्य एवं सीईओ डॉ. उमेश शुक्ला इस आयुर्वेदिक हॉस्पिटल की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रस्तुत हैं उनसे पत्रिका एक्सपोज की बातचीज के प्रमुख अंश:

सवाल: दवाइयों के लिए मरीज परेशान हो रहे हैं, स्टॉक में दवाइयां नहीं है?
जवाब: शासन को दवाइयां भेजने का प्रस्ताव भेज दिया गया है। आगामी दो-तीन दिनों में दवाइयां मिल जाएंगी। शासन स्तर से लेकर हॉस्पिटल तक दवाइयों की आपूर्ति प्रक्रिया में कभी अवकाश आदि बीच में आने से कुछ देर हो सकती है।

सवाल: पंचकर्म विभाग में भी कुछ तेल व औषधियां नहीं मिल पा रही हैं, आवश्यक दवाएं बाजार से खरीद सकते हैं?
जवाब: पंचकर्म विभाग में जो भी तेल या दवाएं चाहिए, वे भी अन्य दवाओं के साथ सप्लाई में आ जाएंगी। आपूर्ति आने के बाद सभी तेल व औषधियां उपलब्ध हो जाएंगी। ये दवाएं लघु वनोपज संघ से आपूर्ति की जाती हैं। बाजार से दवाएं खरीदने की नीति शासन स्तर से ही नहीं है।

सवाल: पं. खुशीलाल हॉस्पिटल में जांचें सस्ती होने के कारण मरीज अधिक आते हैं, लेकिन सोनोग्राफी आदि की व्यवस्था नहीं थी?
जवाब: मरीजों की सुविधा को देखते हुए हॉस्पिटल में सोनोग्राफी की जांच बहुत कम शुल्क पर शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही थॉयराइड, प्रोस्टेट, विटामिन बी12, फेरेटिन, हार्मोन्स आदि की जांचें भी शुरू कर दी गई हैं।

सवाल: आपके प्रयासों से कॉलेज को दो पीजी कोर्स कराने की स्वीकृति मिली थी, उनकी क्या स्थित है?
जवाब: इस संस्थान को काय चिकित्सा और संहिता सिद्धान्त दो नए महत्वपूर्ण पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों की स्वीकृति प्रदान की गई थी। काय चिकित्सा और संहिता सिद्धान्त के ये दोनों ही पाठ्यक्रम शुरू किए जा चुके हैं।

सवाल: सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की दिशा में कोई कार्य शुरू किया गया?
जवाब: कॉलेज को आयुर्वेद में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं। एक 50 बेड सुपर स्पेशलिटी पंचकर्म हॉस्पिटल भवन और एक 500 सीट का ऑडिटोरियम का निर्माण कार्य प्रगति पर है। ये देश में अपने तरह की अलग ही सुविधा होगी।

सवाल: आयुर्वेद का महत्वपूर्ण अंग नाड़ी विज्ञान लुप्त होता जा रहा है, इसको बचाने की दिशा में संस्थान का योगदान?
जवाब: नाड़ी विज्ञान आयुर्वेद चिकित्सा में बहुत महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। इसके लिए संस्थान एक त्रिदिवसीय विशाल आयोजन करने जा रहा है, जिसमें पूरे देश से विशेष 95 चिकित्सक भाग लेने जा रहे हैं।