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आलोक पण्ड्या @ भोपाल. भाजपा और कांग्रेस मंदिरों की सीढिय़ां चढ़कर विधानसभा पहुंचने की रणनीति पर काम कर रही हैं। प्रदेश की 230 में से करीब 164 सीटें किसी न किसी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल से सीधे प्रभावित हैं। पिछले तीन चुनावों में प्रमुख धार्मिक स्थलों से जुड़ी ज्यादातर सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा है। हांलाकि मैहर और चित्रकूट में भाजपा का सिक्का नहीं चला है।
प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2003, 2008 और 2013 के ट्रेंड कहते हैं कि मंदिरों के रास्ते विधानसभा में पहुंचने का फॉर्मूला भाजपा को खूब फला है। महाकाल की नगरी उज्जैन की दोनों सीटों पर 15 साल से भाजपा का कब्जा है।
दिग्विजय सिंह के दौर में पीतांबरा माई का आशीर्वाद कांग्रेस और सपा को भी मिला। 1993 और 2003 में वहां से कांग्रेस के घनश्याम सिंह चुनाव जीते, लेकिन 2008 से यहां भाजपा के नरोत्तम मिश्रा ही जीत हासिल कर रहे हैं। ओरछा में रामराजा की शरण में पहुंचकर सत्ता की सीढिय़ां चढऩे के लिए हर पार्टी के नेता जतन करते रहे हैं, लेकिन यहां की जनता ने अपनी पसंद से ही विधायक चुना है।
धार्मिक स्थलों का सियासत पर असर
- महाकाल मंदिर का असर मालवा की 32 सीटों पर। अभी ज्यादातर सीटें भाजपा के पास।
- पीतांबरा पीठ से ग्वालियर-चंबल की 28 सीटें जुड़ी हैं।
- मैहर व चित्रकूट का असर विंध्य की 28 सीटों पर है।
- बुंदलेखंड में ओरछा मंदिर का 11 सीटों पर प्रभाव है।
- नर्मदा किनारे की 65 सीटों पर आस्था का असर दिखता है। अमरकंटक, होशंगाबाद, खंडवा, जबलपुर प्रमुख केंद्र हैं। नर्मदा पट्टी पर भाजपा का कब्जा है।
कौन किसकी शरण में
अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष: अमित शाह ने 11 जुलाई को सीएम की जनआशीर्वाद यात्रा का शुभारंभ उज्जैन में महाकाल के दर्शन कर किया। 6 अक्टूबर को कार्यकर्ता सम्मेलन के बहाने फिर दर्शन करने पहुंचे। शाह ने 12 जून को जबलपुर में नर्मदा की पूजा की।
राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष: राहुल गांधी ने 27-28 सितंबर को चित्रकूट के कामतानाथ मंदिर में पूजा की। 6 अक्टूबर को जबलपुर में नर्मदा की पूजा-आरती के बाद 15 को पीतांबरा पीठ पहुंचेे। भोपाल में विश्वकर्मा मंदिर में दर्शन किए।
Updated on:
20 Oct 2018 11:53 pm
Published on:
21 Oct 2018 07:22 am
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